अभिनंदन जी! बचा लीजिये मेरी नींद को सर्जिकल स्ट्राइक से



आदरणीय अभिनंदन वर्तमान जी। जितनी खुशी आपको पाकिस्तान की कैद से छूटकर आते देखकर हुई थी, उतनी ही अधिक आशंका से वशीभूत होकर आपको यह पाती भेज रहा हूं। सोशल मीडिया पर किसी ने सवाल उठाया है कि क्या आपको रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आना चाहिए। इधर, बॉलीवुड पिल पड़ा है कि आप पर फिल्म बनायी जाए। यही दो तत्व मेरे सपनों में आकर इस गरीब को ले-देकर नसीब होने वाली सुकून की नींद पर सर्जिकल स्ट्राइक कर रहे हैं।  मालिक, आप तो फायटर प्लेन उड़ाइए। रिटायरमेंट के बाद सुकून से दक्षिण भारत में समुद्र तट की लहरों और हरियाली से भरी-पूरी वादियों का आनंद लीजिए। क्योंकि अगर आप राजनीति में आ गये तो क्या होगा, यह सोचकर ही मन अकुला रहा है। आपने नमक का कर्ज अदा किया तो तय है कि कमल की पंखुड़ी पर सवार हो जाएंगे। मेरी कल्पना में आप भगवा कपड़ा पहनकर किसी मंच पर चिंघाड़ते दिख रहे हैं, ‘मित्रों! उस रोज पाकिस्तानी विमान का पीछा करते समय मैं अपने भीतर 56 इंच का सीना धड़कता महसूस कर रहा था। मैं जवाहर लाल नेहरू के कारण पकड़ा गया। क्योंकि उन्होंने 1947 में सख्ती दिखाई होती तो वह जगह हमारी होती, जहां मेरा विमान गिरा  था। इसलिए मेरे साथ हुए खराब व्यवहार की जिम्मेदारी कांग्रेस की है।


’ अभिनंदन, यदि आप पंजे में जा छिपे तो भी मंजर अनूठा होगा। आप बोलोगे, ‘अरे भैया! मोदीजी ने मेरे प्लेन का फ्यूल चुराकर अंबानी को दे दिया था। इसलिए प्लेन गिर पड़ा। चौकीदार पेट्रोल का चोर भी निकला।’ वामपंथी चोला ओढ़ने पर आप, ‘अल्पसंख्यक देश के खिलाफ कार्रवाई करने पर मुझे वह दिन देखना पड़ा था’ कहेंगे और तृणमूल की ममतामयी छांव में जाने या अरविंद केजरीवाल की झाड़ू को गले से लगाने पर आपका श्रीमुख, ‘मोदीजी! क्या सबूत है कि तुमने ही मुझे छुड़वाया था!’ कहते दिख जाओगे। कहीं आप बुआ, बबुआ या लालू के फेर में पड़ गये तो फिर क्या कहना! आपका सारा शेष जीवन यही कहते गुजरेगा कि मनुवादी मोदी सरकार ने मुझे जानबूझकर खटारा विमान दिया था। मालिक! आप पर फिल्म बनने की कल्पना तो रामसे ब्रदर्स की तरह डर से प्राण सुखाये जा रही है। बॉलीवुड के भाई लोगों का कोई भरोसा नहीं। कहीं महेश भट्ट ने यह काम किया तो आपका तलाक हो जाना तय है। क्योंकि भट्ट आपका रोल इमरान हाशमी को दे देंगे। फिर होगा यह कि फिल्म में अभिनंदन उनको भारत की सीमा तक छोड़ने आयी पाकिस्तानी महिला अफसर से रोमांस करते ही दिखा दिए जाएंगे।


भट्ट की हाशमी वाले तड़के की ‘लिप-लॉक’ पद्धति याद है ना आपको! राजश्री फिल्म्स ने यह फिल्म बनाने का पुण्य कार्य हाथ में ले लिया तो निश्चित है कि वह आपको इमरान की संभावित चौथी शादी के गीत-संगीत कार्यक्रम में नाचता हुआ दिखा दें, वह भी सपत्नीक। दीपा मेहता के प्रोडक्शन हाउस की ओर तो मुंह करके भी मत सोइएगा। क्योंकि यह फिल्म उनके हत्थे चढ़ गयी तो आप और इमरान के बीच वह ‘फायर’ फिल्म वाली शबाना आजमी तथा नंदिता दास जैसे संबंध फिल्माने में देर नहीं करेंगी। राजकुमार हीरानी की तो कोशिश रहेगी कि आपको पाकिस्तान की जमीन पर उसी दिगंबर हालत में उतरता दिखा दें, जैसा उन्होंने आमीर खान को ‘पीके’ में स्पेसशिप से उतरते दिखा दिया था। अंतर यही होगा कि आमीर की लाज एक टेप रिकॉर्डर ने बचायी थी और आपकी आबरू विमान में मौजूद रेडियो सेट के हवाले कर दी जाए। गनीमत है कि अनिल शर्मा अब फिल्में नहीं बना रहे, वरना वो अपने प्रोडक्शन में आपको पाकिस्तान में हैंडपंप उखाड़कर उससे इमरान और जनरल बाजवा की सुताई लगाते दिखा देते। मनमोहन देसाई जीवित नहीं हैं, वरना वो तो क्लाइमेक्स में आपको अपनी मूंछों पर एक ओर इमरान और दूसरी तरफ बाजवा को लटकाकर उनकी जान लेते दिखा देते।  अभिनंदन, विमान उड़ाइए। फिर आराम से रिटायरमेंट लेकर घर-परिवार देखिए। आप महावीर हैं। यह सियासत और बॉलीवुड महा घाघों का अड्डा है। इससे बचिए। जयहिंद। 

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रत्नाकर त्रिपाठी

रत्नाकर त्रिपाठी की गिनती प्रदेश के उन वरिष्ठ पत्रकारों में होती है जिन्हें लेखनी का धनी माना जा सकता है। राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर सहित कई अखबारों और ई टीवी तक अपनी विशिष्ट छाप छोड़ने वाले रत्नाकर प्रदेश के उन गिने चुने संपादकों में से एक है जिनकी अपनी विशिष्ट पहचान उनकी लेखनी से है।



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