जीएसटी में छूट की सीमा बढ़ाने से मप्र को होगा 500 करोड़ का सालाना नुकसान



भोपाल। आर्थिक संकट से गुजर रही राज्य सरकार के खजाने को केंद्र सरकार के फैसले से एक और झटका लगा है। पिछले महीने केंद्र सरकार ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के प्रावधानों में परिवर्तन करते हुए 40 लाख रुपए से कम टर्नओवर वाले उद्यमियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट दी थी। इस छूट से मप्र सरकार की कमाई कम हो गई है। वित्त विभाग का अनुमान है कि इस फैसले से राज्य सरकार को लगभग 500 करोड़ रुपए सालाना नुकसान होगा।


अधिकारियों के मुताबिक जीएसटी छूट की सीमा बढ़ाने से मप्र को मिलने वाले टैक्स में काफी कमी आएगी, क्योंकि मप्र में छोटे उद्यमियों की संख्या काफी ज्यादा है और इनसे अच्छा खासा रेवेन्यू सरकार को मिलता है। जनवरी में जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी में परिवर्तन करते हुए 40 लाख रुपए से कम टर्नओवर वाली कंपनियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट दी थी। पहले यह छूट 20 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाले उद्यमियों को थी। जीएसटी छूट की सीमा बढ़ाने से आशंका यह भी जताई जा रही है कि इससे टैक्स चोरी की संभावनाएं बढ़ेगी।


केंद्र सरकार को ही इस फैसले से करीब सवा पांच हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक मप्र को इन छोटे उद्यमियों या व्यापारियों से हर महीने 35 से 40 करोड़ रुपए का टैक्स मिलता था। 20 से 40 लाख रुपए तक के सालाना टर्नओवर वाले मप्र में 2 लाख से ज्यादा व्यापारी हैं। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन की छूट मिलने से अब ये टैक्स के दायरे से बाहर हो गए हैं। इससे व्यापारियों या उद्यमियों को तो राहत मिली है, लेकिन राज्य सरकार के लिए यह फैसला एक और मुसीबत लेकर आया है। 50 हजार करोड़ रुपए की कर्ज माफी करने में जुटी राज्य सरकार हर तरफ से फंड इकठ्ठा करने में जुटी है। फंड की कमी की वजह से ही सरकार ने सभी निगम मंडलों से भी उनके खातों में जमा करीब 2 हजार करोड़ रुपए सरकार के खजाने में जमा करने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक कुछ सार्वजनिक उपक्रमों ने पैसा जमा भी कर दिया है। 

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