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अब तुनकमिजाजी से परहेज करें भार्गव

पूरी तरह अतीत के कब्रिस्तान में दफन इस मामले का जिक्र यकीनन सोद्देश्य किया गया है। इसमें बुराई भी नहीं है। सबको याद आना चाहिए कि भार्गव वाकचातुर्य के फेर में ऐसा कुछ कह गए थे कि तत्कालीन सुंदरलाल पटवा सरकार की खाट खड़ी हो गयी थी। इस लिहाज से यह भी याद किया जा सकता है कि इस कांड के कई साल बाद भार्गव ने एक महिला विधायक के लिए ‘मियां-बीवी राजी...’ जैसी बात कहकर एक और हंगामे का सूत्रपात कर दिया था।  आगे पढ़ें

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मध्यप्रदेश चुनाव: 18 शहरों में मतदान केन्द्रों पर ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में खराबी, 70 स्थानों पर बदली गर्इं

भोपाल में 15, होशंगाबाद में 20, रीवा में 20, ग्वालियर में 25, जबलपुर में 15, खंडवा में 46, बुरहानपुर में 15, खरगोन में 3, बड़वानी में 6, इंदौर में 17, शाजापुर में 2, उज्जैन में 6, देवास में 12, आगर-मालवा में 3, रतलाम में 15, झाबुआ में 5, मंदसौर में 2, आलीराजपुर में 9 ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में खराबी की शिकायतें मिली हैं।  आगे पढ़ें

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मध्यप्रदेश चुनाव: 18 शहरों में मतदान केन्द्रों पर ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में खराबी, 70 स्थानों पर बदली गर्इं

भोपाल में 15, होशंगाबाद में 20, रीवा में 20, ग्वालियर में 25, जबलपुर में 15, खंडवा में 46, बुरहानपुर में 15, खरगोन में 3, बड़वानी में 6, इंदौर में 17, शाजापुर में 2, उज्जैन में 6, देवास में 12, आगर-मालवा में 3, रतलाम में 15, झाबुआ में 5, मंदसौर में 2, आलीराजपुर में 9 ईवीएम और वीवीपैट मशीनों में खराबी की शिकायतें मिली हैं।  आगे पढ़ें

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क्या ऐसे तेवर ठीक हैं?

चतुर्वेदी का वह चेहरा याद आ रहा है, जो किसी समय मध्यप्रदेश विधानसभा में देखा था। सपाट चेहरा लिए उन्होंने यकायक विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की बात कही थी। तब वह दिग्विजय सिंह से प्रताड़ित होने की सीमा तक परेशान चल रहे थे। लेकिन ऐसा खुलकर गुस्सा तो उन्होंने तब भी नहीं दिखाया था। लेकिन आज वह आगबबूला हो रहे हैं। यहां विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद वे सोनिया गांधी के भरोसेमंद लोगों में शुमार हुए। कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे लेकिन जमीन पर उनकी कभी वो पकड़ नहीं रही लिहाजा बुंदेलखंड में वे कांग्रेस का हमेशा ही नुकसान करते रहे। read more  आगे पढ़ें

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कांग्रेस के ‘मुझे गुस्सा आता है’ का भाजपा ने निकाला तोड़, ‘माफ करो महाराज’ जमकर गूंज रहा है गली-गली में

माफ करो महाराज, हमारा नेता तो शिवराज ये वो शब्द हैं जिनकी गूंज मध्यप्रदेश की गली-गली में है. कांग्रेस के मुझे गुस्सा आता है अभियान का मुकाबला करने के लिए बीजेपी इस नारे के साथ सियासी समर में अपनी सल्तनत बचाने के लिए उतर चुकी है. खास बात ये कि इस अभियान के तहत चलाए जाने वाले विज्ञापनों की सीरीज में बीजेपी ने दिग्विजय सिंह सरकार को निशाना बनाते हुए शिवराज सिंह के कार्यकाल को बेहतर बताने की कोशिश की है. यानी ये विज्ञापन सत्ता विरोधी लहर से बचने की बीजेपी की उसी रणनीति पर आधारित हैं, जिसके तहत उसने लोगों को दिग्विजय सिंह का वक्त याद दिलाकर खुद को कांग्रेस से अच्छा दिखाने की योजना बनाई थी.  आगे पढ़ें

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परोपकार और कांग्रेस की नीयत

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा जारी वचन पत्र यानी घोषणा पत्र तो उपकार से भी बढ़कर परोपकार के नजदीक दिख रहा है। मामला राज्य का है, लिहाजा जवान को लेकर इसमें जिक्र नहीं हैं। लेकिन किसान के लिए पार्टी बिछ जाने को तैयार दिख रही है। अन्नदाता की खातिर ऐसी-ऐसी घोषणाएं कि एकबारगी तो शिवराज भी डर गए दिखने लगे। दन्न से बोल पड़े कि खुद इंदिरा गांधी अपनी कई घोषणाएं पूरी नहीं कर सकी थीं। यानी, मामला संजीदा तो है, कम से कम मतदाता को लुभाने और सत्तारूढ़ दल को डराने की दृष्टि से तो पूरी तरह ऐसा ही दिखता है।  आगे पढ़ें

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