क्या इस नदी में ‘डूबने ’से मर जा रही हंैं मछलियां



धौलपुर। राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच बहने वाली चम्बल नदी को लेकर एक सवाल उठ खड़ा हुआ है। वह यह कि क्या इस नदी की डाल्फिन मछलियां डूबकर मर रही हैं? इन मछलियों को बचाने के तमाम सरकारी दावों के बीच नदी में उनकी संख्या शून्य हो जाने के चलते यह सवाल उठ रहा है। चंबल नदी को श्रापमुक्त करने के लिए कन्याभोज के साथ चुनरी चढ़ाई जाएगी


चंबल नदी में डॉल्फिन की संख्या कम होने से प्रशासन चिंतित है और नई गणना चंबल की डॉल्फिन की संख्या शून्य बताई गई है, जबकि बीते बरस में यह संख्या 74 थी। राजस्थान तथा मध्य प्रदेश की विभाजन रेखा चंबल नदी में 2019 की गणना में घड़ियाल तथा मगरों की संख्या बढ़ गई है, जिसे वन्यजीव प्रतिपालक चिंतित हैं।


देश में केवल चंबल नदी सबसे स्वच्छ मानी जाती है, जिसका जल लगभग 500 गांवों में पीने के काम आता है। वेदों में चर्मण्यवती  के नाम से बह रही चंबल को गंगा, यमुना, नर्मदा जैसा सम्मान नहीं मिल रहा है। जनापाऊ पहाड़ से निकल कर पचनदा में मिलने वाली चंबल नदी लगभग 500 गांवों को जीवन का स्रोत बनी है। महाभारत कालीन यह नदी श्राप ग्रस्त है।


यह माना जाता है कि जब तक यह श्रापमुक्त नहीं होगी तब तक चंबल नदी में आरती नहीं हो सकती है। इसके लिए नदी पर कन्याभोज कराया जाएगा और किशनपुर स्थित गोपाल मंदिर से सबसे पहले तो चुनरी चरणों में अर्पित कर प्रार्थना की जाएगी कि द्रोपदी से चंबल नदी को श्रापमुक्त करने का अनुरोध करें।


उधर जिला निर्वाचन विभाग ने डॉल्फिन के माध्यम से मतदाताओं को जागरूक करने की पहल की है। जिला निर्वाचन अधिकारी नेहा गिरी ने डाल्फी आई, डाल्फी आई। शत प्रतिशत मतदान का संदेश लाई। नाम से स्लोगन जारी किया है। इसके साथ ही स्टिकर जारी हुआ है, जिसमें डॉल्फिन का चित्र लगा हुआ है, जबकि डॉल्फिन की गणना में शून्य पर आ गई है। जबकि घडियालो की संख्या बढ़क 1876 तक हो गई है। इसी प्रकार इंडियन स्कीमर की संख्या भी 476 पर पहुंच गई है। चंबल जलीय जीव गणना में डॉल्फिन शून्य आने पर इसकी दोबारा गणना करना करने की योजना बनाई गई।

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