शुक्रवार को देवी पूजा में मांगे स्वास्थ्य का वरदान, दवाआें में भी हैं देवी के सब रूप



आैषधि आैर देवी के रूपों का संबंध यदि शास्त्रों की मानें तो एेसी मान्यता है कि ब्रह्माजी के दुर्गा कवच में वर्णित नवदुर्गा नौ विशिष्ट औषधियों में भी विराजमान हैं। शुक्रवार को देवी की पूजा से संख, समृद्घि, संतान आैर शक्ति की प्राप्ति के बारे में तो आपने सुना ही होगा। आज जाने कैसे उनका आैषधिय स्वरूप आपको अच्छे स्वास्थ्य का भी आर्शिवाद प्रदान करता है। आइये जाने देवी के नौ स्वरूपों में किसके साथ जुड़ी है कौन सी आैषधि। नौ देवी नौ आैषधि देवी के नौ स्वरूप हैं आैर हर स्वरूप के साथ एक ना एक एेसी वनस्पति जुड़ी है जो आैषधियों में प्रयोग की जाती है। 1- हरड़: कई प्रकार के रोगों में काम आने वाली औषधि हरड़ का नाम हिमावती भी है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप है। इसे आयुर्वेद की प्रधान औषधि भी माना जाता है। यह पथया, हरीतिका, अमृता, हेमवती, कायस्थ, चेतकी और श्रेयसी सात प्रकार की होती है।


2- ब्राह्मी: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ब्राह्मी देवी ब्रह्मचारिणी का प्रतीक है। ये आयु व याददाश्त बढ़ाकर, रक्तविकारों को दूर करती है आैर स्वर को मधुर बनाती है। इसलिए इसे सरस्वती भी कहा जाता है। 3- चंदुसूर: यह देवी चंद्रघंटा से जुड़ा एक पौधा है आैर धनिए के समान होता है। यह औषधि मोटापा दूर करने में काम आती है इसलिए इसे चर्महंती भी कहते हैं। 4- पेठा: पेठे का फल के रूप में नाम कुम्हड़ा होता है आैर ये देवी कूष्मांडा से संबंधित है। इसी से पेठा मिठाई भी बनती है। ये आैषधि रक्त विकार दूर कर पेट को साफ करने में सहायक है। इसके अलावा मानसिक रोगों में यह अमृत के समान मानी जाती है। 5- अलसी: इसी क्रम में कहा गया है कि देवी स्कंदमाता औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह एक वात, पित्त व कफ रोगों में आराम प्रदान करने वाली औषधि है, जिसका सेवन अत्यंत लाभकरी है।


6- मोइया: देवी कात्यायनी आैर आयुर्वेद का गहरा रिश्ता है यहां इन्हें कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका व अम्बिका। इसके अलावा इन्हें मोइया भी कहते हैं। यह औषधि कफ, पित्त व गले के रोगों का समूल नाश करने में सक्षम होती है। 7-नागदौन: कालरात्रि नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती हैं। यह दवा सभी प्रकार के रोगों में लाभकारी और मन एवं मस्तिष्क के विकारों को दूर करने वाली मानी जाती है। 8- तुलसी: तुलसी की विशेषताआें से सभी वाकिफ हैं इसे देवी महागौरी का प्रतीक माना जाता है। तुलसी सात प्रकार की होती है सफेद, श्यामा, मरूता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र। इस के सेवन से रक्त साफ होता है आैर इसी कारण ह्वदय रोगों से ये रक्षा करती है। 9- शतावरी: देवी का नौवां रूप सिद्धिदात्री है आैर उन्हें नारायणी शतावरी भी कहते हैं। इसीलिए शतावरी मां के इसी रूप से संबंधित है। यह आैषधि के रूप में बल, बुद्धि एवं विवेक के लिए उपयोगी है।

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