तीन नाटकों से बयां की ईमानदारी दिखावे और शक के दर्द की कहानी



छत्तीसगढ़ फिल्म एंड विजुअल आर्ट सोसायटी की ओर से परसाई जयंती के मौके पर बुधवार को तीन नाटकों का मंचन किया गया। सिविल लाइंस स्थित वृंदावन हॉल में मंचित इन नाटकों के जरिए सामाजिक बुराइयों पर तंजा कसा गया। यहां हरिशंकर परसाई की रचना \"प्रेमचंद के फटे जूते\' में दिखावे पर व्यंग्य किया गया, तो प्रेमचंद की रचना \"नमक का दरोगा\' से ईमानदारी और \"लांछन\' से परिवार में शक के दर्द को व्यक्त किया गया


नाट्य रूपांतरण और निर्देशन रचना मिश्रा ने किया। ढोंग से बचें, व्यक्तित्व ऐसा बनाएं कि लोग हमेशा आपकी कद्र करें हरिशंकर परसाई की रचना प्रेमचंद के फटे जूते के जरिए ढोंग और दिखावे की दुनिया से बचने का संदेश दिया गया है। इसमें लेखक प्रेमचंद के फटे जूते पर तंज कसा जाता है और उनके फटे जूते से बाहर निकली उंगली को देख सब हंसते हैं। इस पर परसााई प्रेमचंद से कहते हैं- मैं आपके फटे जूतों की बात समझता हूं।


उंगली का इशारा समझता हूं और तुम्हारी व्यंग्य-मुस्कान भी समझता हूं। इसमें बताया गया कि इंसान को अपनी वेशभूषा से ज्यादा अपने व्यक्तित्व पर ध्यान देना चाहिए, ताकि आप समाज में अपने गुणों से पहचाने जाएं। रिश्वत न लेने की वजह से गंवानी पड़ी नौकरी, आिखर में जीत गई ईमानदारी नाटक नमक का दरोगा में वंशीधर परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने नमक के दरोगा की नौकरी करता है।


वंशीधर ईमानदार है और हमेशा सत्य का साथ देता है। एक दिन वंशीधर को नमक के अवैध धंधे के बारे में जानकारी मिलती है, जो नामी व्यक्ति अलोपीदीन करा रहा था। अवैध धंधे की जानकारी न देने के लिए अलोपीदीन वंशीधर को लालच देता है, लेकिन वो इसे ठुकरा देता है, जिसके चलते उसे अपनी नौकरी गंवानी पड़ती है। अंत में आरोपी को अपनी गलती का अहसास होता है और वंशीधर को अपने यहां नौकरी पर रख लेता है।


इसमें बताया गया कि ईमानदारी की हमेशा जीत होती है। नाटक लांछन का एक दृश्य। दूसरे के बहकावे में आकर जन्मा शक और बिखर गया परिवार प्रेमचंद की कहानी लांछन समाज में स्त्री को छले जाने की कहानी है। नाटक देवी नाम की महिला के इर्दगिर्द घूमती है। घर में सफाई करने वाले मन्नू देवी की माली हालात पर तरस खाकर उसकी आर्थिक सहायता करता है। लेकिन मन्नू, देवी और उसके पति के बीच शक पैदा करता है। बार-बार शक करने की प्रवृत्ति से देवी परेशान हो जाती है। पति-प|ी के बीच रोजाना झगड़े होते हैं। अंत में मन्नू की असलियत सामने आती है और घर छोड़कर चली जाती है।

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