जोखिम उठा कर शिवना पार करने को मजबुर क्षेत्रवासी



मंदसौर। प्रदूषित हो चुकी शिवना पिछले दो दशक से शहर का बड़ा मुद्दा भले ही बनी हुई हो, लेकिन इस नदी को प्रदूषण से मुक्ति नहीं मिली। लेकिन प्रदूषित हो रही नदी के अलावा भी इस नदी को लेकर कई लोग परेशान है


शहरीय क्षेत्र से गुजर रही नदी पर कई जगह तो पुल-पुलियाओं से लेकर ब्रिज बने हुए है, लेकिन फिर भी कुछ क्षेत्रों में इसके अभाव में लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे है। सिर पर सामान रखे नदी में कम पानी और अधिक जलकुंभी के बीच हर दिन नदी को कोर्ट परिसर के समीप क्षेत्र से कईलोग पार कर रहे है।


इससे बढ़ते प्रदूषण के चलते बीमारियों के साथ अंदर जानवरों का खतरा भी इन लोगों पर नदी पार करते समय बना रहता है। बावजूद इन्हेंं यह नदी पार करने से कोईरोक नहीं रहा हैऔर न हीं कोई टोक रहा है। भले ही यहां फुटब्रिज लोगों की इसी आवश्यकता को देखते हुए बनाने की बात चल रही हो, लेकिन सालों से वह नपा की फाईलों में ही कैद है। शिवना नदी में जानवरों का खतरा भी बढ़ गया है।


पिछले दिनों ही शिवना नदी में मगरमच्छ दिखाईदेने पर वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू यहां से किया था। शिवना में मगरमच्छ का मुवमेंट दिखा। इसके अलावा भी अन्य जीवों का पानी में मुवमेंट है।इन सबके अलावा शिवना का पानी प्रदूषित होकर जहरीला हो चुका है। ऐसे में जानवरों से भी खतरा है तो शिवना में जो पानी है। उससे भी बीमारियों का अंदेशा लोगों में बना है।


फिर भी इन सब चीजों को दरकिनार कर कईलोग नदी को पार कर रहे है। फुटब्रिज की योजना पर कागजों तक सीमित कोर्ट के समीप जिस क्षेत्रमें शिवना को पानी व जलकुंभी के जोखिमों के बीच लोग पार कर रहे है।उस क्षेत्रमें नदी पर छोटा फुटब्रिज बनाने की योजना लंबे समय से बन रही है, लेकिन यह कागजों तक नहीं सीमित है। शिवना सौंदर्यीकरण में ही भी इस स्थान पर फुटब्रिज निर्माण शामिल किया गया था। सीएम ने चुनाव के पहले इसकी स्वीकृति दी तो लगा था अब यह कागजों से बाहर संभव हो सकेगा, लेकिन अब जब शिवना प्रोजेक्ट पर ही काले बादल छाने लगे तो इसकी उम्मीद फिर से धुमिल हो गई है। इस क्षेत्र से शिवना को कई लोग इस प्रकार पार करते है। उनके लिए यह फुटब्रिज जरुरी है।

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