मीसाबंदियों की पेंशन के बाद इंदौर विकास प्राधिकरण ने प्लाट आवंटन पर लगाई रोक



इंदौर। मीसाबंदियों की मिल रही पेंशन जांच के घेरे में आने के बाद अब उनके कोटे से प्लॉट आवंटन पर भी रोक लग गई है। इंदौर विकास प्राधिकरण ने इस मामले में सरकार को चिट्ठी लिखी है। बुधवार को जारी हुए स्कीम-140 के फ्लैटों के आवंटन में सभी कोटे में प्लॉट आरक्षित थे, लेकिन मीसाबंदियों का विकल्प नहीं रखा गया। आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोगों को पिछली सरकार ने लोकतंत्र सेनानी का दर्जा देकर पेंशन व अन्य सुविधाएं मुहैया कराई थीं। कांग्रेस की सरकार आने के बाद मीसाबंदियों की जांच के आदेश हो गए।


इसके बाद आईडीए के अफसर पसोपेश में थे क्योंकि आरक्षित, अनुसूचित जाति, जनजाति सहित अन्य कोटे में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और मीसाबंदियों के लिए भी चार प्रतिशत कोटा तय था। तत्कालीन सीईओ ने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि सरकार मीसाबंदियों की जांच कर रही है, इस कारण शासन के आदेश तक प्राधिकरण भी इस कोटे में मीसाबंदियों को प्लॉट आवंटित नहीं करेगा। हाल ही में फ्लैटों की लॉटरी में भी स्वतंत्रता सेनानियों का कोटा तो था लेकिन उसमें मीसाबंदियों को शामिल नहीं रखा गया।


पिछले साल ही हुआ था नियमों में बदलाव मध्यप्रदेश सरकार ने प्राधिकरणों के व्ययन नियम 2018 में मीसाबंदियों को भी स्वतंत्रता सेनानियों के साथ संपत्तियों की बिक्री में चार प्रतिशत कोटा तय किया था। विधानसभा चुनाव से पहले स्कीम-140 में प्लॉटों के टेंडरों में कुछ मीसाबंदियों ने भी निविदाएं भरी थीं लेकिन छह महीने के भीतर ही उन्हें कोटे से वंचित होना पड़ा। उल्लेखनीय है कि शहर में जिले में 229 मीसाबंदी हैं। इनकी पेंशन के मामले में ग्वालियर हाई कोर्ट में केस भी लगाया गया है। सरकार के आदेश तक रोक इस बारे में फैसला पूर्व के बोर्ड ने लिया था। मीसाबंदियों के कोटे के मामले में सरकार का आदेश आने तक अस्थाई रोक लगाई गई है। - विवेक श्रोत्रिय, सीईओ, आईडीए  

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