आजम खान पर दया आ रही है क्योंकि...



बीबीसी न्यूज ने बीते साल एक हट-कर स्टोरी की थी। मामला 61 साल के बेहद कुंठित शख्स जोसेफ का था। इस  उम्र में उसने अपनी तकलीफ साझा की। वह यह कि जीवन के 37 बसंत देखने तक उसे कभी यौन सुख का आनंद ही नहीं मिल सका था। उसने इससे उपजे मनोविकारों का भी जिक्र किया था। इस पर ढेर प्रतिक्रियाएं आयीं। खास बात यह रही कि इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक में जोसेफ के प्रति न सिर्फ सहानुभूति जतायी गयी, बल्कि कमोबेश इन सभी लोगों ने यह भी कहा कि वे भी यौन संबंध से जुड़ी समस्याओं के चलते जोसेफ की तरह के कुंठित अनुभवों के संत्रास से गुजरे हैं।  ऐसी एक प्रतिक्रिया में लिखा गया था, ‘मैं जोसेफ के इतने साल तक अनुछुए रहने की कहानी से सहानुभूति रखता हूं।’ सच कहूं तो ऐसी ही सहानुभूति बल्कि दया का भाव आज मन में मोहम्मद आजम खान के लिए आ रहा है। वह समाजवादी पार्टी के नेता हैं। उत्तरप्रदेश के रामपुर से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। पहले कभी मुलायम सिंह यादव के शार्प शूटर की हैसियत रखते थे। फिलहाल अखिलेश यादव के खास लोगों में अपनी जगह बनाने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं।  इन्हीं आजम ने एक बार फिर जयाप्रदा पर घनघोर आपत्तिजनक टिप्पणी की है।


फिल्मों से लेकर राजनीति तक गरिमामयी सफर तय करने वाली एक महिला के अंत:वस्त्रों के रंग को लेकर बात कही है। पूरा वाकया पढ़कर लगा कि हो न हो, आजम ऊपर बताये गये जोसेफ की तरह ही स्त्रियों को लेकर किसी खास किस्म की कुंठा से ग्रस्त हैं। नारी जगत को लेकर उनके कुछ उदाहरण सुनिये। उन्होंने भारत माता को डायन कहा था। काफी पहले एक सर्किट हाउस के बाथरूम में सुराख दिखने पर उन्होंने उसकी देखरेख करने वाले स्टाफ से पूछा था, ‘जब तुम्हारी मां-बहनें यहां नहाती हैं तो क्या इसी छेद से छुप-छुपकर उन्हें देखते हो!’ उत्तरप्रदेश के बीते विधानसभा चुनाव में आजम ने मायावती पर जुबानी हमला करने की रौ में उनके आदर्श बाबा साहेब अम्बेडकर के लिए विवादित टिप्पणी की थी। इससे पूर्व वह जयाप्रदा को ‘ठुमके लगाने वाली’ कह चुके हैं।  क्राइम रिपोर्टिंग के लम्बे अनुभव के बीच मैं कई बार मनोवैज्ञानिकों से मिला। यौन अपराधियों को लेकर वह यही कहते थे कि ऐसा अधिकांशत: वही शख्स होता है, जो या तो क्षमता की दृष्टि से कमजोर हो या फिर इस मामले में सतत उपेक्षा एवं कटाक्षों के चलते उसके भीतर कुंठा भर गयी हो। उसे स्त्रियों को प्रताड़ित करने में आनंद आता है। उनके खिलाफ होने वाले अत्याचारों का वह मजा लेता है।


यहां याद दिला दें कि उत्तरप्रदेश में सन 2017 में हुए बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार कांड को आजम ने उनकी तत्कालीन सरकार को बदनाम करने की साजिश बता दिया था। जरा सोचिए, सड़क किनारे, परिवार के पुरुषों के सामने बलात्कार का शिकार होने वाली किसी मां-बेटी के साथ हुए गलत पर ऐसी प्रतिक्रिया क्या सामान्य मानसिकता वाला कोई शख्स दे सकता है! यूं भी आप पाएंगे कि युवतियों पर फब्तियां कसने वाले अधिकांश वह शोहदे होते हैं, जिन्हें किसी युवती का साथ नहीं मिल पाता है। आज का वायरल वीडियो देखने और सुनने के बाद मेरी यह प्रबल राय है कि आजम का मामला भी किसी यौन अपराधी या शोहदे से बहुत अलग  नहीं है। संभवत: वह कई ऐसी नाकाम आरजूओं के शिकार हैं, जो उन्हें स्त्री जगत के प्रति इस कदर अघातनीय बनाए हुए है।  खैर, आजम के मामले को पूरी तरह स्त्रीलिंग के लिए ओछेपन का सबूत नहीं कह सकते। क्योंकि यह वही शख्स है, जिसने उत्तरप्रदेश में मंत्री रहते हुए अपनी भैसों के गुमने पर पूरे पुलिस तंत्र को हिलाकर रख दिया था। स्त्रीलिंग जानवर के लिए ऐसा मोह कई सवाल उठाता है। जिनके जवाब आजम ही दे सकते हैं, क्योंकि भैंस तो बेचारी कुछ बोल ही नहीं सकती। हां, हम यही कह सकते हैं कि उत्तरप्रदेश जाते समय रेलवे ट्रेक से लगी दीवारें उन विज्ञापनों से रंगी रहती हैं, जिनमें ‘शादी से पहले, शादी के बाद’ को लेकर कई लुभावने दावे किए जाते हैं। रामपुर उत्तरप्रदेश में ही है, इससे अधिक और कुछ कहने की जरूरत है क्या!

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प्रकाश भटनागर

प्रकाश भटनागर वरिष्ठ पत्रकार हैं और भोपाल तथा इंदौर से प्रकाशित एल एन स्टार दैनिक समाचार पत्र के संपादक है। यह कालम अखबार के प्रथम पृष्ठ पर पहले कालम में प्रकाशित होता है, उसी को हम वेबखबर में भी प्रकाशित करते हैं। प्रकाश पिछले तीन दशक से भोपाल के कई प्रमुख अखबारों, दैनिक देशबंधु रायपुर और भोपाल, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण सहित अन्य अखबारों में काम करते रहे हैं। लेखक अपनी तल्ख राजनीतिक टिप्णियों और विश्लेषण के कारण मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में अपनी विशेष पहचान रखते हैं।



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