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‘माई का लाल’ के बाद के मोदी

शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद के दम्भ में जिस समय पदोन्नति में आरक्षण को लेकर मदमस्त आचरण दिखाया था, तब उनके साथ-साथ मोदी ने भी कल्पना नहीं की होगी कि इसका क्या परिणाम होगा। सपाक्स भले ही राजनीतिक गलियारों में दमदार उपस्थिति दर्ज न करवा सका हो, किंतु सामाजिक स्तर पर उसने वह हलचल मचा दी, जिसके चलते कहीं नोटा का असर दिखा तो कहीं सवर्ण बाहुल्य वाली सीटों पर भाजपा के मत प्रतिशत कमी दर्ज की गयी। जाहिर कि एट्रोसिटी एक्ट को लेकर फैली विपरीत गरम हवा के थपेड़ों ने भी मोदी की नींद उड़ा दी है। उनकी स्वाभाविक चिंता आने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर है। मोदी की काबीना मंत्री स्मृति ईरानी भी दो दिन पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में 2019 सभी के लिए मुश्किल होने वाला है कह चुकी हैं। सीधी सी बात है कि उनका भी इशारा आम चुनाव की ओर था और मोदी की सवर्णों के प्रति यह चिंता भी खालिस सियासी स्वरूप की है। read more  आगे पढ़ें

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