विद्रोही रुख अख्तियार किया शकील अहमद ने, की निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा



मधुबनी। बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शकील अहमद ने विद्रोही रुख अख्तियार करते हुए पार्टी के प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने मधुबनी लोकसभा क्षेत्र से नामांकन भरते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। हालांकी उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस उनको समर्थन दे देगी। मधुबनी शहर स्थित अपने आवास पर सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि महागठबंधन के तहत सुपौल कांग्रेस के खाते में गया है। लेकिन, वहां कांग्रेस प्रत्याशी रंजीत रंजन के विरुद्ध राजद के एक नेता ने निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। राजद ने उसका समर्थन भी किया है।


इसी तरह वे भी मधुबनी से नामांकन करेंगे। मधुबनी से चुनाव लड़ने के मुद्दे पर उनकी कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से लगातार बात चल रही है। और अब तक उनको सकारात्मक संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता, कांग्रेसजनों और समाज के विभिन्न तबकों के दबाव पर उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया है। शकील के यह तेवर कांग्रेस के लिए बड़े झटके से कम नहीं है। वह अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी के कांग्रेसी हैं। विधायक, राज्य और केंद्र सरकार में मंत्री के अलावा उनकी पहचान कांग्रेस के मुखर प्रवक्ता के रूप में रही है। 2014 में भी कांग्रेस ने उनकी मधुबनी सीट तालमेल के तहत राजद को दे दी थी। शकील ने उस समय भी नाराजगी का इजहार किया था।


लेकिन, इसबार फिर बेटिकट होने पर उनके सब्र का बांध टूट गया। पार्टी के कार्यकर्ता भी चुनाव लड़ने के लिए उनपर दबाव बना रहे थे। शकील की नाराजगी इस बात को लेकर अधिक है कि कांग्रेस की परंपरागत सीट वीआईपी जैसी नई पार्टी को दे दी गई। इसके अलावा बाहर से लाकर उम्मीदवार थोप दिया गया। मधुबनी के महागठबंधन के उम्मीदवार बद्री पूर्वे की पहचान जमीन कारोबारी की है। डॉ. अहमद ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि अगर किसी गैर-राजनीतिक व्यक्ति को महागठबंधन का उम्मीदवार बनाया गया तो वे निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। वैसे, वीआईपी उम्मीदवार को लेकर राजद की स्थानीय इकाई में भी बेचैनी है। खबर है कि राजद कार्यकतार्ओं का एक हिस्सा निर्दलीय चुनाव लड़ने के निर्णय में शकील के साथ है। 

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