कांग्रेस अध्यक्ष प्रचार के लिए अब नहीं आएंगे इंदौर, प्रियंका के रोड शो के बाद कार्यक्रम किया रद्द



इंदौर। कांग्रेस के प्रचार के लिए अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इंदौर नहीं आएंगे। प्रियंका गांधी के रोड शो के बाद राहुल गांधी की पूर्व घोषित सभा का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। पहले 14 मई और फिर 16 मई को राहुल गांधी के इंदौर में सभा लेने की बात कही गई थी। अब 16 मई को मुख्यमंत्री कमलनाथ की जनसभा और प्रचार कार्यक्रम तय किए गए हैं। कांग्रेस ने इंदौर में पहले 12 मई को राहुल गांधी की सभा का ऐलान किया था


चिमनबाग मैदान को सभास्थल के रूप में तय भी कर दिया गया था। इस बीच उम्मीदवार पंकज संघवी और अन्य कांग्रेसी नेता प्रियंका गांधी को इंदौर लाने की कोशिशों में लगे रहे। तमाम नेता चाह रहे थे कि प्रियंका गांधी का रोड शो इंदौर में हो क्योंकि इससे पहले कभी प्रियंका इंदौर नहीं आई थी। ऐन वक्त पर प्रियंका गांधी ने इंदौर के लिए समय दे दिया। सोमवार को रोड शो हो भी गया और भारी हुजूम भी सड़कों पर नजर आया।


शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल के अनुसार क्योंकि प्रियंका इंदौर आ गई हैं, इसलिए अब राहुल इंदौर में प्रचार करने नहीं आएंगे। असल में दोनों की पूरे देश की सभी लोकसभा सीटों से प्रचार के लिए मांग हो रही है। एक ही शहर में दोनों स्टार प्रचारक समय नहीं देते हैं, यह नीति तय है। 16 मई को भी उनकी सभा की बात चली थी लेकिन ऐसा आयोजन नहीं है। 16 मई को मुख्यमंत्री कमलनाथ इंदौर आ रहे हैं।


वे सांवेर में जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद शाम को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में एक आयोजन होगा। इसमें शहर के प्रबुद्धजन, कारोबारी, सीए, प्रोफेशनल्स व विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री सभी से सीधी चर्चा करेंगे। चुनाव को लेकर भी बात होगी। 15 मई को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी इंदौर आ रहे हैं।


सभा में परेशानी कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं ने राहुल गांधी, कुछ कार्यकतार्ओं ने प्रियंका के रोड शो के बाद भी राहुल गांधी की सभा रद्द नहीं करने की मांग रखी थी। दलील दी गई थी कि दोनों स्टार प्रचारकों के आने से ज्यादा अच्छा प्रभाव दिखेगा। इस पर ऊपर से समझाइश दी गई कि जब मतदान नजदीक है और प्रचार खत्म होने में दो-तीन दिन बचे हैं, ऐसे में सभा करने से प्रत्याशी और पार्टी को उसके मैनेजमेंट में जुटना होगा। लिहाजा बूथ मैनेजमेंट की ओर से ध्यान हटेगा। लिहाजा आखिरी में दौर में बड़ी सभा की बजाय छोटे-छोटे प्रचार कार्यक्रम ही हों। 

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