मां खेतों में काम करती है, बेटी आटोमेटिक टायलेट बनाकर देश का नाम कर रही रोशन



छिंदवाड़ा। मां रेखा काकोड़िया खेतों में मजदूरी कर दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर रही है, वहीं बेटी सुलोचना काकोड़िया आटोमेटिक टॉयलेट क्लीनर बनाकर न सिर्फ जिले में बल्कि प्रदेश में अपना नाम रोशन कर रही है। सुलोचना को 19 मार्च को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गुजरात के गांधीनगर में सम्मानित करेंगे


इसके बाद सुलोचना विदेश भी जाएगी। आॅटोमेटिक टॉयलेट क्लीनर बनाकर सुर्खियों में आई सुलोचना छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ ब्लॉक के गुम्मन खमरिया निवासी और कन्या आश्रम छात्रावास में अध्ययनरत कक्षा आठवीं की छात्रा सुलोचना न सिर्फ देश में बल्कि विदेश में भी जिले का नाम रोशन करेगी।


सुलोचना की मां रेखा बेटी की इस कामयाबी को लेकर खुशी से फूले नहीं समा रही हैं। गौरतलब है कि विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी में आठवीं की छात्रा सुलोचना काकोड़िया ने आटोमेटिक टॉयलेट क्लीनर का मॉडल बनाया था, उस मॉडल को प्रदेश स्तर पर चयनित किया गया।


इसके बाद इंदौर में आयोजित प्रदर्शनी के बाद इस मॉडल का देश में नंबर लगा। यही वजह है कि राष्ट्रपति सुलोचना को सम्मानित करने जा रहे हैं। शुरू से रहा है संकट एक छोटे से गांव में पली बढ़ी सुलोचना के जीवन का सफर कभी आसान नहीं रहा। ग्यारह साल की उम्र में ही पिता का साया छिन गया।


मां रेखा काकोड़िया ने मजदूरी करके उसका पालन पोषण किया। सुलोचना की मां रेखा से जब पूछा गया कि आप बेटी की इस कामयाबी को कैसे देखती हैं, तो रेखा ने कहा कि मैंने कभी सपने में नहीं सोचा था कि मेरी बेटी इस तरह नाम रोशन करेगी। आज सारा देश मेरी बेटी पर नाज कर रहा है। रेखा काकोड़िया ने बताया कि हमारी जिंदगी तो किसी तरह गुजर गई, लेकिन मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी नाम रोशन करे और बेहतर काम करे। 

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रत्नाकर त्रिपाठी

रत्नाकर त्रिपाठी की गिनती प्रदेश के उन वरिष्ठ पत्रकारों में होती है जिन्हें लेखनी का धनी माना जा सकता है। राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर सहित कई अखबारों और ई टीवी तक अपनी विशिष्ट छाप छोड़ने वाले रत्नाकर प्रदेश के उन गिने चुने संपादकों में से एक है जिनकी अपनी विशिष्ट पहचान उनकी लेखनी से है।



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