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एक्जिट पोल 2019: भाजपा अपने 282 के रिकार्ड को कर सकती है ध्वस्त, पार कर सकती है 300 का आकड़ा

लोकसभा चुनाव के बाद अब सबकी निगाहें 23 मई को होने वाली काउंटिंग पर टिकी हैं, लेकिन अगर एग्जिट पोल्स की माने तो आएगा तो मोदी ही। खास बात यह है कि कुछ एग्जिट पोल्स में तो बीजेपी पिछली बार के अपने अबतक के सर्वश्रेष्ठ रेकॉर्ड (282 सीट) को भी ध्वस्त कर सकती है। उनमें अकेले बीजेपी को बहुमत की भविष्यवाणी की गई हैं और सीटें भी 300 के पार। एग्जिट पोल दिखा रहे हैं कि 2019 में एकबार फिर मोदी मैजिक चल रहा है। साफ संदेश मिल रहा है कि देश में नरेंद्र मोदी निर्विवाद रूप से सबसे लोकप्रिय नेता हैं। राष्ट्रवाद के साथ जुड़कर यह मोदी लहर और मजबूत होकर उभरी है। महागठबंधन और अन्य क्षेत्रीय दलों की एकजुटता के बावजूद मोदी का जादू बरकरार दिख रहा है। उनके सामने विपक्ष का कोई नेता टिकता नजर नहीं आ रहा है।  आगे पढ़ें

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एग्जिट पोल नतीजों से भाजपा में खुशी की लहर, शिवराज का दावा- एनडीए को मिलेंगी 350 से अधिक सीटें

प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडिया से चर्चा करते हुए शिवराज ने दावा किया कि 23 मई को मतगणना में जो नतीजे सामने आएंगे, वह एग्जिट पोल्स से अलग नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने मोदी के काम को पसंद किया है। मतदाताओं ने राष्ट्रवाद, विकास और जनकल्याण के मुद्दों पर जनादेश दिया है। उन्होंने कहा कि मप्र सरकार ने मेरी योजनाओं को बंद कर दिया और उलटे मुझ पर ही तोहमत लगा रहे हैं। एक सवाल पर उन्होंने दावा किया कि वास्तविक परिणाम में भाजपा 300 पार के नारे को हकीकत में बदलेगी। एनडीए को 350 से अधिक सीटें मिलेंगी।  आगे पढ़ें

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महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना का जलवा रहेगा कायम, मिल सकती है 39 सीटें

रिपब्लिक सी-वोटर सर्वे के अनुसार भाजपा को 34 और कांग्रेस को 14 सीटें मिल रही हैं। वहीं सुदर्शन न्यूज के सर्वे में भाजपा को 39 और कांग्रेस को 8 सीट मिल रही हैं, 1 सीट अन्य को मिल रही है। एबीपी न्यूज - निलसन के सर्वे में भाजपा को 34 और कांग्रेस को 14 सीट मिल रही हैं। आज तक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में महाराष्ट्र में एनडीए को 38 से 42 सीटें मिली हैं। वहीं यूपीए को 6 से 10 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।  आगे पढ़ें

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रतलाम से भूरिया को रोकने भाजपा ने की नाकेबंदी, आदिवासी मतदाता खामोश

राजनीति में आने से पहले डामोर प्रदेश शासन में कई अहम पदों पर रहे हैं। लोकसभा से जुड़ी तीन जिलों की आठों विधानसभा आलीराजपुर, जोबट, झाबुआ, थांदला, पेटलावद, रतलाम ग्रामीण, रतलाम शहर, सैलाना में प्रचार-प्रसार का अधिक शोरगुल नहीं सुनाई दिया है, लेकिन दोनों दलों के प्रत्याशी, पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता, परिजन और समर्थक अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं को रिझाने में जुटे रहे हैं।  आगे पढ़ें

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उज्जैन सीट बनी भाजपा के लिए चुनौती, विस चुनाव में मिली जीत से कांग्रेस उत्साहित

संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से कुछ पर जातीय समीकरण भी हावी हैं। इसलिए दोनों प्रमुख दल हर तरह राजनीतिक दांव खेल रही है। यहां की 63.49 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 36.51 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। 26 फीसदी आबादी यहां की अनुसूचित जाति के लोगों की है और 2.3 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति की है।  आगे पढ़ें

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साध्वी का घोर अनुचित आचरण

यह समझ से परे है कि जिस पार्टी का संगठनात्मक ढांचा तथा अनुशासन सर्वाधिक सख्त माना जाता हो, उसी पार्टी में भगवा धारण करने वाले कई लोग क्यों जुबानी अंगारों का प्रतीक बन जा रहे हैं। किसी समय साध्वी उमा भारती ने तो समूची पार्टी की इज्जत भरी बैठक में मीडिया के सामने उतारकर रख दी थी। यकीनन यह भाजपा की जरूरत है कि भगवा आतंकवाद जैसे प्रोपेगेंडा के मुकाबले का मजबूती से जवाब देने के लिए भगवाधारियों की ही मदद ले, किंतु ऐसे लोगों पर अंकुश लगाना भी तो पार्टी के कर्ताधर्ताओं का ही जिम्मा है। किंतु ऐसा होता नहीं दिख रहा। इससे हो यह रहा है कि गैर-राजनीतिक भगवाधारी भी अपनी छवि पर दाग लगता महसूस कर रहे हैं।साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का ताजा बयान बे-सिर पैर का है। चलिए मान लिया कि हेमंत करकरे ने उन्हें अमानवीय यातनाएं दीं। इन बातों का जिक्र करते हुए उनका आपा खो देना भी समझ में आता है। किंतु ये अचानक गोडसे कहां से बीच में आ गये? क्या साध्वी को यह इल्म भी नहीं कि मीडिया तो अधिकांश सवाल पूछता ही सनसनी के लिए है। फिर ऐसा कैसे हो गया कि एक सवाल का बचकाना और पूरी तरह असामयिक जवाब देकर उन्होंने देश-भर में अपनी ही पार्टी को नीचा देखने पर मजबूर कर दिया?  आगे पढ़ें

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कुछ तो वहां जरूर है, पत्थर जहां गिरा

1891 वो साल है जिस साल विद्यासागर का देहांत हुआ। तब न राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कोई अस्तित्व था और न ही भाजपा नामक किसी शै का उद्भव हुआ था। यह कांग्रेस के भी शुरूआती दिन थे। यह दिवंगत पुण्यात्मा तो परसों से पहले कभी भी ममता बनर्जी की आस्था का केंद्र भी नहीं थी। तो फिर अचानक क्या हो गया कि इनकी प्रतिमा टूटी और आरोप-प्रत्यारोप का क्रम शुरू हो गया! ऐसा लगता है कि अधिकांशत: प्रतिमाओं का महत्व उनके तोड़े जाने के बाद ही समझ आता है। त्रिपुरा में व्लादिमीर लेनिन मूर्ति बने खड़े थे। दशकों से उनका प्रमुख उपयोग एक ही था। उनके जरिये वामपंथी वहां अपनी सत्ता होने का भाव जता देते थे। ठीक वैसे ही, जैसे जंगल में शेर एक विशेष परिधि में लघुशंका करके वहां अपना अधिकार घोषित कर देता है। भाजपा सत्ता में आयी और राज्य से वामपंथी गुरूर की तरह ही लेनिन महोदय भी तोड़ दिये गये। परसों से जैसे ममता बिफरी हुई हैं, वैसे ही त्रिपुरा में वामपंथी लाल-पीले हो गये। गोया कि मामला अफगानिस्तान के बमियान में बौद्ध प्रतिमाओं को ढहा दिया जाने वाला हो। चलिये त्रिपुरा में तो यह सत्ता परिवर्तन का असर था, लेकिन पश्चिम बंगाल में भला भाजपा को विद्यासागर से क्या आपत्ति हो सकती है? विद्यासागर समाज सुधारक थे, शिक्षाविद् थे, बंगाल के रूढ़िवादी समाज में विधवा विवाह उनकी बदौलत स्थान पा सका। यानि वे उनकी ऐसी कोई पहचान अस्तित्व में नहीं है जिसमें उन्हें धर्मनिरपेक्ष या साम्प्रदायिक जैसा कोई तमगा दिया जा सकता हो।read more  आगे पढ़ें

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कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन रहे कांग्रेसी नेताओं के बिगड़े बोल, अब दिग्गी ने भाजपा नेताओं को कहा नालायक

दिग्विजय सिंह यहीं नहीं रूके। सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर दिग्विजय सिंह ने फिर पीएम मोदी पर हमला बोला। उन्होंने कहा- वो कह रहे हैं हमने देश बचा लिया, देश बचा लिया। हमने सर्जिकल स्ट्राइक की। असली सर्जिकल स्ट्राइक इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े करके की थी। बहरहाल दिग्विजय सिंह के बिगड़े बोल से कांग्रेस की परेशानी बढ़ सकती है। इससे पहले वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर द्वारा नीच कहे जाने पर खासा बवाल मचा था और ये सियासी मुद्दा बन गया था। अब नालायक जैसे शब्दों के प्रयोग से भाजपा को नया मुद्दा मिलेगा।  आगे पढ़ें

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कोलकाता में अमित शाह के रोड शो में पत्थरबाजी के बाद हंगामा, भिड़े भाजपा और टीएमसी के कार्यकर्ता

रोडशो के बाद अमित शाह ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'आज बीजेपी के रोडशो को कोलकाता में जिस तरह का रेस्पॉन्स मिला, उससे टीएमसी के गुंडे खिसिया गए और हमला कर दिया। मैं बीजेपी कार्यकतार्ओं को बधाई देना चाहता हूं कि इस सबके बावजूद रोडशो जारी रहा है और पहले से तय जगह और समय पर ही संपन्न हुआ।'  आगे पढ़ें

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द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन ने तीसरे मोर्चे की कवायद को किया खारिज

तेलंगाना राष्ट्र समिति ने मंगलवार को कहा कि उसके मुखिया और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव द्वारा प्रस्तावित क्षेत्रीय दलों का संघीय मोर्चा केंद्र में सरकार बनाने के लिए तब तक कांग्रेस का समर्थन लेने को तैयार है जब तक कि वह 'ड्राइवर सीट' (सरकार का संचालन) की मांग नहीं करती है। टीआरएस प्रवक्ता आबिद रसूल खान ने कहा कि केसीआर इस बात पर अडिग हैं कि केंद्र में सरकार का संचालन संघीय मोर्चे को ही करना चाहिए। संख्या कम होने की स्थिति में कांग्रेस से बाहर से समर्थन लेने का विकल्प तलाशा जाएगा। खान ने भाजपा से दूरी बनाए रखने के भी संकेत दिए हैं और कहा है कि संघीय मोर्चा किसी भी तरह भाजपा से नहीं जुड़ेगा। न तो हम भाजपा से समर्थन लेना चाहते हैं और न ही हम उसको समर्थन देना चाहते हैं। केसीआर से बात करने वाले ज्यादातार घटकों का भी यही मत है कि वे भाजपा के साथ कोई संबंध नहीं रखेंगे।  आगे पढ़ें

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