फरहान अख्तर



फरहान अख्तर भारतीय बाॅलीवुड अभिनेता, निर्देशक, निर्माता, लेखक, पार्श्वगायक हैं. फरहान का जन्म 9 जनवरी 1974 को मुंबई में हुआ. उनका जन्म एक ईरानी-मुस्लिम परिवार में हुआ था. जावेद अख्तर उनके पिता हैं. वह बॉलीवुड के मशहूर लेखक और कवि हैं. फरहान की मां का नाम हनी ईरानी है, वह बॉलीवुड अभिनेत्री और लेखिका हैं. बहुत ही कम समय में फराहन ने कड़ी मेहनत से खुद को फिल्मी दुनिया में स्थापित किया है. साथ ही वह सफल निर्माता-निर्देशक भी हैं. फरहान ने अपने करियर की शुरुआत महज 17 साल की उम्र में बतौर सहायक निर्देशक की थी. उन्होंने फिल्म ‘दिल चाहता है’ से निर्देशक के रूप में डेब्यू किया. फिल्म को आलोचकों की काफी तारीफ मिली. फरहान ने फिल्म ‘राॅक आॅन’ से एक एक्टर के रूप में करियर की शुरुआत की. इस फिल्म में अख्तर ने गायकी भी की. फरहान को फिल्म ‘राॅक आॅन’ के लिए नेशनल अवार्ड से भी सम्मानित किया गया. फरहान की अन्य मुख्य फिल्में ‘जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा’, ‘दिल धड़कने दो’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘कार्तिक काॅलिंग कार्तिक’ हैं. करियर फरहान अख्तर ने अपना करियर 17 साल की उम्र में लमहे (1991) जैसी फ़िल्मों के लिए सिनेमाटोग्राफर-निर्देशक मनमोहन सिंह के साथ प्रशिक्षु के रूप में शुरू किया था। 1997 में फ़िल्म हिमालय पुत्र (1997) में निर्देशक पंकज पराशर के सहायक के तौर पर काम करने के बाद तीन साल के लिए एक टेलीविजन प्रोडक्शन हाउस को सेवा देनेवाले फरहान विभिन्न तरह के कार्य कर रहे हैं।


उन्हों‍ने 2001 की हिट फ़िल्म- दिल चाहता है के साथ हिंदी सिनेमा में लेखन और निर्देशन करियर की शुरुआत की, जिसका निर्माण एक्सेल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने किया, जिसका निर्माण 1999 में उन्होंने रितेश सिदवानी के साथ किया था। यह फ़िल्म तीन दोस्तों (आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना ने इसमें अभिनय किया) की कहानी है, जो हाल ही में कॉलेज से स्नातक डिग्री लेते हैं और फ़िल्म‍ प्यार और दोस्ती के इर्द-गिर्द घूमती है। इसे समीक्षकों ने तो सराहा ही, व्यावसायिक कामयाबी भी मिली, खासकर युवा पीढ़ी में यह काफी लोकप्रिय हुई। इस फ़िल्म को विभिन्न अवार्ड समारोहों में सर्वश्रेष्ठ पटकथा, निर्देशन और फ़िल्म सहित कई नामांकन मिले। फ़िल्म को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फ़िल्म का उस साल का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला। अख्तर फिर अपनी अगली परियोजना, ऋतिक रोशन और प्रीति जिंटा अभिनीत फ़िल्म लक्ष्य (2004), के निर्माण में जुटे, जो उन लक्ष्यहीन नौजवानों के बारे में थी, जो आखिर में अपने लिए एक लक्ष्य तय करने में कामयाब होते हैं। हालांकि फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी हासिल नहीं की, पर बहुत सारे समीक्षकों ने प्रशंसा की।] फ़िल्म की स्क्रिप्ट उनके पिता जावेद अख्तर ने लिखी थी। इस बीच, उन्होंने गुरिंदर चड्ढा की 2004 की हॉलीवुड फ़िल्म ब्राइड एंड प्रिज्युडिस के लिए भी गीत लिखे. उसके बाद उन्होंने 1978 की अमिताभ बच्चन की फ़िल्म डॉन का रीमेक [[डॉन- द चेज़ विगिंस अगेन|डॉन - द चेज़ विगिंस अगेन]] शुरू किया, जिसमें मुख्य भूमिका में शाहरुख खान थे। Personal Life- उन्होंने 3 साल उनके साथ रिश्ते में रहने के बाद, 2000 में Adhuna Bhabani से शादी की।


इन की दो बेटियां Shakya और Akira हैं। 16 साल की शादी के बाद 21 जनवरी 2016 को इस couple ने आधिकारिक तौर पर जुदाई की घोषणा की। फरहान और फैशन फरहान अख्तर एक बी-शहर अभिनेता है जो फैशन के अपने सहज भावना के लिए जाना जाता है। एक लाल कालीन घटना या सिर्फ अपने नवीनतम रिलीज के एक बढ़ावा देने के लिए यह हो, वह गलत जाने के लिए विफल रहता है कभी नहीं! उनके लिए फैशन एक स्वाभाविक बात है, यह आसानी से उसे करने के लिए आता है। यह कुछ ऐसा है जो आप पर तनाव चाहिए नहीं है। उन्होंने कहा कि एक अच्छी तरह से groomed- suited- से सेकंड में पीला Keds में एक लड़के को आदमी तक जा सकता है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "फैशन तुम कौन हो के अपने व्यक्तिगत आत्म का एक विस्तार है। यदि आपका संस्कृति, विचारों और आपके दृष्टिकोण को दर्शाता है। "वास्तव में, हम अपने काम में यह सब देखते हैं। फरहान एक ब्रांड सनकी नहीं है, वह कुछ भी आरामदायक, यू की तरह क्या के लिए और अधिक है कि पहनने में विश्वास रखता है। क्योंकि सब के बाद जब आप अपने कर रहे हैं, तो आप एक फरहान अख्तर है एक एक फैशन चिंताजनक ग़लती कभी नहीं हो सकता है! रोचक तथ्य:- 1 -फरहान अख्तर फिल्म शोले को 50 बार देख चुके हैं, लेकिन उन्हें यह दीवार से बेहतर नहीं लगी। 2-अख्तर ने फिल्म फिल्म दिल चाहता है का निर्देशन तब किया था जब उनकी माँ ने उन्हें घर से निकलने की धमकी दी थी। फराह अपने माँ को अपना सबसे बड़ा आलोचक मानते हैं। 3-फिल्म जिंदगी मिलेगी ना दुबारा में फराहन ने काफी एडवेंचर किये। लेकिन उन्हें अपनी असल जिंदगी में कॉकरोच से बेहद डर लगता है। 4 - आमिर खान को रंग दे बसंती मिलने से पहले फराहन को ऑफर हुई थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था, जिसका अफ़सोस उन्हें आज भी है। 5-फराहन खान की जिंदगी का सबसे खराब वक्त 1992-93 में था, जब उन्हें दंगों के दौरान मुस्लिम होने का खामियाजा भुगतना पड़ा।

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