भोर तक चले व्यंग्य बाण, हास्य के तीर



बारां. डोल मेला रंगमंच पर शनिवार रात आयोजित राजस्थानी कवि सम्मेलन में भोर तक कविता का रंग जमा। मंच से मौजूदा सरकार पर तीखे व्यंग्य बाणों से प्रहार किया गए।शृंगार व हास्य व्यंग्य की फुंहारों ने दर्शकों को बांधे रखा। सर्वप्रथम सरस्वती वंदना के साथ भैरूलाल भास्कर ने कवि सम्मेलन का आगाज किया


इसके बाद बारां के कवि दुर्गाशंकर धांसू ने व्यंग्य बाण छोड़ते हुए - यार आज खाल घणा अच्छा दन आरिया छ, पेटरोल पचास की बजाई पिच्यासी में ही लीटर आरयो छ .... से सम्मेलन को गति दी। हालंाकि मंच पर 26 कवियों की लम्बी फेहरिस्त थी बावजूद इसके मंच पर बैठे पांच सितारों का श्रोता बेसब्री से इंतजार करते रहे। रात्रि तीसरे पहर जब कोटा से आए मुकुटमणी राज ने मंच संभाला तो श्रोताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ।


उन्होंने सिस्टम पर प्रहार करते हुए अपनी रचना- जनता को दम घुट्यो, मंहगाई की मार सू, याही इक्कीसवी सदी छ काई, पूछो तो सरकार सू.....। से दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। 72 वर्षीय कवि दुर्गादान सिंह गौड़ को दर्शकों ने तसल्ली से सुना। उन्होंने - बिना खिलोने के बचपन गुजार आए हंै, हम मन को बहुत पहले मार आए हंै। से श्रोताओं को रोमांचित कर दिया।


शृंृगार रस के विशेषज्ञ गौड़ ने राधाकृष्ण की लीला का सजीव चित्रण किया।उन्होंने बरसों पुरानी रचना- घाम घूमरों लहंगो देख्यो, चमचम करती चूडियां देखी, मेड़ी चढ़ती उतरती देखी कामणगारी....। सुनाकर साबित कर दिया कि ओल्ड इज गोल्ड है।कवि राजकुमार बादल की धारदार रचनाओं ने भी धूम मचा दी।


मंच संचालक व औज रस के कवि भूपेन्द्र राठौर ने - राम नाम पर वोट मांगबो, नेताओं को धंधो छ, रामलला न दिल्ली दी छी, रामलला न ही भूलग्या। ने भी खूब दाद पाई। इसके अतिरिक्त मंच से मधु शृंगी मुम्बई, विष्णु विश्वास अन्ता, पवन गोचर बारां, देशबंधु दाधीच अंता, रमेश राजस्थानी सहित 26 कवियों ने कविता पाठ किया। आयोजन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में उपस्थित थी। डोल मेला रंगमंच पर एक अक्टूबर को रंगारंग आर्केस्ट्रा होगी। इस दौरान नृत्य संगीत की महफिल सजेगी। इन्होंने किया स्वागत कार्यक्रम के दौरान सर्वप्रथम मेलाध्यक्ष विष्णु शाक्यवाल, पार्षद नवीन सोन, शिवशंकर यादव, मनोज बाठला, विजयदीप नागर, नियाज मोहम्मद, तेजस सुमन, आदि ने सभी कवियों का माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत की।

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