होम शख्सियत
jagadish-chandra-bose-was-the-first-such-scientist

शख्सियत: इनकी सोच थी रिमोट कंट्रोल सिस्टम, मार्कोनी से होती है तुलना

जगदीशचंद्र बोस पहले ऐसे वैज्ञानिक थे, जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों के अध्ययन पर काम किया। आज देश उन्हें मार्कोनी के साथ रेडियो का सह-आविष्कारक मानता है।  आगे पढ़ें

harivansh-rai-bachchan-poet-tells-world-that-world

हरिवंश राय बच्चन: एक कवि जिसने 'दुनिया' को बताया कि 'दुनिया' के अंदर भी एक 'दुनिया' है

हरिवंश राय बच्चन यानी हरिवंश राय श्रीवास्तव, यानी हिंदी साहित्य के लोकप्रिय नामों में से एक नाम, यानी मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन के पिता, यानी हिंदी की सबसे अधिक लोकप्रिय रचना 'मधुशाला' के रचयिता.  आगे पढ़ें

ravivari-important-personalities-special-story-kno

शख्सियत: बटुकेश्वर दत्त

भारतीय स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त का जन्म बंगाल के औरी गांव में हुआ था। उन्हें लोग बट्टू दत्त और मोहन के नाम से भी जानते थे। जब उन्होंने सेंट्रल असेंबली पर बम फेंका, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, तो वे देश भर में चर्चित हो गए थे।  आगे पढ़ें

a-look-at-the-life-of-brigadier-kuldeep-singh-chan

ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी के जीवन पर एक नजर

1971 में भारत-पाक के लोंगेवाल युद्ध में दुश्मनों को धूल चटाने वाले ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी के निधन से देश मे शोक की लहर फैल गई है। ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी में हर तरह की परिस्थितियों में अपने को काबू करने का अनोखा ही अदम्य साहस था।  आगे पढ़ें

bhojpuri-dinesh-lal-yadav-nirahua-border-race-3-po

'बॉर्डर' के एक्टर निरहुआ के खिलाफ जान से मारने की धमकी की शिकायत दर्ज, सलमान की 'रेस 3' से टकराई थी फिल्म

नई दिल्ली: भोजपुरी सिनेमा के जुबली स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ (Dinesh Lal Yadav Nirahua) की नई फिल्म 'बॉर्डर' ईद पर रिलीज हुई थी और फिल्म ने बिहार और यूपी के कुछ सेंटर्स में सलमान खान की 'रेस 3' को जबरदस्त टक्कर भी दी. फिल्म को मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स से फिल्म की टीम बेहद खुश है लेकिन फिल्म के लीड एक्टर निरहुआ के लिए बुरी खबर आई है. निरहुआ के खिलाफ जान से मारने की धमकी देने की मुंबई में शिकायत दर्ज कराई गई है. भोजपुरी सिनेमा के पीआरओ और पत्रकार शशिकांत सिंह ने निरहुआ के साथ अपनी इस बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया है और उन पर गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं. उधर, निरहुआ के छोटे भाई और फिल्म एक्टर परवेश लाल यादव ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से शशिकांत सोशल मीडिया पर 'बॉर्डर' के खिलाफ नेगेटिव अभियान चलाए हुए थे. नेगेटिव बातें फैला रहे थे. हालांकि उन्होंने निरहुआ और शशिकांत की बातचीत के बारे में कुछ ज्यादा नहीं कहा, लेकिन ये माना कि दोनों में गरमागर्मी हुई थी. निरहुआ की हालिया रिलीज को लेकर शशिकांत लगातार अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर लिख रहे थे. वे फिल्म से जुड़े अलग-अलग तथ्य दे रहे थे. शशिकांत ने निरहुआ के साथ हुई इस पूरी बातचीत को रिकॉर्ड कर रखा है, और इस बारे में निरहुआ को भी बातचीत के दौरान जानकारी दी थी. इस ऑडियो में जो आवाज सुनाई दे रही है वह कथित तौर पर निरहुआ की बताई जा रही है. शशिकांत ने निरहुआ के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज करवा दी है. निरहुआ के भाई परवेश लाल यादव का कहना है कि वे भी पटना में शशिकांत के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने जा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि शशिकांत लंबे समय से 'बॉर्डर' के खिलाफ नेगेटिव अभियान चलाए हुए थे. फिल्म में मेहनत का पसीना लगा होता है, ऐसे में इस तरह की बातें करना सही नहीं है. आरोपों का दौर शुरू हो चुका है और मामला पुलिस तक पहुंच गया है. अब निरहुआ के बयान का इंतजार किया जा रहा है.   आगे पढ़ें

pm-modi-interacted-with-beneficiaries-of-digital-i

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम में बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को डिजिटल इंडिया मुहिम के विभिन्न अभियानों के लाभार्थियों से बातचीत की। इस बातचीत में मोदी ने कहा कि डिजिटल सेवाओं की पहुंच के लिए एक्सेस पॉइंट की तरह काम करने वाले तीन लाख सामान्य सेवा केंद्रों के नेटवर्क ने रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों को बढ़ावा देकर नागरिकों को सशक्त किया है। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने कई सेवाओं को लोगों के दरवाजे तक पहुंचाने का काम किया था। उन्होंने बताया कि डिजिटल इंडिया लोगों तक विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के फायदे पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी ने रेल टिकट बुक करने और ऑनलाइन बिलों का भुगतान करने में मदद की है जिससे काफी सहूलियत हुई है। उन्होंने कहा , ‘हमने यह सुनिश्चित किया कि प्रौद्योगिकी के फायदे कुछ ही लोगों तक सीमित नहीं रहें बल्कि ये समाज के हर वर्ग तक पहुंचें। हमने सामान्य सेवा केंद्रो के नेटवर्क को मजबूत किया है।’ पीएम ने कहा कि यह मुहिम गांव के स्तर पर उद्यमियों का समूह तैयार करने की है। प्रधानमंत्री ने इन केंद्रों को संचालित करने वाले ग्राम स्तरीय उद्यमियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया को देश के गांवों एवं युवाओं को जोड़ने के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों में इसने कई सेवाओं को आम लोगों के घरों के दरवाजे तक पहुंचाया है। मोदी ने कहा, ‘डिजिटल सशक्तिकरण के हर पहलू पर (गांवों में फाइबर ऑप्टिक्स पहुंचाने से डिजिटल शिक्षा तक) काम किया गया है।’ इस मौके पर डिजिटल इंडिया के कुछ लाभार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। गौतम बुद्ध नगर के जितेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि उनके गांव में इंटरनेट कनेक्शन पहुंचने के बाद बच्चों को ऑनलाइन कोचिंग मिलने लगी है। इसके अलावा डिजिटल शिक्षा बढ़ रही है और बुजुर्गों की पेंशन संबंधी दिक्कतों को प्रौद्योगिकी के जरिए सुलझाया जाने लगा है। मोदी ने लाभार्थियों से कहा कि वे कारोबारियों पर भीम ऐप इंस्टॉल करने का दबाव बनाएं ताकि सेवाओं एवं सामानों के लिए डिजिटल तरीके से भुगतान किया जा सके।   आगे पढ़ें

farhan-akhtar

फरहान अख्तर

फरहान अख्तर भारतीय बाॅलीवुड अभिनेता, निर्देशक, निर्माता, लेखक, पार्श्वगायक हैं. फरहान का जन्म 9 जनवरी 1974 को मुंबई में हुआ. उनका जन्म एक ईरानी-मुस्लिम परिवार में हुआ था. जावेद अख्तर उनके पिता हैं. वह बॉलीवुड के मशहूर लेखक और कवि हैं. फरहान की मां का नाम हनी ईरानी है, वह बॉलीवुड अभिनेत्री और लेखिका हैं. बहुत ही कम समय में फराहन ने कड़ी मेहनत से खुद को फिल्मी दुनिया में स्थापित किया है. साथ ही वह सफल निर्माता-निर्देशक भी हैं. फरहान ने अपने करियर की शुरुआत महज 17 साल की उम्र में बतौर सहायक निर्देशक की थी. उन्होंने फिल्म ‘दिल चाहता है’ से निर्देशक के रूप में डेब्यू किया. फिल्म को आलोचकों की काफी तारीफ मिली. फरहान ने फिल्म ‘राॅक आॅन’ से एक एक्टर के रूप में करियर की शुरुआत की. इस फिल्म में अख्तर ने गायकी भी की. फरहान को फिल्म ‘राॅक आॅन’ के लिए नेशनल अवार्ड से भी सम्मानित किया गया. फरहान की अन्य मुख्य फिल्में ‘जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा’, ‘दिल धड़कने दो’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘कार्तिक काॅलिंग कार्तिक’ हैं. करियर फरहान अख्तर ने अपना करियर 17 साल की उम्र में लमहे (1991) जैसी फ़िल्मों के लिए सिनेमाटोग्राफर-निर्देशक मनमोहन सिंह के साथ प्रशिक्षु के रूप में शुरू किया था। 1997 में फ़िल्म हिमालय पुत्र (1997) में निर्देशक पंकज पराशर के सहायक के तौर पर काम करने के बाद तीन साल के लिए एक टेलीविजन प्रोडक्शन हाउस को सेवा देनेवाले फरहान विभिन्न तरह के कार्य कर रहे हैं। उन्हों‍ने 2001 की हिट फ़िल्म- दिल चाहता है के साथ हिंदी सिनेमा में लेखन और निर्देशन करियर की शुरुआत की, जिसका निर्माण एक्सेल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने किया, जिसका निर्माण 1999 में उन्होंने रितेश सिदवानी के साथ किया था। यह फ़िल्म तीन दोस्तों (आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना ने इसमें अभिनय किया) की कहानी है, जो हाल ही में कॉलेज से स्नातक डिग्री लेते हैं और फ़िल्म‍ प्यार और दोस्ती के इर्द-गिर्द घूमती है। इसे समीक्षकों ने तो सराहा ही, व्यावसायिक कामयाबी भी मिली, खासकर युवा पीढ़ी में यह काफी लोकप्रिय हुई। इस फ़िल्म को विभिन्न अवार्ड समारोहों में सर्वश्रेष्ठ पटकथा, निर्देशन और फ़िल्म सहित कई नामांकन मिले। फ़िल्म को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फ़िल्म का उस साल का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला। अख्तर फिर अपनी अगली परियोजना, ऋतिक रोशन और प्रीति जिंटा अभिनीत फ़िल्म लक्ष्य (2004), के निर्माण में जुटे, जो उन लक्ष्यहीन नौजवानों के बारे में थी, जो आखिर में अपने लिए एक लक्ष्य तय करने में कामयाब होते हैं। हालांकि फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी हासिल नहीं की, पर बहुत सारे समीक्षकों ने प्रशंसा की।] फ़िल्म की स्क्रिप्ट उनके पिता जावेद अख्तर ने लिखी थी। इस बीच, उन्होंने गुरिंदर चड्ढा की 2004 की हॉलीवुड फ़िल्म ब्राइड एंड प्रिज्युडिस के लिए भी गीत लिखे. उसके बाद उन्होंने 1978 की अमिताभ बच्चन की फ़िल्म डॉन का रीमेक [[डॉन- द चेज़ विगिंस अगेन|डॉन - द चेज़ विगिंस अगेन]] शुरू किया, जिसमें मुख्य भूमिका में शाहरुख खान थे। Personal Life- उन्होंने 3 साल उनके साथ रिश्ते में रहने के बाद, 2000 में Adhuna Bhabani से शादी की। इन की दो बेटियां Shakya और Akira हैं। 16 साल की शादी के बाद 21 जनवरी 2016 को इस couple ने आधिकारिक तौर पर जुदाई की घोषणा की। फरहान और फैशन फरहान अख्तर एक बी-शहर अभिनेता है जो फैशन के अपने सहज भावना के लिए जाना जाता है। एक लाल कालीन घटना या सिर्फ अपने नवीनतम रिलीज के एक बढ़ावा देने के लिए यह हो, वह गलत जाने के लिए विफल रहता है कभी नहीं! उनके लिए फैशन एक स्वाभाविक बात है, यह आसानी से उसे करने के लिए आता है। यह कुछ ऐसा है जो आप पर तनाव चाहिए नहीं है। उन्होंने कहा कि एक अच्छी तरह से groomed- suited- से सेकंड में पीला Keds में एक लड़के को आदमी तक जा सकता है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "फैशन तुम कौन हो के अपने व्यक्तिगत आत्म का एक विस्तार है। यदि आपका संस्कृति, विचारों और आपके दृष्टिकोण को दर्शाता है। "वास्तव में, हम अपने काम में यह सब देखते हैं। फरहान एक ब्रांड सनकी नहीं है, वह कुछ भी आरामदायक, यू की तरह क्या के लिए और अधिक है कि पहनने में विश्वास रखता है। क्योंकि सब के बाद जब आप अपने कर रहे हैं, तो आप एक फरहान अख्तर है एक एक फैशन चिंताजनक ग़लती कभी नहीं हो सकता है! रोचक तथ्य:- 1 -फरहान अख्तर फिल्म शोले को 50 बार देख चुके हैं, लेकिन उन्हें यह दीवार से बेहतर नहीं लगी। 2-अख्तर ने फिल्म फिल्म दिल चाहता है का निर्देशन तब किया था जब उनकी माँ ने उन्हें घर से निकलने की धमकी दी थी। फराह अपने माँ को अपना सबसे बड़ा आलोचक मानते हैं। 3-फिल्म जिंदगी मिलेगी ना दुबारा में फराहन ने काफी एडवेंचर किये। लेकिन उन्हें अपनी असल जिंदगी में कॉकरोच से बेहद डर लगता है। 4 - आमिर खान को रंग दे बसंती मिलने से पहले फराहन को ऑफर हुई थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था, जिसका अफ़सोस उन्हें आज भी है। 5-फराहन खान की जिंदगी का सबसे खराब वक्त 1992-93 में था, जब उन्हें दंगों के दौरान मुस्लिम होने का खामियाजा भुगतना पड़ा।   आगे पढ़ें

acharya-sushruta-father-of-surgery

आचार्य सुश्रुत शल्य चिकित्सा के पितामह

शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के पितामह और सुश्रुतसंहिता के प्रणेता आचार्य सुश्रुत का जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व काशी में हुआ था। सुश्रुत का जन्म विश्वामित्र के वंश में हुआ था। इन्होंने धन्वन्तरि से शिक्षा प्राप्त की थी। सुश्रुतसंहिता को भारतीय चिकित्सा पद्धति में विशेष स्थान प्राप्त है। इसमें शल्य चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाया गया है। शल्य क्रिया के लिए सुश्रुत 125 तरह के उपकरणों का प्रयोग करते थे। ये उपकरण शल्य क्रिया की जटिलता को देखते हुए खोजे गए थे। इन उपकरणों में विशेष प्रकार के चाकू, सुइयां, चिमटियां आदि हैं। सुश्रुत ने 300 प्रकार की ऑपरेशन प्रक्रियाओं की खोज की। आठवीं शताब्दी में सुश्रुतसंहिता का अरबी अनुवाद किताब-इ-सुश्रुत के रूप में हुआ। सुश्रुत ने कॉस्मेटिक सर्जरी में विशेष निपुणता हासिल कर ली थी। एक बार आधी रात के समय सुश्रुत को दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी। उन्होंने दीपक हाथ में लिया और दरवाजा खोला। दरवाजा खोलते ही उनकी नजर एक व्यक्ति पर पड़ी। उस व्यक्ति की आंखों से अश्रु-धारा बह रही थी और नाक कटी हुई थी। उसकी नाक से तीव्र रक्त-स्राव हो रहा था। व्यक्ति ने आचार्य सुश्रुत से सहायता के लिए विनती की। सुश्रुत ने उसे अन्दर आने के लिए कहा। उन्होंने उसे शांत रहने को कहा और दिलासा दिया कि सब ठीक हो जायेगा। वे अजनबी व्यक्ति को एक साफ और स्वच्छ कमरे में ले गए। कमरे की दीवार पर शल्य क्रिया के लिए आवश्यक उपकरण टंगे थे। उन्होंने अजनबी के चेहरे को औषधीय रस से धोया और उसे एक आसन पर बैठाया। उसको एक गिलास में मद्य भरकर सेवन करने को कहा और स्वयं शल्य क्रिया की तैयारी में लग गए। उन्होंने एक पत्ते द्वारा जख्मी व्यक्ति की नाक का नाप लिया और दीवार से एक चाकू व चिमटी उतारी। चाकू और चिमटी की मदद से व्यक्ति के गाल से एक मांस का टुकड़ा काटकर उसे उसकी नाक पर प्रत्यारोपित कर दिया। इस क्रिया में व्यक्ति को हुए दर्द का मद्यपान ने महसूस नहीं होने दिया। इसके बाद उन्होंने नाक पर टांके लगाकर औषधियों का लेप कर दिया। व्यक्ति को नियमित रूप से औषाधियां लेने का निर्देश देकर सुश्रुत ने उसे घर जाने के लिए कहा। सुश्रुत नेत्र शल्य चिकित्सा भी करते थे। सुश्रुतसंहिता में मोतियाबिंद के ऑपरेशन करने की विधि को विस्तार से बताया है। उन्हें शल्य क्रिया द्वारा प्रसव कराने का भी ज्ञान था। सुश्रुत को टूटी हुई हड्डी का पता लगाने और उनको जोड़ने में विशेषज्ञता प्राप्त थी। शल्य क्रिया के दौरान होने वाले दर्द को कम करने के लिए वे मद्यपान या विशेष औषधियां देते थे। सुश्रुत श्रेष्ठ शल्य चिकित्सक होने के साथ-साथ श्रेष्ठ शिक्षक भी थे। उन्होंने अपने शिष्यों को शल्य चिकित्सा के सिद्धांत बताये और शल्य क्रिया का अभ्यास कराया। प्रारंभिक अवस्था में शल्य क्रिया के अभ्यास के लिए फलों, सब्जियों और मोम के पुतलों का उपयोग करते थे। मानव शरीर की अंदरूनी रचना को समझाने के लिए सुश्रुत शव के ऊपर शल्य क्रिया करके अपने शिष्यों को समझाते थे। सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा में अद्भुत कौशल अर्जित किया तथा इसका ज्ञान अन्य लोगों को कराया। उन्होंने शल्य चिकित्सा के साथ-साथ आयुर्वेद के अन्य पक्षों जैसे शरीर संरचना, काया-चिकित्सा, बाल रोग, स्त्री रोग, मनोरोग आदि की जानकारी भी दी कई लोग प्लास्टिक सर्जरी को अपेक्षाकृत एक नई विधा के रूप में मानते हैं। प्लास्टिक सर्जरी की उत्पत्ति की जड़ें भारत की सिंधु नदी सभ्यता से 4000 से अधिक साल से जुड़ी हैं। इस सभ्यता से जुड़े श्लोकों को 3000 और 1000 ई.पू. के बीच संस्कृत भाषा में वेदों के रूप में संकलित किया गया है, जो हिन्दू धर्म की सबसे पुरानी पवित्र पुस्तकों में में से हैं। इस युग को भारतीय इतिहास में वैदिक काल के रूप में जाना जाता है, जिस अवधि के दौरान चारों वेदों अर्थात् ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद को संकलित किया गया। चारों वेद श्लोक, छंद, मंत्र के रूप में संस्कृत भाषा में संकलित किए गए हैं और सुश्रुत संहिता को अथर्ववेद का एक हिस्सा माना जाता है। सुश्रुत संहिता, जो भारतीय चिकित्सा में सर्जरी की प्राचीन परंपरा का वर्णन करता है, उसे भारतीय चिकित्सा साहित्य के सबसे शानदार रत्नों में से एक के रूप में माना जाता है। इस ग्रंथ में महान प्राचीन सर्जन सुश्रुत की शिक्षाओं और अभ्यास का विस्तृत विवरण है, जो आज भी महत्वपूर्ण व प्रासंगिक शल्य चिकित्सा ज्ञान है। प्लास्टिक सर्जरी का मतलब है- शरीर के किसी हिस्से की रचना ठीक करना। प्लास्टिक सर्जरी में प्लास्टिक का उपयोग नहीं होता है। सर्जरी के पहले जुड़ा प्लास्टिक ग्रीक शब्द प्लास्टिको से आया है। ग्रीक में प्लास्टिको का अर्थ होता है बनाना, रोपना या तैयार करना। प्लास्टिक सर्जरी में सर्जन शरीर के किसी हिस्से के उत्तकों को लेकर दूसरे हिस्से में जोड़ता है। भारत में सुश्रुत को पहला सर्जन माना जाता है। आज से करीब 2500 साल पहले युद्ध या प्राकृतिक विपदाओं में जिनकी नाक खराब हो जाती थी, आचार्य सुश्रुत उन्हें ठीक करने का काम करते थे।  आगे पढ़ें

dhirubhai-ambani

धीरुभाई अंबानी

धीरजलाल हीरालाल अंबानी जो ज्यादातर धीरुभाई अंबानी के नाम से जाने जाते है, एक सफल भारतीय व्यवसाय के शक्तिशाली कारोबारी थे. जिन्होंने 1966 में रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना की, उन्होंने जिस मेहनत और लगन से तरक्की की है उसी वजह से भारत का हर युवा उनसें प्रेरणा लेता है, धीरुभाई अंबानी ने हमें ये सोचने के लिये प्रेरित किया की जिसमें काबिलियत होती है, फिर चाहे वो किसी भी परिस्तिथि में क्यों ना हो सफलता पा सकता है. धीरुभाई अंबानी जीवनी पूरा नाम – धीरजलाल हीरालाल अंबानी जन्म – 28 डिसंबर 1932. जन्मस्थान – जूनागढ़ गुजरात. पिता – हीरालाल अंबानी माता – जमनाबेन अंबानी विवाह – कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी ने जो कंपनी कुछ थोडेसे पैसे के लगत पर खड़ी की थी उस रिलायंस इंडस्ट्रीज में 2012 तक 85000 कर्मचारी हो गये थे और सेंट्रल गवर्नमेंट के पुरे टैक्स में से 5% रिलायंस देती थी. और 2012 में संपत्ति के हिसाब से विश्व की 500 सबसे अमीर और विशाल कंपनियों में रिलायंस को भी शामिल किया गया था. धीरुभाई अंबानी को सन्डे टाइम्स में एशिया के टॉप 50 व्यापारियों की सूचि में भी शामिल किया गया था. अंबानी ने 1977 में रिलायंस कंपनी को लाया और 2007 तक उनकी संपत्ति 60 बिलियन $ थी, जिसने अंबानी को विश्व का तीसरा सबसे अमीर परिवार बनाया. एक नजर में जानकरी – 17 साल की उम्र में धीरुभाई अंबानी येमेन देश में एक पेट्रोल पंप कम करने के लिये गये. उसके पहले ‘बर्माशेल’ इस कंपनी में के नौकरी करते थे. ‘बर्माशेल’ जैसे ही कंपनी में खुद स्थापित करुगा. ये उनका सपना था. उसके बाद उन्होंने वो सपना सच में साकार किया. 1958 को भारत वापीस आने के बाद धीरुभाई ने बम्बई में ‘रिलायन्स’ की स्थापना करके, मसाले और अन्य वस्तु की निर्यात करना शुरु किया. कपडे के धंदे में टर्नओवर करते समय उनको ये ध्यान में आया की, सिन्थेटिक कपडे की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है. इस वजह से 1966 धीरुभाई ने अहमदाबाद के पास नरोडा यहा पहीली कपडे के मील की स्थापना की. ‘रिलायन्स’ के इस मील ने पहले साल में ही 9 करोड़ का कारोबार करके 13 लाख का मुनाफा कमाया. 1977 को ‘रिलायन्स’ ने खुद के लिये पहली बार बाजार में शेअर बेच कर पैसा खड़ा किया किया. 1982 के बाद धीरुभाई अंबानी जैसे सामान्य भारतीय निवेशको के हीरो बन गये. उसके बाद भारत में ‘रिलायन्स’ ये सबसे जादा निवेशक वाली कंपनी बनी. 1975 को जब ‘रिलायन्स’ एक छोटी कंपनी थी. उस समय में भी भारत में के 24 कपडा मील की जाच करने के लिये आये हुये विश्व बॅक के एक टिम ने ऐसा कहा था की विकसीत देशो में की मीलों से तुलना करने लायक भारत में एकमेव मील ये रिलायन्स ही है. रिलायन्स का दुसरा महत्त्वपूर्ण प्रकल्प हाजिरा यहा की रिफायनरी, ये दुनिया की सबसे बड़ी रिफायनरी मानी जाती है. धीरुभाई की कैरियर 1970 व 80 के नियंत्रित अर्थव्यवस्था में बड़ी, उनके दोनों पुत्र 1991 के बाद मुक्त अर्थव्यवस्था के कारण निर्माण हुये नये मौको का पूरा उपयोग करके ‘रिलायन्स’ की पीढ़ी सफल तरिके से आगे चला रहे है. रिलायन्स कंपनी ने आगे पेट्रोकेमिकल्स, ऑईल रिफायनरी वैसेही दूरसंचार, विद्युत् उत्पादन, रास्ते बनाना, बंदर, गॅस पाइप लाइन आदी क्षेत्र में निवेश की है. दुनिया के मुकाबले में हम बहुराष्ट्रीय कंपनी को मात गिरा सकते है ऐसा विश्वास भारतीय व्यवसायी में निर्माण करने में धीरुभाई का बहोत बड़ा हाथ है. इस महान व्यवसायी का बम्बई यहा 6 जुलै 2002 को देहांत हुवा. मृत्यु : धीरुभाई अंबानी को 24 जून 2002 को ह्रदय विकार की वजह से ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल, मुंबई में एडमिट किया गया. जहा उन्हें दूसरा विकार भी आया, उन्हें पहला झटका फरवरी 1986 में आया था और इसी वजह से उनका दाया हात काम नहीं करता था. उस समय एक हफ्ते से भी ज्यादा समय तक वे कोमा में रहे थे और कई सारे डोक्टरो ने उनका इलाज उस समय किया था. और अंत में 6 जुलाई 2002 को उनकी मृत्यु हो गयी. ऐसा नहीं है की बचपन से ही धीरुभाई अंबानी एक अमीर परिवार से थे. वे हमारे और आपकी ही तरह एक माध्यम वर्गीय परिवार से थे लेकिन उनमे आगे बढ़ने की और कुछ नया करने की चाह थी उनकी इसी सोच को काम में परिवर्तित कर के वे एक सफल उद्योजक बने. और आज की दुनिया के आदर्श बन चुके है.  आगे पढ़ें

Previous 1 2 3 Next 

प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति