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चुनावी सभा में बोलीं स्मृति, कहा- किसानों का कर्ज तो माफ नहीं हुआ पर गरीबों को नोटिस जरूर दिए गए

ईरानी ने कहा मैदानी जंग में अपनी सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहे उस नेता का नाम ही नरेंद्र मोदी है। कांग्रेस के नेता थोड़े ही है, जो अपनी ही संसदीय सीट छोड़कर भाग गए। नेता वो है जो प्रभु के प्रति आस्था रखे, वो नहीं जो अयोध्या तक जाए और रामलला के सामने शीश ही नहीं झुकाए, क्योंकि कांग्रेस का वोटर नाराज हो जाएगा। मोदी ही देश का वो नेता है जिसने पाकिस्तान में सेना भेजकर मुंहतोड़ जबाब दिया और अभिनंदन शब्द का अर्थ समझाया। सभा में पूर्व मंत्री दीपक जोशी, प्रदेश किसान मोर्चा के रणवीरसिंह, पूर्व मंत्री रुस्तमसिंह, विधायक आशीष शर्मा, पहाड़सिंह कनोजिया, गोपीकृष्ण व्यास, महेश दुबे, नारायण व्यास सहित अनेक नेता उपस्थित थे।  आगे पढ़ें

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पूर्व राष्ट्रपति ने कहा- देश की 60 फीसदी संपत्ति 1 प्रतिशत लोगों के हाथ में होना चिंताजनक

मुखर्जी के मुताबिक- 2005-06 के बाद के दशक में 27 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आ चुके हैं। देश में गरीबी की दर पिछली अवधि में करीब आधी हो गई है, जो सकारात्मक पक्ष है। 26.9 करोड़ लोग अभी भी गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं, यह चिंता की बात है। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि फायदे के लिए जो लोग धन कमाते हैं, इसी के चलते असमानता पैदा होती है। उद्योगपति-नीति निर्माता केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं बल्कि रोजगार सृजन और बड़ी संख्या में लोगों के लिए मौके मुहैया कराने के लिए आगे आएं।  आगे पढ़ें

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राहुल की स्कीम पर वित्तमंत्री का वार, कहा- योजनओं के नाम पर कांग्रेस करती है छल-कपट

जेटली ने मनरेगा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मनरेगा में 40 हजार करोड़ रुपये साल का खर्च करने का वादा था, और करते थे 28 हजार करोड़। और यह पैसा भी केंद्र से राज्य, राज्य से जिला और इस बीच कई कड़ियों से होकर गुजरता था। गरीब को कितना पैसा मिलता था इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में भी किसानों का कर्ज माफ करने की बात कही। कर्नाटक में इस मद में 2600 करोड़ रुपये खर्च किए, मध्यप्रदेश ने 3000 करोड़ रुपये और पंजाब ने 5000 करोड़ रुपये खर्च किए। कांग्रेस का भरोसा सिर्फ चुनावी नारे देने का रहा है, संसाधन देने का नहीं।  आगे पढ़ें

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कांग्रेस एयर स्ट्राइक की ढूढ़ रही काट, देश के गरीब परिवारों को देगी 6000 रुपए प्रतिमाह

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, 'इसे लेकर पूरा कैलकुलेशन कर लिया गया है। इसके वित्तीय प्रभावों का भी आकलन कर लिया गया है। यह पूरी तरह से उपलब्ध हो जाएगी। इस स्कीम को अच्छे से चलाया जा सकता है।' पार्टी को उम्मीद है कि इस घोषणा से बालाकोट स्ट्राइक के बाद जारी बीजेपी के आक्रामक कैंपेन से निपटा जा सकेगा। कांग्रेस को लगता है कि केंद्र सरकार को नौकरियों की कमी और खेती के संकट पर घेरा जा सकता है। हालांकि बीजेपी राष्ट्रवाद को उभारकर इन मुद्दों को दबाने की कोशिश में है।  आगे पढ़ें

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लोकसभा चुनाव: गाय के साथ-साथ किसान, युवा और गरीब पर फोकस करेगी नाथ सरकार

सरकार ने 450 करोड़ रुपए का बंदोबस्त कर एक हजार गौ-शालाओं के निर्माण का एलान किया। मुख्यमंत्री कमलनाथ गौशाला फंड जुटाने के लिए कारपोरेट घरानों से संपर्क स्थापित कर उनके सीएसआर का फंड गौ-माता के लिए दान करने का आग्रह भी करने वाले हैं। 55 लाख तादाद वाले किसानों के बड़े समूह के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दो लाख रुपए तक के ऋ ण माफ करने का फैसला पहले ही ले लिया था।  आगे पढ़ें

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मप्र कैबिनेट: हर वर्ग पर मेहरबान नाथ सरकार, युवाओं को 100 दिन के एवज में मिलेगा 13 हजार भत्ता

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह ने बताया कि शहरी क्षेत्र के 21 से 30 साल के युवाओं का पंजीयन 10 फरवरी से शुरू होगा। सालभर में युवाओं को सौ दिन का रोजगार दिया जाएगा। शुरूआती दस दिन युवाओं की इच्छानुसार प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके बाद 90 दिन उन्हें प्रशिक्षण लेने के साथ काम करना होगा। इसके एवज में उन्हें चार हजार रुपए महीना मिलेगा।  आगे पढ़ें

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एलपीजी बिजनेस में आ सकती है क्रांति, जरूरत के हिसाब से खरीद सकेंगे गैस, सरकार कर रही विचार

पेट्रोलियम मंत्री प्रधान ने एक दूसरा संकेत यह दिया कि आने वाले दिनों में देश में बायो मास का इस्तेमाल उज्ज्वला योजना के तहत दिए जाने वाले गैस सिलेंडर में गैस भरने के लिए किया जा सकता है। यह न सिर्फ सस्ता होगा, बल्कि इससे तेल कंपनियों की लागत भी कम आएगी। दरअसल, प्रधान उज्ज्वला योजना के अगले चरण को लेकर सरकार की भावी योजनाओं और सोच के बारे में बता रहे थे।  आगे पढ़ें

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बजट-2019: मेगा पेंशन की घोषणा, 60 साल के बाद तीन हजार हर महीने मिलेगी पेंशन

लोकसभा चुनाव से पहले अपने अंतिम बजट मोदी सरकार ने गरीब कामगारों को बड़ा तोहफा दिया है। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने बजट 2019 में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए मेगा पेंशन योजना की घोषणा की है। प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना का ऐलान करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि 100 रुपये के मासिक योगदान पर कामगारों को 60 साल की आयु के बाद हर महीने 3000 रुपये पेंशन मिलेगी।  आगे पढ़ें

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राहुल गांधी का एक और वादा: कहा- अगर 2019 में कांग्रेस सत्ता में आई तो हर गरीब को देंगे न्यूनतम आय की गारंटी

केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा, 'पीएम मोदी और बीजेपी दो भारत बनाना चाहते हैं- एक राफेल घोटाला और उद्योगपति मित्रों का और दूसरा गरीब किसानों का।' फसल बीमा योजना पर सवाल उठाते हुए राहुल ने कहा, 'क्या कारण है कि किसान अपना पैसा बीमा कंपनी को देता है और ओला पड़ने पर किसान को उसका पैसा नहीं मिलता है। पूरा फायदा अनिल अंबानी की कंपनी को जाता है।' कर्जमाफी योजना का जिक्र करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'जब हम विपक्ष में थे, तब भी हम किसानों का कर्ज माफ करने की बात करते थे और सरकार में पूछते थे तो सरकार कहती थी कि हमारे पास पैसा नहीं है और हम ये काम नहीं कर सकते। हिंदुस्तान के चौकीदार के पास छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए 6000 करोड़ रुपये नहीं हैं लेकिन अनिल अंबानी के लिए 30,000 करोड़ रुपये हैं।'  आगे पढ़ें

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छत्तीसगढ़: निगम के फरमान से हलाकान कर्मचारी, बिन रहे हैं गली-मोहल्लों में पड़ी पॉलीथिन

रायपुर। नगर निगम मुख्यालय से जारी एक आदेश इन दिनों किसी के गले नहीं उतर रहा है। इस अजीबो-गरीब आदेश ने कर्मचारियों को हलाकान करके रख दिया है। जो कर्मचारी किसी दूसरे कार्यों में अपनी भूमिका अदा कर रहे थे उनसे रोजाना गली-मोहल्लों, खाली प्लॉट में पड़ी एक-एक पॉलीथिन बिनवाई जा रही है। ऐसा आदेश पहली बार हुआ है। जबकि होना यह चाहिए कि निगम उन तमाम स्रोतों को बंद करवाए, जहां से रोजाना कई टन पॉलीथिन सीधे बाजार में आ रही है। खुले आम मालवीय रोड, बंजारी रोड समेत शहर के कई बड़े बाजारों में बिक रही है। निगम के आठ जोनों में से एक जोन भी एक दिन बाजारों में उतरे, कार्रवाई करे तो अपने आप बिक्री और उत्पादन बंद हो जाएगा। सवाल यह है कि आखिर निगम पॉलीथिन बेचने वाले दुकानदारों पर सख्ती क्यों नहीं कर रहा है? क्यों इन्हें बेचने की छूट देकर रखी है? कार्रवाई कभी-कभार होती है और फिर बंद कर दी जाती है। पूर्व में यह कहा गया था कि पॉलीथिन कोई नहीं ले रहा है, जबकि सामान्य सभा में आदेश पारित हो चुका है कि इसे सीमेंट बनाने वाली कंपनी को दिया जाएगा। इससे निगम को राजस्व मिलेगा। बता दें कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 को लेकर तैयारियां जारी हैं, कवायद उसके तहत ही है, लेकिन क्रियान्वयन गलत है। 1 दिसंबर शनिवार को पहली बार निगम अमला पॉलीथिन बीनने के लिए उतरा। पहले दिन 70 बोरी और रोजाना औसत 50 बोरी पॉलीथिन इकट्ठी की जा रही है। गुरुवार को 84 बोरी पॉलीथिन कचरा एकत्र किया गया। निगम रोजाना इससे संबंधित प्रेस रिलीज भी जारी कर रहा है। कहा ये जा रहा है कि कार्रवाई करने के लिए भी अफसर नहीं है, चुनावी ड्यूटी में लगे हैं। जुर्माने का प्रावधान- सामग्री बेचने के लिए प्लास्टिक कैरी बैग देना- 100 रुपये, दोबारा पकड़ने जाने पर 1000 रुपये। सड़क, नाली में प्लास्टिक फेंकना- 100 रुपये, दोबारा पकड़े जाने पर 1000 रुपये। कुल कचरे का सात फीसद होती है पॉलीथिन- रायपुर के 70 वार्ड से अभी रोजाना 450 टन कचरा उठाया जाता है। यह कचरा घरों, दुकानों, मॉल, रेस्त्रां, होटलों से लेकर नाले-नालियों से निकलता है, जो सरोना ट्रेंचिंग ग्राउंड में डंप किया जाता है। अनुमान के तहत इसमें करीब सात फीसद पॉलीथिन होती है। दबाव बढ़ेगा, निगम के राजस्व में भी होगा इजाफा-निगम अगर सख्ती दिखाए तो पॉलीथिन का उत्पादन करने वालों पर दबाव बनेगा, ये उत्पादन बंद करेंगे। इनकी मशीनों को सीज करने का प्रावधान है। कार्रवाई से निगम के राजस्व में भी अच्छा खासा इजाफा होगा। पिछली बड़ी कार्रवाई सालभर पहले वीआइपी चौक पर एक घर में संचालित फैक्टरी पर हुई थी। वहां पॉलीथिन बैग को बनाया जा रहा था। इसके बाद एक भी बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।   आगे पढ़ें

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