होम भाजपा
some-days-remaining-for-the-start-of-lok-sabha-ele

लोकसभा चुनाव की शुरुआत होने में कुछ दिन शेष, कई सीटों पर होगा कांटे का मुकाबला

लोकसभा चुनाव की शुरूआत में अब चंद रोज ही बाकी रह गए हैं। 7 चरणों में होने वाले चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस ने आधे से ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही क्षेत्रीय पार्टियां भी अपने अपने ज्यादातर उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी हैं। राजनीतिक दलों द्वारा अपने अपने प्रत्याशियों की घोषणा के बाद कई महत्वपूर्ण सीटों पर होने वाले मुकाबले की स्थिति पूरी तरह से साफ हो गई है। हिंदीभाषी इलाकों में कई सीटों पर कांटे की टक्कर फिलहाल नजर आ रही है।  आगे पढ़ें

candidate-can-create-shivraj-from-bjp-increase-dou

15 सीटों पर प्रत्याशी घोषित होने के बाद 14 सीटों पर बढ़ा संशय, भाजपा से शिवराज को बना सकती है उम्मीदवार

संभावना है कि सोमवार तक अगली लिस्ट आ सकती है। ग्वालियर से विवेक शेजवलकर या नारायण कुशवाह के नाम पर नेता देर रात तक विचार कर रहे थे। वहीं छिंदवाड़ा में पार्टी ने मनमोहन शाह बट्टी के नाम को विचार में लिया है या फिर किसी बड़े को भेजा जा सकता है। सागर में पिछड़े वर्ग को देखते हुए लक्ष्मीनारायण यादव को रखने पर विचार कर रही है। संघ से यहां लक्ष्मीकांत शर्मा का नाम प्रस्तावित है। धार से मुकाम सिंह निगवाल, मालती पटेल या छतर सिंह के नाम पर विचार चल रहा है।  आगे पढ़ें

bjp-has-declared-286-candidates-so-far-narendra-si

भाजपा ने अब तक 286 उम्मीदवारों का किया ऐलान, नरेन्द्र सिंह तोमर को मुरैना से उतारा मैदान में

बीजेपी ने शनिवार दोपहर में एक और लिस्ट जारी की थी। उसमें तेलंगाना के 6, यूपी के 3, केरल और पश्चिम बंगाल से एक-एक उम्मीदवारों के नाम शामिल थे। खास बात यह है कि यूपी की कैराना सीट से दिवंगत बीजेपी नेता हुकुम सिंह की बेटी मृगांका का टिकट काटकर प्रदीप चौधरी पर दांव खेला है। हुकुम सिंह की मौत के बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी ने उनकी बेटी मृगांका को चुनाव मैदान में उतारा था लेकिन वह हार गईं थीं।  आगे पढ़ें

bjp-in-the-grip-of-dynasty

वंशवाद की दीमक की चपेट में भाजपा

गनीमत यह है कि भाजपा में कम से कम ऐसा तो फिर भी नहीं होगा कि इन लोगों के मांगे गए टिकट पार्टी दे ही देगी। लेकिन ताज्जुब यह है कि संघ के ऐसे संस्कारी स्वयंसेवक सत्ता का सुख भोगने के बाद आखिर अपनी पार्टी और संघ के संस्कारों को कैसे भूला बैठे? ऐसे कई नाम हैं, जो बता रहे हैं कि किसी समय वंशवाद के लिए कांगे्रस को सोते-जागते कोसने वाली इस पार्टी ने कैसे इसी मामले में परम्पराएं ताक पर रखने के क्रम को बढ़ाना जारी रखा है। भाजपा में नेताओं के परिवार में कई लोग आगे आए हैं लेकिन यह तब ही संभव हुआ है जब उन्होंने लंबा राजनीतिक सफर पार्टी के भीतर तय किया है। दीपक जोशी, विश्वास सारंग, राजेन्द्र पांडे इसके उदाहरण कहे जा सकते हैं तो सुरेन्द्र पटवा को अपवाद की श्रेणी में रखा जा सकता है। हालांकि बाद में भाजपा के निर्णयों में कई बार यह साफ परिलक्षित हुआ है कि इस पार्टी ने वंशवाद को एक तरह से स्वीकार कर लिया है। किसी विधायक या सांसद की मृत्यु हुई तो टिकट परिवार में ही किसी को देने की परम्परा अब भाजपा में आम हो गई है। ऐेसे ढेर सारे उदाहरण भाजपा में है। इस ने परिवार में टिकट मांगने वाले नेताओं को प्रोत्साहित तो किया ही है। read more  आगे पढ़ें

bhopal-seat-should-not-be-scared-outsiders-should-

भाजपा में भोपाल सीट को लेकर मचा घमासान, नहीं चाहिए बाहरी प्रत्याशी

बाहरी नेता को भोपाल से टिकट दिए जाने के खिलाफ राजधानी के नेता लामबंद हो गए हैं। सारे नेताओं ने एक साथ मिलकर तय किया कि बाहरी प्रत्याशी पार्टी ने थोपा तो वे विरोध करेंगे। इस अवसर पर गौर ने कहा कि टिकट पर पहला हक सांसद आलोक संजर का है। इसके बाद फिर महापौर आलोक शर्मा का हक बनता है। उन्होंने कहा कि पार्टी टिकट देगी तो मैं भी चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं। उधर, पूर्व सीएम गौर की चौरसिया समाज के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात भी हुई। इसे गौर ने गैर राजनीतिक बताया। इस दौरान नाथ और गौर की एकांत में दस मिनट चर्चा भी हुई। गौर ने कहा कि दमोह में देवेंद्र चौरसिया के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से समाज नाराज है।  आगे पढ़ें

young-voters-in-madhya-pradesh-will-decide-which-p

मध्यप्रदेश में युवा मतदाता तय करेंगे किस पार्टी के सिर पर होगा जीत का सेहरा

प्रदेश में युवा मतदाताओं की संख्या कुल मतदाताओं में आधे से भी ज्यादा है। 20 से 39 साल के मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक दो करोड़ 69 लाख से ज्यादा है। 18 से 19 साल के मतदाता भी 13 लाख 60 हजार से अधिक हैं। यह संख्या अभी और बढ़ेगी, क्योंकि नामांकन दाखिले की अंतिम तारीख से दस दिन पहले तक नाम जुड़ने का सिलसिला चलता रहेगा। प्रदेश में कुल पांच करोड़ 14 लाख 67 हजार 980 मतदाता हैं। इनमें 65 हजार 960 सर्विस वोटर भी शामिल हैं। आयु समूह के हिसाब से देखा जाए तो सबसे ज्यादा मतदाता 20 से 29 साल के हैं। इनकी संख्या एक करोड़ 37 लाख 79 हजार 535 है। इसके बाद 30 से 39 साल के मतदाता आते हैं, जिन्हें युवा की श्रेणी में रखा जाता है।  आगे पढ़ें

chhattisgarh-bjp-will-not-give-ticket-to-current-m

छत्तीसगढ़ में भाजपा मौजूदा सांसदों को नहीं देगी टिकट, सभी चेहरे होंगे नए

प्रत्याशी चयन के मामले में छत्तीसगढ़ में भाजपा कांग्रेस और बसपा दोनों से ही पिछड़ गई है। कांग्रेस ने शनिवार की रात को पहले और दूसरे चरण की एक-एक समेत राज्य की आरक्षित सभी पांचों सीटों के लिए प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। वहीं, बसपा ने भी मंगलवार को अपने छह उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया है। नवंबर- दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जबरदस्त मात खा चुकी भाजपा को अब लोकसभा चुनाव में भी एंटी इंकम्बेंसी का डर सता रहा है। इसी वजह से प्रत्याशी चयन को लेकर पार्टी बेहद सतर्क है। कई स्तरों पर विचार मंथन के बाद प्रदेश भाजपा की तरफ से आलाकमान को संभावित नामों की सूची सौंपी गई है। इसमें हर सीट से एक-एक नया नाम है।  आगे पढ़ें

bjp-president-amit-shahs-poll-will-decide-the-tick

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का सर्वे तय करेगा नेतापुत्रों और परिजनों का टिकट

प्रदेश भाजपा में नेता पुत्रों को टिकट दिए जाने के नाम पर बवाल मचा हुआ है। कई दिग्गज नेताओं ने खुलकर कहा कि किसान का बेटा किसानी करता है तो नेता का बेटा नेतागिरी नहीं करेगा तो क्या घास काटेगा। उन्हीं नेताओं के बयान आ रहे हैं, जिनके पुत्र या परिजन टिकट की दौड़ में शामिल हैं। पार्टी ने सार्वजनिक तौर पर तो इस बारे में अपनी नीति जारी नहीं है पर भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि अब पार्टी का रुख इस मामले में थोड़ा नरम पड़ गया है। पार्टी नेताओं की बात पर भरोसा किया जाए तो सिर्फ उन नेतापुत्रों को टिकट मिल सकती है, जिनका नाम पार्टी अध्यक्ष द्वारा कराए गए सर्वे में दावेदार के रूप में आया है।  आगे पढ़ें

bjp-high-court-will-decide-sushma-swarajs-successo

भाजपा हाईकमान तय करेगा सुषमा स्वराज का उत्तराधिकारी, साधना सिंह भी दौड़ में

पार्टी सूत्रों की मानें तो विदिशा सीट से किसी बड़े नेता को भी उतारा जा सकता है। ऐसे हालात न बनने पर स्थानीय प्रत्याशी को पार्टी टिकट देगी। सूत्रों का कहना है कि विदिशा के लिए पार्टी राघवजी की बेटी ज्योति शाह को टिकट देने के पक्ष में नहीं है। दूसरे बड़े नेता करण सिंह वर्मा विधायक बन गए, इसलिए उनकी विदिशा लोकसभा चुनाव में रुचि नहीं रही। वहां से सांसद रहे रामपाल सिंह भी लड़ने को तैयार नहीं हैं।  आगे पढ़ें

discussion-of-non-bjp-general-body-not-even-starte

2019 के लिए शुरू भी नहीं हो पाई गैर भाजपाई महागठबंधन की चर्चा

लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा ने गठबंधन के मुद्दे पर कांग्रेस को बात शुरू करने का मौका ही नहीं दिया। विधानसभा चुनाव के दौरान वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव ने इसकी चर्चा शुरू की थी। उस वक्त महागठबंधन को लेकर जो दावे किए गए थे, लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा सिरे ही नहीं चढ़ पाया।  आगे पढ़ें

Previous 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10  ... Next 

प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति