जीने की ख्वाहिश है तो मरने की तैयारी रख..!



              अमेरिका इसलिए महान है क्योंकि अस्तित्व में आने के बाद से  लागातार युद्ध लड़ रहा है, पहले अपने लिए लड़ा, अब दूसरों पर अपना प्रभुत्व जमाने के लिए! दुनिया में सबसे ज्यादा शहीद अमेरिका के लिए या अमेरिका की ओर से लड़ने वाले जवान होते हैं, पता करिए आज भी अमेरिकी सैनिक कहीं न कहीं लड़ ही रहे हैं


 इंग्लैंड इसलिए ग्रेट ब्रिटेन बना क्योंकि उसने युद्ध करके समूची दुनिया को अपनी जूती की नोक पर रखा, उसके क्राउन को भारतीय राजाओं ने भगवान से ज्यादा पूजा!  डच और पुर्तगाली लड़ते और जीतते हुए इंडिया पहुँचे और अँग्रेजों से पहले इस देश के कई हिस्सों में प्रभुत्व जमाया। उससे पहले, यवनों,तुर्कों,मंगोलों ने युद्ध किए और भारतवर्ष को भोगा।  सिंकदर इसलिए महान है क्योंकि उसने होश सँभालते ही युद्ध करना शुरू किया मरते दमतक युद्धरत रहा।


खानाबदोश मुगलों ने युद्ध को अपना धर्म बनाया ..और बाबर ने मुट्ठीभर सैनिकों के दमपर हिंदुस्तान पर फतह की और उसकी औलादों ने छह सौ वर्षों तक राज किया। आज दुनिया इजरायल को इसलिए सलाम करती है क्योंकि उसके जन बच्चों का एक ही धर्म है..युद्ध।  रावण और उसकी सेना को युद्ध में नाशकर राम ने लंका न जीती होते तो वे भगवान न होते.. पराक्रम ही ईश्वर है।


राम इसलिए भगवान राम हैं कि उन्होंने जीवनभर युद्ध किया..विश्वामित्र के आश्रम से दंडकारण्य और श्रीलंका तक और उसके बाद भी..धनुष उनका पर्याय है..आज भी..क्यों..! -कर्मकांडियों..सुविधाभोगियों ने कभी नहीं चाहा कि युद्ध हो..देश का कार्पोरेट जगत, सुविधाभोगी वर्ग और फोकटिए बौद्धिक किसी का भी तलुआ चाट सकते हैं, इसलिए वे सदा से युद्ध के विरुद्ध हैं।  खेत में किसान और सरहद में जवान चौबीस घंटे युद्ध लड़ता है..उसकी संतानों को कभी कोई डर नहीं सताता आज भी नहीं..।


  कुछ डरपोक अपनी खोल में बैठे विमर्श करते हैं कि पड़ोसी के पास एटमबम है हम बर्बाद हो जाएंगे.. पर जब स्वाभिमान ही नहीं बचेगा तो जिओगे भी तो मुर्दा बनकर..। ऐसे ही मुर्दा लोग युद्ध की विभीषिका से डरते और डराते हैं..पर देश का हर किसान और हर जवान चाहता है कि आरपार हो..जिएं या मरें..पर उससे पहले कुछ करें।  राष्ट्र युद्ध का अभिषेक माँगता है..हमारी पीढ़ी शून्य से फिर उठेगी और डरपोक बनकर खोल में घुसे रहने की बजाय लड़कर मर जाना चाहेगी।  और कृष्ण का भी एक ही सूत्र वाक्य था..पार्थ हिजड़ापन न दिखा..'युद्ध कर'। उन्हीं कर्मयोगी महापराक्रमी कृष्ण का गीता में उपदेश है.. खड्गेन आक्रम्य भुंजीतः,वीर भोग्या वसुंधरा ।। अर्थात् तलवार के दम पर पुरुषार्थ करने वाले ही विजेता होकर इस रत्नों को धारण करने वाली धरती को भोगते हैं। राम और कृष्ण इसलिए हमारे आभीष्ठ हैं क्योंकि दोनों ही योद्धा हैं..शांति, युद्ध का ही भजनफल है..। और अंत में.. बकौल डा.शिवओम अंबर लफ्जों में हुंकार बिठा ,लहजों में खुद्दारी रख,  जीने की ख्वाहिश है तो मरने की तैयारी रख। # वंदेमातरम्

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जयराम शुक्ला

जयराम शुक्ला मध्यप्रदेश की पत्रकारिता के एक सशक्त हस्ताक्षर। राजनीति से लेकर समसामयिक विषयों पर आपकी जबरदस्त पकड़ है। लेखन शैली की विशेषता शुक्ला जी का एक अलग स्थान तय करती है। विंध्य में पत्रकारिता की पहचान और मध्यप्रदेश में वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार जयराम शुक्ला ने मुख्यधारा के तमाम बड़े अखबारों को अपने अनुभव से संवारा है।



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