सरताज कांग्रेस को देंगे मौका या फिर धोखा.....



भोपाल। क्या तेंदूखेडा से विधानसभा का चुनाव जीतने के लिए राव उदयप्रताप सिंह को मैदान में उतारने जा रही भाजपा ने अगले साल होने वाले आम चुनाव के लिए होशंगाबाद संसदीय सीट का उम्मीदवार तलाश कर लिया है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि 2008 में विधायक चुने जाने के बाद भाजपा ने रामपाल सिंह को संसदीय चुनाव में मैदान में उतारा था लेकिन उन्हें राव उदय प्रताप सिंह ने लोकसभा का चुनाव हरा दिया था। 20114 में भाजपा ने राव उदय प्रताप सिंह को कांग्रेस से भाजपा में लाकर होशंगाबाद को अपना गढ़ कांगे्रस से वापस छिना था। इस बार भाजपा फिर संकट में है। राव उदयप्रताप तेंदूखेडा से कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं। इस बार वे भाजपा से मैदान में होंगे तो भाजपा के पास लोकसभा के लिए रास्ता क्या  होगा? क्या भाजपा एक बार फिर अपराजेय सरताज को किसी नई रणनीति के तहत उपयोग में लाने जा रही है।   होशंगाबाद में भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री सरताज सिंह को भाजपा यह साफ कर चुकी है कि उनका सिवनी मालवा से टिकट काटा जा रहा है। सरताज सिंह की इस पर पहली प्रतिक्रिया यह थी कि भाजपा जीती हुई सीट हार रही है।


पर अब खबर आ रही है कि सरताज सिंह, विधानसभा अध्यक्ष सीतासरण शर्मा के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर होशंगाबाद से चुनाव लड़ सकते हैं।  इस मामले में खबरों पर भरोसा करें तो उनकी प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिंया से बात हुई है। कांग्रेस क्योंकि सिवनी मालवा से पूर्व मंत्री और बुजुर्ग नेता हजारीलाल रघुवंशी के बेटे ओमप्रकाश रघुवंशी को टिकट देने का एलान कर चुकी है लिहाजा, सरताज के समक्ष होशंगाबाद सीट का विकल्प रखा गया है। सरताज सिंह वो शख्स हैं जिन्होंंने होशंगाबाद सीट से कांग्रेस के बड़े नेता अर्जुन सिंह को संसदीय चुनाव में हराया था तो 2008 में हजारीलाल रघुवंशी के परम्परागत गढ़ सिवनी मालवा विधानसभा में उन्हें चारों खाने चित्त किया था।   इससे जुड़ी एक दूसरी खबर और है। भाजपा ने सरताज सिंह की चुनाव जीतने की इस ताकत को देखते हुए उन्हें फिर से लोकसभा में भेजने का प्रस्ताव रखा है। उल्लेखनीय है कि भाजपा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के लिए 2019 में होने वाले आम चुनाव ज्यादा महत्व रखते हैं। उसमें एक-एक सीट का महत्व होगा।


तो क्या सरताज सिंह कांग्रेस का सहारा बनेंगे या फिर इस विधानसभा चुनाव में उसका सिरदर्द। कारण भाजपा की रणनीति से जुड़ी यह खबर भी कम दिलचस्प नहीं है कि भाजपा यहां सरताज सिंह के बहाने 2009 का विदिशा संसदीय सीट प्रकरण और 2014 का भिंड प्रकरण दौहरा कर कांग्रेस को एक बड़ा झटका देने की फिराक  में है।  सूत्रों का कहना है कि सरताज सिंह भाजपा छोड़ कर होशंगाबाद से कांग्रेस उम्मीदवार हो सकते हंै। सरताज ने अभी भाजपा से इस्तीफा नहीं दिया है। लेकिन एक दो दिन में यह संभव है। और जब कांग्रेस,सरताज को टिकट देकर सीतासरण शर्मा की मुश्किल बढ़ाने की तैयारी कर रही होगी, सरताज नामांकन वापस लेकर कांग्रेस का पूरा खेल बिगाड़ सकते हैं। वैसे ही जैसे 2009 में राजकुमार पटेल का सुषमा स्वराज के खिलाफ भरा गया नामांकन निरस्त केवल इस कारण हो गया था कि राजकुमार पटेल निर्धारित समय पर बी फार्म जमा नहीं कर पाए थे या फिर भिंड में कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी घोषित हुए भागीरथ प्रसाद ने एन समय पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा से नामांकन भर दिया था। राजनीति में कुछ भी संभव है। जाहिर सी बात है कि कांग्रेस तो इस बार ऐसे बहुत से खेल कर चुकी है लेकिन भाजपा की बारी अभी बाकी है। क्या सरताज भाजपा के इस मास्टर स्ट्रोक में अहम रोल अदा करने वाले  हैं?

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