मायावती और मुलायम पर योगी ने बोला हमला, कहा- जो लोग बाबा साहब को गाली देते थे उन्हीं के साथ हैं बीएसपी प्रमुख



मुरादाबाद। लोकसभा चुनाव हैं तो बयानबाजियों का दौर भी तेज हो चला है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुरादाबाद में जनसभा की। इस दौरान उन्होंने मैनपुरी में मायावती और मुलायम के 24 साल बाद एक मंच पर दिखने को लेकर भी हमला किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुझे अफसोस होता है कि जो लोग बाबा साहब भीमराव आंबेडकर को गाली देते थे, आज बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती उन्हीं के समर्थन में वोट मांगने के लिए जा रही हैं


इतना ही नहीं, योगी ने कांग्रेस पर धर्म विशेष के लिए काम करने का आरोप लगाया।  सीएम योगी ने जनसभा में कहा, 'मुझे यह कहते हुए अफसोस होता है कि जो लोग बाबा साहब भीमराव आंबेडकर को गाली देते थे, आज मायावतीजी उन्हीं के लिए समर्थन मांगने जा रही हैं। कल मैं संभल में केला देवी मंदिर में गया। वहां के स्वामीजी ने बताया कि समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी आया था लेकिन मंदिर के अंदर नहीं गया।


उसने कहा कि यह हमारे मजहब के विरुद्ध है, हम मंदिर में नहीं जा सकते हैं। जो आपके देवी-देवताओं को सम्मान नहीं दे सकता हो, क्या वह आपका वोट पाने का अधिकारी है क्या?'  'बीजेपी के पक्ष में दिखाई दे रहा है प्रचंड समर्पण' मुरादाबाद में योगी ने कहा, 'तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश की दस लोकसभा सीटों पर मतदान होने जा रहे हैं।


तीसरे चरण की इन दस लोकसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पक्ष में जनता को जो प्रचंड समर्पण दिखाई दे रहा है। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि 23 मई को जो नतीजे आएंगे, उनमें तीसरे चरण की ये दस की दस सीटें बीजेपी के खाते में आती हुई दिखाई देंगी।


'  '...तब संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का' योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'जो काम एसपी-बीएसपी, कांग्रेस की सरकार में नामुमकिन था, मोदीजी ने उसे मुमकिन बनाया है। कांग्रेस, एसपी-बीएसपी की सरकार में गरीब को मकान देने की बात होती थी तो कांग्रेस के लोग कहते थे, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंहजी उस समय कहते थे कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। गरीबों की बात नहीं करते थे, किसानों की बात नहीं करते थे, वंचितों की बात नहीं करते थे, पिछड़ों की बात, नौजवानों की बात, महिलाओं की बात नहीं करते थे। एसपी-बीएसपी की सरकार के समय भी ऐसा होता था। गरीबों को मकान देने की बात पर कहते थे पैसा नहीं, शौचालय देने की बात पर कहते थे पैसा नहीं, रसोई और बिजली कनेक्शन पर भी कहते थे पैसा नहीं। दरअसल, पैसा इनकी लूट-खसोट की भेंट चढ़ गया होता था।' 

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