प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद शीला दीक्षित के सामने सबसे बड़ी चुनौती कार्यकर्ताओं को एक्टिव करना



नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव सिर पर है और राजधानी दिल्ली में कांग्रेस की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। खोई जमीन की तलाश में प्रदेश कांग्रेस कमिटी की कमान 20 साल बाद एक बार फिर शीला दीक्षित के हाथों में तो सौंप दी गई है, लेकिन उनके सामने चैलेंज बहुत बड़े हैं। शीला और उनकी टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती सबको साथ लेकर चलने की तो है ही, इससे भी बड़ी चुनौती चुनावी साल में सुस्त पड़े नेताओं और वर्करों को ऐक्टिव करना है


दो से तीन महीने के अंदर चुनाव होने हैं और इस दरम्यान नई टीम तैयार कर उसे चुनावी रण में बीजेपी और आप के टक्कर के लिए भी तैयार भी करना है। दूसरी ओर दोनों पार्टियों की टीमें महीनों पहले मैदान में कूद चुकी है।  चुनौती-1 : ऐक्टिव लोगों की भागीदारी रहे राजनीति के जानकारों का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस में हमेशा गुटबाजी रही है, जब अजय माकन का राज था तो उनकी टीम ऐक्टिव थी और पिछले चार साल से धरना प्रदर्शन से लेकर पार्टी के कार्यक्रमों की जिम्मेदारी निभा रहे थे।


इस दौरान एमसीडी के चुनाव के साथ-साथ उपचुनाव भी माकन की अगुवाई वाली टीम ने लड़ा। जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ 9 पर्सेंट वोट मिले थे, उसे माकन की टीम 24 से 26 पर्सेंट तक लेकर गई। अब तक ऐक्टिव रहे लोगों की भागेदारी नहीं या कम होगी तो मुश्किलें बढ़ेंगी।


हमने जब माकन की टीम के एक नेता से बात की तो नाम नहीं छापने की शर्त पर उन्होंने कहा कि अब हम घर बैठेंगे, देखते हैं क्या होता है?  चुनौती-2 : सबको साथ लेकर चलना होगा  एक अन्य नेता ने कहा कि शीला दीक्षित की उम्र सबसे बड़ी चिंता की वजह है, वो अपनी उम्र की वजह से उतना ऐक्टिव नहीं हो पाएंगी, वहीं दूसरी ओर जो टीम बनाई गई है वो किस तरह अपने नेताओं और वर्करों को साथ लेकर चलते हैं, यह समय बताएगा।


क्योंकि वर्किंग प्रेजिडेंट का चलन दिल्ली में नया है और सबसे बड़ी बात यह है कि ये तीनों लोग एक साथ मिलकर कैसे काम करेंगे? नेताओं का कहना है कि माकन ने टीम बनाई, उनके पास लंबा समय था काम करने के लिए। उनके लोग भी धीरे धीरे एक्टिव हुए। लेकिन अभी समय नहीं है, तुरंत टीम बनानी होगी और उन्हें तुरंत मैदान में उतारना होगा। जब पार्टी कोई कार्यक्रम रखेगी, तब टीम के एक्टिवनेस का पता चल जाएगा।  उम्मीद : पुराने नेताओं का सपोर्ट दूसरी ओर अच्छी बात यह रही कि शीला दीक्षित के आने के बाद कई पुराने नेता एक्टिव हो गए हैं। जिसमें सबसे बड़ा नाम जयप्रकाश अग्रवाल का है। वो शुक्रवार को शीला दीक्षित से मिलने उनके घर पहुंचे, उन्हें बधाई दी और हर तरह से सपोर्ट का भरोसा दिया। सूत्रों की मानें तो शीला दीक्षित ने भी कहा कि पार्टी को उनकी सलाह की जरूरत है। इसी तरह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा, रामाकांत गोस्वामी, मंगतराम सिंघल जैसे नेता फिर से एक्टिव होंगे और इनका सालों का अनुभव पार्टी को मिलेगा। यही नहीं, एके वालिया, किरण वालिया, योगानंद शास्त्री, संदीप दीक्षित भी एक्टिव मोड में दिख सकते हैं।  

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