ये पाकिस्तान पर चढ़ाई का सही समय है सरकार...आगे बढिये न...!



 लगभग चार वर्ष पूर्व कश्मीर के उरी इलाकें में स्थित आर्मी हेडक्वाटर्स में आतंकी हमले में हमारी सेना के 18 जवानों की शहादत हुई थी। इस हमले के बाद पड़ौसी देश पाकिस्तान को सबक सिखाने की मंशा से भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुश्कर जो सर्जिकल स्ट्राइक की थी ,उसमे हमारे जवानों ने लगभग 100 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था और उस क्षेत्र में स्थित आतंकी ठिकानों को भी ध्वस्त किया था। इस कार्यवाही के बाद हमें यह भरोसा हो गया था कि पाकिस्तान में फलफूल रहे आतंकी संगठन अब कश्मीर तो क्या समूचे भारत में हमला करने का दुस्साहस नहीं करेंगे, परन्तु पाकिस्तान की सरकार ने न तो आतंकी संगठनों को पालने की कुनीति पर चलना बंद किया है और न ही आतंकी संगठनों ने कोई सबक सीखा है। कार्यवाही के बाद इधर हम जरूर निश्चिंत होकर बैठ गए थे कि, अब किसी भी तरह के हमले पर अंकुश लग गया है ,लेकिन आतंकी शांत नहीं बैठे थे ,जिसका नतीजा सामने है।  पुलवामा हमला देश के ऊपर एक बड़ा हमला है। इसकी जिम्मेदारी भी पाक संरक्षण में फलफूल रहे आतंकी संगठन जैश- ए -मोहम्मद ले ली है। हमले को जिस तरह से अंजाम दिया गया है ,उससे इस नतीजे पर पहुंचना आसान है कि इसकी योजना बहुत पहले ही बन गई थी। हमले को आजम देने के लिए जैश -ए -मोहम्मद ने सही मौका शायद पहले से ही तय कर रखा था। आतंकी यह अनुमान लगा चुके थे कि कश्मीर में बर्फ़बारी बंद होते ही जब हाइवे खुलेंगे तब हजारों जवान अपने काम पर लूटना शुरू करेंगे। काफिले में शामिल अधिकांश जवान छुट्टियां बिताकर वापस लौट रहे थे। इसलिए  आतंकियों ने इस उपयुक्त समय का ही चयन किया।  यद्पि यह समय सवाल जवाब का नहीं है ,लेकिन इतना तो तय हो ही गया इसमें हमारी ही किसी चूक से आतंकी हमला करने में सफल हुए है।


बताया गया है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने 8 फरवरी को अलर्ट जारी कर दिया था कि घाटी में सुरक्षा बलों की तैनाती अथवा आवाजाही के दौरान आतंकी हमला करने की योजना बना रहे है। जिस राजमार्ग पर यह हमला किया गया है, वह अत्यंत सुरक्षित व संवेदनशील माना जाता है ,फिर उस एसयूवी की जांच क्यों नहीं की गई जिसमे विस्फोटक रखा हुआ था। अगर इस वाहन की जांच की गई होती तो इस हमले को टाला जा सकता था। इसके आलावा एक सवाल और भी है कि सीआरपीएफ के उस काफिले में 2500 से अधिक जवान क्यों थे, जबकि सामान्यतः एक काफिला 1000 जवानों का होता है। इतनी बड़ी संख्या में जवानों के होने के बाद की गई अनदेखी से ही आतंकियों को सुनहरा मौका मिला है।खैर सरकार को अब यह सुनिश्चित जरूर करना चाहिए कि भविष्य में  आतंकी संगठन फिर देश के किसी हिस्से को निशाना न बना सके।  इस हमले की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , ,गृह मंत्री राजनाथ सिंह सहित अनेक केंद्रीय मंत्रियों ने आतंकी संगठनों पर कठोर कार्यवाही का भरोसा देशवासियों को दिलाया है। पीएम मोदी ने तो उन्हें ललकारते हुए कहा कि वे बहुत बड़ी गलती कर बैठे है इसकी कीमत उन्हें चुकानी ही होगी। इस तरह के ही बयान गृह मंत्री राजनाथ सिंह एवं वित्त मंत्री अरुण जेटली की और से भी आए है।  अब देखना है कि आतंकी संगठनों पर किस तरह की कार्यवाही होगी। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि उरी हमले के बाद सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर अभी तक राजनीति होती रही है। विपक्षी दलों ने सरकार पर इसके राजनीतिक लाभ लेने तक के आरोप लगाए थे। आश्चर्य तो तब हुआ था, जब कुछ नेताओं ने सर्जिकल स्ट्राइक पर ही सवाल उठाते हुए कहा था कि शायद यह हुई ही नहीं थी। अबइस हमले के बाद तो देशवासियों का गुस्सा बढ़ रहा है और जनता की और से पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए कहा भी जा रहा है।


अतः अब बेहतर होगा कि सरकार की और से सेना को जो भी जवाबी कार्यवाही करने के लिए कहा जाएगा।अब उस पर न तो किसी भी तरह का सवाल उठाया जाए और न ही इस पर किसी तरह की भी राजनीति की जाए।    पुलवामा में हुए इस हमले की विश्वभर में निंदा की जा रही है। इससे पूर्व भी हुए हमलों में भारत  का हमेशा ही यह प्रयास रहा है कि आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान को पूरी दुनिया में अलग थलग किया जाए। अनेक देश भारत की इस भावना से सहमत भी है, लेकिन हमारा ही एक पड़ौसी देश चीन के मन में पाकिस्तान के लिए सहानुभूति में कमी नहीं आ रही है। पुलवामा हमले के मास्टर माइंड जैश -ए -मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के प्रत्यर्पण की मांग भारत कई बार पाकिस्तान से कर चूका है, लेकिन पाकिस्तान उसे अपने देश में ही सारी सुख सुविधाएं मुहैया करा रहा है, जिसे चीन का पूरा समर्थन मिल रहा है। यूएनओ में जब भी भारत ने उसे प्रतिबंधित आतंकियों की सूची  में शामिल करने की मांग उठाई तब- तब चीन ने उसमे व्यवधान ही डाला है।  पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी सत्ता संभालते ही बड़ी बड़ी बातें कही थी। इमरान ने कहा था कि भारत यदि शांति की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाएगा तो पाकिस्तान दो कदम आगे बढ़ाएगा, लेकिन उनके अब तक के सारे बयान यही साबित करते रहे है कि पाकिस्तान की हरकतों में कोई बदलाव नही हुआ है। यह सर्व विदित है कि इमरान खान पूरी तरह सेना की कठपुतली है। इसलिए पाकिस्तान की सेना में संरक्षित आतंकियों को खत्म करने की पाकिस्तान सरकार की मंशा पूरी तरह बेमानी है। भारत में हुए विभिन्न आतंकी हमलों के तार पाकिस्तान से जुड़े होने के सबूतों के बाद भी पाकिस्तान ने कभी यह स्वीकार नही किया कि इन हमलों में उसका हाथ है। इसलिए पाकिस्तान से कोई उम्मीद करना व्यर्थ है। अतः अब  हमारे सामने एक ही विकल्प शेष रह जाता है कि हम पाकिस्तान एवं उसके संरक्षित आतंकियों को ऐसा सबक सिखाए की वे त्राहिमाम कर उठे। इसके लिए जनता एवं सेना तो पूरी तरह तैयार है।अतः अब सरकार को कार्यवाही की इच्छाशक्ति तो दिखाना ही होगी।

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कृष्णमोहन झा

लेखक IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डिज़ियाना मीडिया समूह के राजनैतिक संपादक है.



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