ये चांद क्यों कहलाता है सुपर ब्लड वुल्फ मून, इसके बाद तीन साल तक नहीं दिखेगा ये नजारा



साल का पहला चंद्र ग्रहण क्यों है अनोखा 2019 का पहला चंद्रगहण 20 आैर 21 जनवरी की मध्यरात्रि को दिखाई देगा। ये चंद्रगहण सुपर ब्लड वुल्फ मून के नाम से जाना बुलाया जा रहा है। चंद्रमा जब धरती की छाया से होकर जाता है तो सुपरमून या लाल तांबे के रंग जैसा नजर आता है। हर पूर्णिमा का एक खास नाम होता है, 2019 के पहले महीने में इस पहले चंद्रगहण का नाम भी अपने में खास है। ये 20 जनवरी की शाम सुपर ब्लड वुल्फ मून 8 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगा और 21 जनवरी को 1 बजकर 18 मिनट पर पूरा हो जायेगा।


कुछ जनजातियों ने दिया ये नाम सुपर ब्लड वुल्फ मून खुली आंखों से देखा जा सकता है। एेसा कहा जा रहा है कि इस ग्रहण को ये अनोखा नाम नेटिव अमेरिकी जनजातियों ने दिया है। उनके अनुसार पूर्णिमा की रात को भोजन की तलाश में निकलने वाले भेड़िये तांबे के रंग के लाल चांद को देख कर जोर-जोर से चिल्लाते हैं। इसी के चलते इस चंद्र ग्रहण को वुल्फ मून नाम दिया गया। यही बाद में सुपर ब्लड वुल्फ मून कहलाने लगा।


एेसा भी कहा जा रहा है कि ग्रहण एक से ज्यादा खगोलीय घटनाओं के संयोग से बना है आैर 21 जनवरी की रात को इसके कारण कर्इ अनोखे नजारे आसमान में दिखेंगे। हालांकि यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। तीन साल करना होगा इंतजार इस नजारे को अमेरिका के कुछ हिस्सों आैर पश्चिमी अफ्रीका में सबसे ज्यादा स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। खास बात ये है कि इसके बाद करीब तीन साल के इंतजार के बाद कोर्इ पूर्ण चंद्र ग्रहण पड़ेगा। यानि 21 जनवरी के बाद अगला पूर्ण चंद्र ग्रहण 26 मर्इ 2021 को पड़ेगा। इसलिए जिन को भी मौका मिल रहा है वो इस खूबसूरत नजारे को अपनी यादों में कैद कर लें। इससे पहले पूर्ण चंद्र ग्रहण पिछले साल 27 जुलार्इ को पड़ा था।

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