कैग की रिपोर्ट में मप्र सरकार की वित्तीय खामिया उजागर, 40 हजार करोड़ से ज्यादा का हुआ नुकसान



भोपाल। विधानसभा के पटल पर गुरुवार को रखी गई भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन की कमियां उजागर कर दी है। कैग ने बताया है कि सरकार वाटर टैक्स, वैट, खनन की रॉयल्टी सहित कई तरह के टैक्स वसूल नहीं कर पाई। वहीं सार्वजनिक उपक्रमों में निवेश से भी सरकार लाभ नहीं कमा पाई। इससे सरकार को 40 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। कैग ने कहा कि राजस्व वसूली पर निगरानी रखने के लिए सरकार के पास कोई प्रणाली ही नहीं थी। विभागों के पास पुराने बकाया का कोई डेटा बेस नहीं था। कैग के मुताबिक राज्य सरकार 21 हजार 576 करोड़ रुपए विभिन्न संस्थाओं से नहीं वसूल सकी है।


12 संस्थानों ने नहीं दिया 20 हजार करोड़ का गारंटी शुल्क कैग ने बताया है कि 12 संस्थानों ने राज्य सरकार को 20 हजार 596 करोड़ रुपए गारंटी शुल्क के रूप में नहीं चुकाए हैं। कैग ने राज्य सरकार से कहा है कि सरकार की गारंटी का लाभ लेने वाली ये संस्थाएं जब तक पूरा शुल्क नहीं चुकातीं, तब तक सरकार इन्हें गारंटी देना बंद कर दें। इसके साथ ही मप्र विद्युत पारेषण कंपनी और मप्र पुलिस आवास निगम को दी गई गारंटी शुल्क की जांच की जाए, इन्होंने जरूरत से ज्यादा गारंटी शुल्क चुका दिया। 1627 करोड़ रुपए के वाटर टैक्स में अनियमितता कैग ने कहा है कि जल संसाधन विभाग में जल कर को लेकर 1627 करोड़ रुपए की अनियमितताएं हुई हैं। विभाग यह कर वसूल नहीं सका। इसमें उद्योगों, स्थानीय निकायों और किसानों से लगभग 1489 करोड़ रुपए वसूले जाने थे।


रेत खनन में 605 करोड़ रुपए का नुकसान कैग ने बताया है कि रेत खनन से सरकार को 2016-17 में 3168 करोड़ रुपए की कमाई होनी थी, लेकिन सिर्फ 2610 करोड़ रुपए का राजस्व ही मिला। इससे सरकार को 605 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। कैग ने कहा कि रेत के अवैध परिवहन को रोकने के लिए पर्याप्त जांच चौकियां स्थापित नहीं की गईं। सार्वजनिक उपक्रमों से 3600 करोड़ पानी में कैग ने बताया है कि राज्य सरकार ने मार्च 2017 तक 72 सार्वजनिक उपक्रमों में 81 हजार 529 करोड़ रुपए का निवेश किया था। पिछले तीन साल में 57 सार्वजनिक उपक्रमों में निवेश करने की वजह से सरकारी खजाने का 3672 करोड़ रुपए बेकार चला गया। कैग ने कहा है कि जिन निगम-मंडलों की बैलेंस शीट अपडेट नहीं है, सरकार उन्हें वित्तीय सहायता देना बंद करे। इसके साथ ही घाटे में चल रहे निगम-मंंडलों की बिना देरी किए समीक्षा करे। 1 हजार करोड़ का वाणिज्यिक कर कम वसूलाकैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि वाणिज्यिक कर विभाग ने 1030 करोड़ रुपए के कर का कम निर्धारण किया है। इससे सरकार के खजाने पर असर पड़ा है। 

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