कांग्रेस पार्टी की बढ़ी मुश्किलें, जीजीपी ने कांग्रेस से मांगी प्रदेश में लोस की दो सीटें



भोपाल। लोकसभा चुनावों की घोषणा होने के साथ ही प्रदेश में कांग्रेस के सामने मुश्किलें आनी शुरू हो गई हैं। जयस के बाद अब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) ने कांग्रेस से लोकसभा की दो सीटें मांगकर उसके सामने नई परेशानी खड़ी कर दी है। दरअसल प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में मजबूती के साथ उभरी है। जीजीपी को मिले वोट प्रतिशत ने कांग्रेस की टेंशन बढ़ा दिया है


इसके बाद कांग्रेस और जीजीपी के बीच लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर चर्चा के दो दौर भी हो चुके हैं। जीजीपी ने कांग्रेस से मप्र की दो लोकसभा सीटें मांगी हैं, लेकिन अभी कांग्रेस ने हरी झंडी नहीं दी है। इस मसले पर अभी दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ मप्र प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की बात होना बाकी है।


विधानसभा चुनाव 2018 में जीजीपी ने मध्यप्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 73 सीटों पर अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे, इनमें से 32 विधानसभा सीटों पर जीजीपी मजबूती के साथ उभरकर सामने आई है। यह सभी विधानसभा की सीटें नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में लगी हुुई और आदिवासी बहुल हैं।


अगर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा चुनाव लड़ने वाली इन 73 विधानसभा सीटों की स्थिति को देखा जाए, तो जीजीपी को साढ़े सात प्रतिशत वोट मिले हैं। इसी वोट प्रतिशत ने कांग्रेस का टेंशन बढ़ा दिया है। कांग्रेस के पास अभी मप्र में सिर्फ तीन लोकसभा सीटें हैं। दिल्ली की गद्दी हथियाने के लिए कांग्रेस पार्टी प्रत्येक सीट का अलग-अलग प्लान बना रही है।


  जीजीपी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए मप्र कांग्रेस समन्वय समिति के सह संयोजक एवं सांसद विवेक तन्खा के साथ बैठककर एक प्रस्ताव पूर्व में सौंपा था। जीजीपी के अध्यक्ष हीरा सिंह मरकाम द्वारा रखे गए प्रस्ताव में मंडला और शहडोल लोकसभा सीटें गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को दिए जाने की मांग रखी थी। इस पर अभी दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा होना बाकी है। इसी बीच जीजीपी से अलग हुए एक पूर्व विधायक मनमोहने शाह बट्टी के गुट द्वारा बनाई गई पार्टी भारतीय गोंडवाना पार्टी ने भी एक लोकसभा सीट बैतूल की मांग की है।

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