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महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना का जलवा रहेगा कायम, मिल सकती है 39 सीटें

रिपब्लिक सी-वोटर सर्वे के अनुसार भाजपा को 34 और कांग्रेस को 14 सीटें मिल रही हैं। वहीं सुदर्शन न्यूज के सर्वे में भाजपा को 39 और कांग्रेस को 8 सीट मिल रही हैं, 1 सीट अन्य को मिल रही है। एबीपी न्यूज - निलसन के सर्वे में भाजपा को 34 और कांग्रेस को 14 सीट मिल रही हैं। आज तक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में महाराष्ट्र में एनडीए को 38 से 42 सीटें मिली हैं। वहीं यूपीए को 6 से 10 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।  आगे पढ़ें

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एग्जिट पोल्स के बाद कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों में मची हलचल, ईवीएम उठने लगे सवाल

एग्जिट पोल्स को दिल्ली कांग्रेस ने सिरे से नकार दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता जितेंद्र कोचर का कहना है कि यह बहुत जल्दी है। नतीजे तो 23 को आएंगे, तब देखेंगे। कोचर ने गत 2004 के एग्जिट पोल का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी भाजपा इंडिया शाइनिंग कर रही थी, एग्जिट पोल भी भाजपा को जिता रही थी। लेकिन हुआ क्या? एग्जिट पोल को धता बताते हुए कांग्रेस ने सरकार बनाई। इस बार भी ऐसा ही होगा। टीवी चैनलों के एग्जिट पोल थोथा साबित होगा और कांग्रेस कहीं अधिक सीटें हासिल करेगी। उन्होंने कहा तीन दिन बाद परिणाम सामने आ जाएगा। अभी कुछ भी कहना जल्दी होगा। कांग्रेस इस एग्जिट पोल को सिरे से नकारती है।  आगे पढ़ें

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पश्चिम बंगाल में चरम पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, भगवानों के भी बदल रहे नाम

चुनावों के दौरान कई जगहों पर बीजेपी नेताओं ने कुछ स्थानीय पुजारियों की मदद से बोनबीबी की बोनदेबी के नाम से पूजा की और उनके बारे में बयान दिए। जंगल की देवी कही जाने वाली बोनबीबी को बोनदेबी बताना पूरी तरह से उनकी अंतसार्मुदायिक छवि के विपरीत है। हिंदू ही नहीं बल्कि मुसलमानों की भी समान रूप से बोनबीबी में आस्था मानी जाती रही है।  आगे पढ़ें

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रतलाम से भूरिया को रोकने भाजपा ने की नाकेबंदी, आदिवासी मतदाता खामोश

राजनीति में आने से पहले डामोर प्रदेश शासन में कई अहम पदों पर रहे हैं। लोकसभा से जुड़ी तीन जिलों की आठों विधानसभा आलीराजपुर, जोबट, झाबुआ, थांदला, पेटलावद, रतलाम ग्रामीण, रतलाम शहर, सैलाना में प्रचार-प्रसार का अधिक शोरगुल नहीं सुनाई दिया है, लेकिन दोनों दलों के प्रत्याशी, पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता, परिजन और समर्थक अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं को रिझाने में जुटे रहे हैं।  आगे पढ़ें

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उज्जैन सीट बनी भाजपा के लिए चुनौती, विस चुनाव में मिली जीत से कांग्रेस उत्साहित

संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से कुछ पर जातीय समीकरण भी हावी हैं। इसलिए दोनों प्रमुख दल हर तरह राजनीतिक दांव खेल रही है। यहां की 63.49 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 36.51 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। 26 फीसदी आबादी यहां की अनुसूचित जाति के लोगों की है और 2.3 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति की है।  आगे पढ़ें

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हिंसा से बंगाल की राजनीति का कड़वा सच आया सामने, सरकार बदलने के बाद भी हावी रहे अराजक तत्व

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में ममता बनर्जी के लिए काफी कुछ दांव पर है। ममता बनर्जी के सामने बीजेपी के आक्रामक उभार से निपटते हुए अपना किला बचाने की चुनौती है। कोलकाता और उसके आसपास के इलाके तृणमूल के समर्थन वाले मान जाते रहे हैं, लेकिन अमित शाह के रोड शो में जिस तादाद में लोग जुटे थे, उससे यह लड़ाई उतनी भी आसान नहीं लगती। इस रविवार को पश्चिम बंगाल की 9 लोकसभा सीटों पर चुनाव होना है। इन सीटों में से एक पर भी 2014 के आम चुनाव में बीजेपी को जीत नहीं मिली थी। सीपीएम को उम्मीद है कि वह जाधवपुर लोकसभा सीट में कड़ी टक्कर दे पाएगी, जबकि उसे डायमंड हार्बर में दूसरे नंबर पर रहने की उम्मीद है। यहां से ममता बनर्जी के भतीजे चुनावी समर में हैं।  आगे पढ़ें

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स्मृति का तंज, कहा- कांग्रेस की महामंत्री वोट पाने अमेठी में नमाज अदा करती थी, अब महाकाल आई हैं

करीब 20 मिनट के भाषण में उन्होंने कहा कि कांग्रेस में नेता वही, जिसके नाम के पीछे गांधी सरनेम है। कांग्रेस पार्टी का नेता वही, जो मात्र गांधी परिवार में जन्मा है। इसीलिए कांग्रेस के अध्यक्ष इस प्रदेश में आकर प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम भूल जाते हैं। यह राहुल गांधी के संस्कारों का परिचय है। यही कांग्रेस की संस्कृति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वर्षों से यही धारणा रही है कि गांधी परिवार का कांग्रेस पर मालिकाना हक है। वर्षों से कांग्रेस में यही प्रथा रही है कि बड़े से बड़े नेता उम्र और ओहदे में बड़े हों, लेकि न अगर आपने गांधी परिवार में जन्म लिया तो आपका जन्मसिद्ध अधिकार है उस नेता को अपमानित करना।  आगे पढ़ें

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कुछ तो वहां जरूर है, पत्थर जहां गिरा

1891 वो साल है जिस साल विद्यासागर का देहांत हुआ। तब न राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कोई अस्तित्व था और न ही भाजपा नामक किसी शै का उद्भव हुआ था। यह कांग्रेस के भी शुरूआती दिन थे। यह दिवंगत पुण्यात्मा तो परसों से पहले कभी भी ममता बनर्जी की आस्था का केंद्र भी नहीं थी। तो फिर अचानक क्या हो गया कि इनकी प्रतिमा टूटी और आरोप-प्रत्यारोप का क्रम शुरू हो गया! ऐसा लगता है कि अधिकांशत: प्रतिमाओं का महत्व उनके तोड़े जाने के बाद ही समझ आता है। त्रिपुरा में व्लादिमीर लेनिन मूर्ति बने खड़े थे। दशकों से उनका प्रमुख उपयोग एक ही था। उनके जरिये वामपंथी वहां अपनी सत्ता होने का भाव जता देते थे। ठीक वैसे ही, जैसे जंगल में शेर एक विशेष परिधि में लघुशंका करके वहां अपना अधिकार घोषित कर देता है। भाजपा सत्ता में आयी और राज्य से वामपंथी गुरूर की तरह ही लेनिन महोदय भी तोड़ दिये गये। परसों से जैसे ममता बिफरी हुई हैं, वैसे ही त्रिपुरा में वामपंथी लाल-पीले हो गये। गोया कि मामला अफगानिस्तान के बमियान में बौद्ध प्रतिमाओं को ढहा दिया जाने वाला हो। चलिये त्रिपुरा में तो यह सत्ता परिवर्तन का असर था, लेकिन पश्चिम बंगाल में भला भाजपा को विद्यासागर से क्या आपत्ति हो सकती है? विद्यासागर समाज सुधारक थे, शिक्षाविद् थे, बंगाल के रूढ़िवादी समाज में विधवा विवाह उनकी बदौलत स्थान पा सका। यानि वे उनकी ऐसी कोई पहचान अस्तित्व में नहीं है जिसमें उन्हें धर्मनिरपेक्ष या साम्प्रदायिक जैसा कोई तमगा दिया जा सकता हो।read more  आगे पढ़ें

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भाजपा और कांग्रेस के लिए वर्चस्व की लड़ाई का नया गढ़ बना रायबरेली

दरअसल, इस घटना के पीछे जाएं तो यह वहां से शुरू होती है, जबसे कांग्रेस एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने बीजेपी का दामन थामा था। यह दिनेश प्रताप सिंह वही हैं, जिन्हें एक समय कांग्रेस ने बहुत ताकत दी। जिस समय अखिलेश सिंह (कांग्रेस विधायक अदिति सिंह के पिता) कांग्रेस से अलग होकर अलग सियासी राह पर चल रहे थे तो कांग्रेस ने दिनेश प्रताप सिंह को ताकत दी। उन्हें एमएलसी बनाया। दिनेश के भाई को हरचंदपुर सीट से टिकट दिया। वह मौजूदा विधायक हैं।  आगे पढ़ें

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कांग्रेस अध्यक्ष प्रचार के लिए अब नहीं आएंगे इंदौर, प्रियंका के रोड शो के बाद कार्यक्रम किया रद्द

शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल के अनुसार क्योंकि प्रियंका इंदौर आ गई हैं, इसलिए अब राहुल इंदौर में प्रचार करने नहीं आएंगे। असल में दोनों की पूरे देश की सभी लोकसभा सीटों से प्रचार के लिए मांग हो रही है। एक ही शहर में दोनों स्टार प्रचारक समय नहीं देते हैं, यह नीति तय है। 16 मई को भी उनकी सभा की बात चली थी लेकिन ऐसा आयोजन नहीं है। 16 मई को मुख्यमंत्री कमलनाथ इंदौर आ रहे हैं। वे सांवेर में जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद शाम को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में एक आयोजन होगा। इसमें शहर के प्रबुद्धजन, कारोबारी, सीए, प्रोफेशनल्स व विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री सभी से सीधी चर्चा करेंगे। चुनाव को लेकर भी बात होगी। 15 मई को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी इंदौर आ रहे हैं।  आगे पढ़ें

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