अय्यर अर्थात् अय्यार...!



78 साल के मणिशंकर अय्यर फिर विवाद में हैं। शायद यही उनकी यूएसपी बन गयी है। कहते हैं कि भगवान शंकर का तीसरा नेत्र खुलने पर दुनिया तबाह हो जाती है। लेकिन इस इंसानी शंकर का मुंह खुलने पर कांग्रेस के दरकने की नौबत आ जाती है। आप उनके व्यक्तित्व में अंगद का पांव तलाश सकते हैं। क्योंकि उन्होंने जो बोला, उसे वापस नहीं लिया। उस पर ही अड़े रहे। पाकिस्तान के प्रति उनका अनुराग इतना कि वह इस मामले में दिवंगत पत्रकार कुलदीप नय्यर से भी दो कदम आगे नजर आते हैं। विरोधियों के लिए  उनका गुस्सा मायावती, ममता बनर्जी और दिवंगत जे जयललिता को भी मात देता है। एक समय वह संसद में किसी को मारने के लिए आगे बढ़े थे तो आज उन्होंने एक टीवी चैनल के रिपोर्टर को पीटने के लिए मुट्ठी भींच ली। इसमें नाकाम रहे तो मुंह से भद्दे शब्द निकाल दिये


विवाद दर विवाद इस कांग्रेसी नेता के सियासी अस्तित्व की खुराक बन कर रह गये प्रतीत होते हैं।  - अय्यर की पैदाइश अविभाजित भारत के लाहौर में हुई। यह अब पाकिस्तान का हिस्सा है। भारतीय विदेश सेवा में आने के बाद उन्हें कराची में भारत के पहले कौंसल-जनरल के तौर पर काम करने का मौका मिला। बचपन का असर हो या कराची की आबो-हवा, अय्यर इस देश के प्रति आकंठ प्रेम में नजर आते हैं। वहां की हुकूमत पर उनका इतना यकीन है कि सन 2015 में उन्होंने पाकिस्तान से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद से हटाने हेतु सहयोग मांग लिया था। अय्यर ने यह बात पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘द डान’ को दिए इंटरव्यू में कही थी। जिस समय डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब सन 2013 में पाकिस्तान ने पांच भारतीय सैनिकों की हत्या कर दी। समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने संसद में इस पर चर्चा कराने की बात कही।


अय्यर ने इसका विरोध किया। गुस्साए अग्रवाल ने अय्यर को पाकिस्तानी जासूस कह दिया। नतीजा यह कि अय्यर संसद में ही अग्रवाल को मारने दौड़ पडेÞ थे।  - मणिशंकर बीते साल कह चुके हैं कि उन्हें सच्चा प्यार पाकिस्तान मे मिलता है। अपने देश में उन्हें केवल नफरत हासिल हुई है। वैसे ‘नफरत’ के लिए उनका मायावी हिसाब है। क्योंकि वह पैरिस में सन 2015 में हुए भीषण आतंकवादी हमले का समर्थन कर चुके हैं। उनकी दलील थी कि यह फ्रांस में बुर्के पर प्रतिबंध लगाने की प्रतिक्रिया में किया गया। बता दें कि इस हमले में कम से कम 130 बेगुनाह लोग मारे गये थे। अय्यर ने फ्रांस की मशहूर पत्रिका चार्ली हेब्दो के दफ्तर पर मुस्लिम चरमपंथियों द्वारा नफरत से भरकर किये गये हमले को भी  उचित करार दिया था।  इतना कठोर होकर किया था मुलायम का अपमान...! सन 2000 का वाकया है।


अमर सिंह तब समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव की आंख का तारा हुआ करते थे। अय्यर का सिंह से विवाद हो गया। सिंह के अनुसार अय्यर ने उनसे कहा, ‘वो मुलायम! उसकी सूरत मुझसे बहुत मिलती-जुलती है। इसकी वजह यह हो सकती है कि मेरे पिता का उत्तरप्रदेश भी आना-जाना रहा है। तुम्हें मुलायम की मां से इस बारे में पूछताछ करना चाहिए।’ --------------------------------------------------- पापा के दोस्त थे, बेटे की मुसीबत हैं अय्यर को नेतागिरी का चस्का यूनिवर्सिटी आॅफ कैम्ब्रिज में पढ़ने के दौरान ही लग गया था। राहुल गांधी के दिवंगत पिता राजीव वहां अय्यर के जूनियर थे। मणिशंकर  ने वहां के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा। इसमें उन्हें राजीव ने समर्थन दिया। अय्यर ने राजीव की हत्या के बाद उनके सम्मान में ‘रिमेंबरिंग राजीव’ नामक किताब भी लिखी।


लेकिन अपने पिता के यही दोस्त अब राहुल गांधी का सिर दर्द बन गये हैं।  --------------------------------------------------------- महज संयोग या फिर जोरदार टाइमिंग अय्यर ने सन 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले कहा था, ‘एक चाय वाला (नरेंद्र मोदी) देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। हां, वह चाहे तो कांग्रेस की बैठकों में चाय बेचने का काम कर सकता है।’ बीते साल गुजरात विधानसभा चुनाव के ठीक पहले उन्होंने मोदी को ‘नीच’ कहा। अब लोकसभा में मतदान के अंतिम चरण से ऐन पहले उन्होंने इसी कथन को सही कह दिया। बता दें कि ‘चाय वाला’ और ‘नीच’ को मोदी ने जमकर भुनाया तथा यह भाजपा की क्रमश: देश और गुजरात में जीत में मददगार साबित हुआ। तो ऐसे आग उगलते कथन महज संयोग हैं या फिर किसी टाइमिंग से इन्हें जोड़ा जा सकता है...! जरा सोचिए।  --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

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