नेताओं की सिर-फुटौव्वल का इंतजाम कर गए राहुल



एक साहब कवि सम्मेलन में अपनी रचना सुना रहे थे। अचानक तीन-चार लोग लाठी लेकर मंच की ओर लपके। कवि ने घिघियाकर कहा, ‘बोर हो रहे हों तो कविता बंद कर दूं।’ लठैत बोले, ‘नहीं, आप तो हमारे मेहमान हैं। कविता सुनाइए। हम तो उस दुष्ट की खबर लेने जा रहे हैं, जिसने आपको यहां बुलाया।’ ऐसा ही गांधी के कल के मध्यप्रदेश प्रवास के  दौरान भी हुआ। वह भोजपुर गए। जहां सुरेश पचौरी प्रत्याशी हैं। गंजबासौदा में सभा ली, जहां कमलनाथ के खास निशंक जैन उम्मीदवार हैं। जिस बुधनी में वह मुंजारे की तरह सुनाई दिए, वहां से अरुण यादव चुनाव लड़ रहे हैं। तीनों दमदार उम्मीदवार हैं। तो सवाल यह कि क्या कांग्रेस केवल गांधी को उपयोग केवल वहीं कर रही  है जिन उम्मीदवारों की ऊपर तक पहुंच हैं। बाकी उम्मीदवारों की अगर चिंता नहीं है तो भगवान ही मालिक। वैसे भी राहुल के अगर स्टार प्रचारक है तो भी हाल वही है।  पहले से ही मजबूत जगहों पर गांधी के जाने का क्या तुक था।


उन्हें वहां जाना चाहिए था, जहां पार्टी इन तीन सीटों की तुलना में कमजोर है। कांग्रेस की बीते पंद्रह साल की दशा और दिशा के चलते गांधी को ऐसी सीटें ढूंढने में कोई समय भी नहीं लगता। लेकिन आमंत्रण देने और कार्यक्रम तय करने वालों की मनमर्जी के चलते इन सभाओं का कोई खास असर होता नजर नहीं आता। अब कांग्रेस में गांधी के खिलाफ भला कोई क्या बोलेगा। इसलिए कमजोर स्थिति वाले प्रत्याशी लाठी लेकर उन कर्णधारों को ही ढूंढते रह जाएंगे, जिन्होंने गांधी को बुलाया था।  भाजपा के एक दिवंगत वरिष्ठ नेता एक से अधिक बार इस प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उनकी एक खास कुख्याती थी। वह यह कि चुनाव मेंं जिस सीट पर वह सभा करते, वहां कुछ न कुछ ऐसा कह आते कि पार्टी का प्रत्याशी ही मुसीबत में आ जाता था। गांधी तो इससे भी एक कदम आगे निकल गए। कुछ ऐसे कि समूची राज्य इकाई संकट में आ सकती है। बुधनी की सभा में उन्होंने कह दिया, अरुण यादव प्रदेश का भविष्य है।


गांधी की हिंदी देखकर माना जा सकता है कि वह ‘प्रदेश का भविष्य’ का गूढ़ार्थ न समझते हों। लेकिन राज्य के कांग्रेसी हिंदी जानने वाले समझते हैं कि इसका मतलब मुख्यमंत्री पद होता है।  जिस पद के लिए चुनाव जीतने से पहले ही कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच जूतमपैजार चल रही हो, उस पद की दौड़ में यादव को भी शामिल करके गांधी ने पार्टी में सिर-फुटौव्वल के नये अध्याय का सूत्रपात कर दिया है। वह अध्याय, पूर्व में जिसके पन्ने खुलने पर पार्टी पंद्रह साल तक सत्ता से बाहर रहने को अभिशप्त है। खैर, समरथ को नहीं दोष गुसार्इं। यह हम नहीं, उन कांग्रेसियों का मत होगा, जो मन मसोसकर यह सब देख और सह रहे हैं। राजीव गांधी याद आते हैं। स्वतंत्रता दिवस के एक समारोह में उन्होंने एक से अधिक बार गणतंत्र दिवस कह दिया था। तब एक अखबार ने कार्टून छापा। इसमें एक कांग्रेसी दूसरे से कह रहा था, ‘कम से कम दिवस को तो उन्होंने दिवस बोल दिया!’ कांग्रेस के आज भी यही हालात हैं। गांधी ने जो बोल दिया, उसे यह कहकर रफू करना ही उनकी नीयती है, कि ‘साहब ने नकल को तो नकल बोला है ना!’ बाकी पार्टी की नीयती जो हो, सो होती रहे।  

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प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर वरिष्ठ पत्रकार हैं और भोपाल तथा इंदौर से प्रकाशित एल एन स्टार दैनिक समाचार पत्र के संपादक है। यह कालम अखबार के प्रथम पृष्ठ पर पहले कालम में प्रकाशित होता है, उसी को हम वेबखबर में भी प्रकाशित करते हैं। प्रकाश पिछले तीन दशक से भोपाल के कई प्रमुख अखबारों, दैनिक देशबंधु रायपुर और भोपाल, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण सहित अन्य अखबारों में काम करते रहे हैं। लेखक अपनी तल्ख राजनीतिक टिप्णियों और विश्लेषण के कारण मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान रखते हैं।



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