ॐ का चिन्ह है गणपति स्वरूप का प्रतीक जाने बुधवार को कैसे करें पूजा



गणों के अधिपति शास्त्रों के अनुसार श्री गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। उनका वाहन मूषक है जिसका नाम डिंक बताया जाता है। पौराणिक ग्रंथों में कहा गया है कि गणों के स्वामी होने के कारण ही वे गणपति भी कहलाते हैं। ज्योतिष में गणेश जी को केतु का देवता माना जाता है। संसार के समस्त साधनों के देव भी श्री गणेश हैं। उनका सिर हाथी जैसा है इसी कारण उन्हें गजानन भी कहते हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों में गणेश जी को किसी भी कार्य के करने के पहले पूज्य यानि पूजन करने योग्य है, इसलिए इन्हें प्रथमपूज्य कहते है। मुख्य रूप से गणेश कि उपसना करने वाला सम्प्रदाय गाणपतेय कहलाता है।


ॐ है प्रतीक मान्यता है कि गणपति आदिदेव हैं जिन्होंने हर युग में अलग अवतार लिया है। उनकी शारीरिक संरचना का भी विशिष्ट व गहरा अर्थ है। शिवमानस के अनुसार श्री गणेश को प्रणव अर्थात ॐ कहा गया है। इस ब्रह्म स्वरूप एकाक्षर में ऊपर वाला भाग गणेश का मस्तक, नीचे का भाग उदर, चंद्रबिंदु लड्डू और मात्रा सूंड़ का स्वरूप है। गणेश की चारों भुजायें चारों दिशाओं में सर्वव्यापकता की प्रतीक हैं। वे लंबोदर भी कहलाते हैं क्योंकि समस्त सृष्टि उनके उदर में विचरती है। बड़े कान अधिक ग्राह्यशक्ति व छोटी-पैनी आंखें सूक्ष्म आैर तीक्ष्ण दृष्टि की सूचक हैं। उनकी लंबी नाक महाबुद्धित्व का प्रतीक है।


कैसे करें गणेश जी की पूजा बुधवार का दिन गणेश जी की पूजा के लिए नियत है। इस दिन पूजन से पहले नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर शुद्ध आसन में बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित करें। ये सामग्री है पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन,आैर मोदक। गणेश जी की पूजा करने के लिए एक चौकी को पूजाघर में रखें, आैर इसके ऊपर लाल कपड़ा अच्छी तरह बिछाएं। अब भगवान गणेश की मूर्ति या फोटो को चौकी पर रखें। अब दीप-धूप जलाकर पूजा की शुरूआत करें। स्मरण रहे भगवान श्रीगेश को तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए, इसकी अपेक्षा उन्हें, शुद्ध स्थान से चुनी हुई दुर्वा धोकर चढ़ायें। पूजन के पश्चात उन्हें मोदक का प्रसाद चढ़ायें। पूजा के दौरान ॐ श्री गं गणपतये नम: मंत्र का जाप करें, इस जप को 108 बार करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

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