शीला दीक्षित हो सकती है दिल्ली ईस्ट से कांग्रेस उम्मीदवार, मनाने में जुटे राहुल गांधी



नई दिल्ली। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ईस्ट दिल्ली से कांग्रेस की लोकसभा उम्मीदवार हो सकती हैं। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ईस्ट दिल्ली से शीला दीक्षित को उम्मदीवार बनाने के पक्ष में हैं। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार गुरुवार को हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के दौरान जब दिल्ली की सातों लोकसभा सीट पर चर्चा हो रही थी तब राहुल गांधी ने शीला दीक्षित को ईस्ट दिल्ली से चुनाव लड़ने का अनुरोध किया। सूत्रों के अनुसार राहुल ने कहा कि आप सबसे मजबूत कैंडिडेट हैं, आप तैयार हो जाएं, मैं आपके लिए दो बार प्रचार करने आऊंगा। हालांकि, शीला ने चुनाव लड़ने से मना तो नहीं किया लेकिन इतना जरूर कहा कि फैमिली से बात करूंगी। इसलिए इस सीट पर उम्मीदवारी के फैसले को राहुल गांधी ने पेडिंग में डाल दिया।


  कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी अब गठबंधन के बिना चुनाव की लड़ाई के मूड में दिख रही है। इसलिए पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरने का फैसला किया है और विपक्ष को कड़ी टक्कर देने के लिए पार्टी अपने सबसे सीनियर और अनुभवी नेता को मैदान में उतारने का फैसला किया है। सूत्रों की मानें तो नई दिल्ली, चांदनी चौक, नॉर्थ-ईस्ट और नॉर्थ-वेस्ट की उम्मीदवारी तय होने के बाद जब साउथ दिल्ली का मसला आया तो इस सीट को टाल दिया गया। क्योंकि यहां से पूर्व सांसद रमेश कुमार का नाम आ रहा था और पार्टी अभी किसी भी प्रकार का रिस्क लेने के मूड में नहीं है। बैठक के दौरान कुछ नेताओं ने कहा कि इसका असर पंजाब तक पड़ सकता है, इसलिए इस सीट पर उम्मीदवारी को पेंडिंग में डाला दिया गया।&


  लेकिन, जब वेस्ट दिल्ली सीट की चर्चा हुई तो राहुल गांधी ने पहलवान सुशील कुमार का नाम सुझाया। हालांकि सबको यह नाम पसंद आया लेकिन कुछ नेताओं ने महाबल मिश्रा की उम्मीदवारी को लेकर सुझाव दिए कि हमारे पास पूर्वांचल के सिर्फ एक ही नेता हैं तो इस सीट को भी उन्होंने पेंडिंग में डाल दिया। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि सुशील कुमार को वेस्ट दिल्ली या साउथ दिल्ली में से कहां का उम्मीदवार बनाया जाए। अगले एक या दो दिन में इससे पर्दा उठ जाएगा। लेकिन सूत्रों की मानें तो वेस्ट दिल्ली के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा अपने सीट बदलने को तैयार नहीं हैं, बताया जा रहा है कि वो साउथ दिल्ली जाने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में पार्टी के पास एक पेंच और फंस सकता है।  

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