भाजपा और कांग्रेस के लिए वर्चस्व की लड़ाई का नया गढ़ बना रायबरेली



लखनऊ। अमेठी के बाद अब रायबरेली भी बीजेपी और कांग्रेस की वर्चस्व की लड़ाई का नया गढ़ बनता नजर आ रहा है। कांग्रेस के टिकट पर एमएलसी रहे दिनेश प्रताप सिंह अब भाजपाई हैं। कांग्रेस की ताकत से जो जिला पंचायत का अध्यक्ष पद जो दिनेश के भाई अवधेश को मिला अब वह कांग्रेस वापस चाहती है, लेकिन दूसरी तरफ बीजेपी की ताकत के सहारे दिनेश अपना क्षेत्रीय वर्चस्व बनाए रखना चाहते हैं


मंगलवार को जो घटना हुई, वह रायबरेली को राजनीतिक वर्चस्व की नई लड़ाई की तरफ ले जाती दिख रही है।  दरअसल, इस घटना के पीछे जाएं तो यह वहां से शुरू होती है, जबसे कांग्रेस एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने बीजेपी का दामन थामा था। यह दिनेश प्रताप सिंह वही हैं, जिन्हें एक समय कांग्रेस ने बहुत ताकत दी।


जिस समय अखिलेश सिंह (कांग्रेस विधायक अदिति सिंह के पिता) कांग्रेस से अलग होकर अलग सियासी राह पर चल रहे थे तो कांग्रेस ने दिनेश प्रताप सिंह को ताकत दी। उन्हें एमएलसी बनाया। दिनेश के भाई को हरचंदपुर सीट से टिकट दिया। वह मौजूदा विधायक हैं।


  इसके अलावा दिनेश के एक और भाई अवधेश सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया था, लेकिन अब जब दिनेश बीजेपी में हैं और सोनिया के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं तो कांग्रेस उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष पद से हटवाना चाहती है। रायबरेली में चुनाव प्रचार के समय भी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पूरे समय दिनेश प्रताप सिंह पर हमलावर रहीं।


अपनी नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा था, 'पहले यही मुझे दीदी-दीदी कहकर पैर पकड़ते थे और अब मेरी मां के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन मैं साफ कर देना चाहती हूं कि अब यह न तो एमएलसी रहेंगे, न इनके भाई जिला पंचायत अध्यक्ष।'  अदिति नए रोल में आ रहीं आगे  किसी दौर में कांग्रेस का साथ छोड़ चुके अखिलेश सिंह की बेटी अदिति अब कांग्रेस में हैं। कांग्रेस में उनका कद भी बढ़ा है। अदिति सिंह को कांग्रेस ने महिला इकाई का महासचिव भी बनाया है। लिहाजा यहां के राजनीतिक वर्चस्व की अगुआई वही कर रही हैं। वह कांग्रेस के गढ़ की किलेबंदी को लगातार मजबूत करना चाहती हैं और यही वजह है कि उनकी राजनीतिक अदावत दिनेश सिंह के साथ स्वाभाविक हो गई है।  

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