होम गोपाल भार्गव
gopaal-bhaargav-ka-bada-bayaan-kaha-phir-modee-pee

गोपाल भार्गव का बड़ा बयान, कहा- फिर मोदी पीएम बने तो 7 दिन के अंदर गिर जाएगी कमलनाथ सरकार

भाजपा नेता गोपाल भार्गव ने कहा कि कांग्रेस सरकार की कुंडली कुंभ में ज्योतिषियों को दिखाई है। ज्योतिषों का कहना है कि सरकार की कुंडली ठीक नही है, ज्यादा दिन नही चलेगी। दरअसल, नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद गोपाल भार्गव गुरुवार को पहली बार दमोह पहुंचे थे, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया।  आगे पढ़ें

neta-pratipaksh-ne-vis-adhyaksh-par-lagaaya-paksha

नेता प्रतिपक्ष ने विस अध्यक्ष पर लगाया पक्षपात का आरोप, कहा- जाएंगे राष्ट्रपति के पास

शीतकालीन सत्र संपन्न होने के बाद नेता प्रतिपक्ष भार्गव के साथ चौहान एवं डॉ. शर्मा प्रेस से मुखातिब थे। उन्होंने आरोप लगाया कि संसदीय इतिहास में यह काला दिन था, लोकतांत्रिक संस्थाओं का कत्लेआम किया जा रहा है।  आगे पढ़ें

ab-tunakamijaajee-se-parahej-karen-bhaargav

अब तुनकमिजाजी से परहेज करें भार्गव

पूरी तरह अतीत के कब्रिस्तान में दफन इस मामले का जिक्र यकीनन सोद्देश्य किया गया है। इसमें बुराई भी नहीं है। सबको याद आना चाहिए कि भार्गव वाकचातुर्य के फेर में ऐसा कुछ कह गए थे कि तत्कालीन सुंदरलाल पटवा सरकार की खाट खड़ी हो गयी थी। इस लिहाज से यह भी याद किया जा सकता है कि इस कांड के कई साल बाद भार्गव ने एक महिला विधायक के लिए ‘मियां-बीवी राजी...’ जैसी बात कहकर एक और हंगामे का सूत्रपात कर दिया था।  आगे पढ़ें

mp-vis-upaadhyaksh-chunaav-congress-pratyaashee-he

एमपी विस उपाध्यक्ष चुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी हीना कावरे ने भरा नामांकन, जगदीश देवड़ा भाजपा उम्मीदवार

कांग्रेस की ओर से हिना कावरे ने डिप्टी स्पीकर पद के लिए नामांकन भर दिया है। इसी बीच बीजेपी ने भी ऐलान किया है कि वह भी इस पद के लिए अपना प्रत्याशी उतारेगी। भाजपा नेता और विधायक नरोत्तम मिश्र ने कहा है कि नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने बैठक बुलाई है। और नेता प्रतिपक्ष बीजेपी उम्मीदवार के नाम का ऐलान करेंगे। जानकारी के अनुसार बीजेपी विधायक जगदीश देवड़ा इस पद के प्रत्याशी हो सकते हैं।  आगे पढ़ें

kaleeram-ka-phat-gaya-dhol

कालीराम का फट गया ढोल

अब जब लड़ने का फैसला कर ही लिया था तो हारने से क्या डरना था। कांग्रेस ने शुरूआत बेईमानी से की लेकिन लगता है जैसे कुश्ती नूरा थी। क्योंकि कांग्रेस बाद में पांचवा प्रस्ताव भी मानने को तैयार थी, लेकिन भाजपा ने सदन से बाहर जाने का फैसला शायद पहले ही कर लिया था। यह तो परसों रात ही तय हो गया था कि कांग्रेस के पास 121 सदस्यों के समर्थन की पुख्ता व्यवस्था है। ऐसे में भाजपा को जगहंसाई कराने से बचना चाहिए था। उसने कल निर्णय लिया कि इस पद के लिए चुनाव कराएगी। फिर ऐनवक्त पर पार्टी ने बहिर्गमन किया तो क्या उसका भी डर नहीं था कि वोटिंग होने की सूरत में उसके ही कुछ सदस्य कांग्रेस के प्रत्याशी का समर्थन कर सकते हैं? इसलिए अपनी जांघ उघाड़कर दिखने की प्रक्रिया से बचने के लिए उसके सदस्यों को सदन से बाहर का रुख करना पड़ा? इससे बेहतर तो यही होता कि राज्य की परम्परा के अनुरूप अध्यक्ष पद पर सत्तारूढ़ दल का विधायक चुनने दिया जाता और उपाध्यक्ष पद सम्माजनक तरीके से भाजपा के खाते में आ जाता। पर डरी हुई कांग्रेस ने पहले से ही उपाध्यक्ष का पद खुद के पास रखने का फैसला किया हुआ था। उपाध्यक्ष कोई बहुत निर्णायक भूमिका में नहीं रहता है लेकिन जब रोज के ही टकराव सामने दिख रहे हैं तो सत्तापक्ष के पास इसके अलावा रास्ता भी बाकी नहीं था। इसलिए मध्यप्रदेश में सत्तापक्ष और विपक्ष फिलहाल दोनों एक दूसरे से डरे हुए नजर आ रहे हैं।read more  आगे पढ़ें

Previous 1 Next 

प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति