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बैंड बाजे की ट्रेनिंग पर कमलनाथ की सफाई, कहा- कम पढ़े-लिखे लोगों को देना चाहते हैं रोजगार

कमलनाथ ने कृषि क्षेत्र की नीति को त्रुटिपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि 20 साल पहले कम कृषि उत्पादन को ध्यान में रखकर जो नीति बनाई जाती थी, उसी नीति पर आज काम चल रहा है। जबकि आज प्रदेश में ज्यादा उत्पादन हो रहा है और कृषि नीति में इसके लिए कोई प्रावधान नहीं है। मंडियों के बाहर किसानों की फसलों से भरे ट्रकों-ट्रैक्टर ट्रॉलियों की लंबी लाइन लगी रहती है। किसान भटकता रहता है। इसलिए ऐसी नीति तैयार करना होगी, जिसमें ज्यादा उत्पादन की स्थिति में किसान को राहत मिल सके।  आगे पढ़ें

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मध्यप्रदेश से कांग्रेस ने की 9 उम्मीदवारों की घोषणा, भोपाल से दिग्गी होंगे मैदान में

विधानसभा चुनाव में हारे पूर्व विधायक मधु भगत को बालाघाट से प्रत्याशी बनाया है। भगत, कमलनाथ के निकट हैं। वहीं, भाजपा से विधायक रहीं प्रमिला सिंह को भी शहडोल की अनुसूचित जनजाति सीट से प्रत्याशी बनाया है। प्रमिला सिंह के पति आईएएस हैं और उन्हें पिछले दिनों ही चुनाव आयोग के निर्देश पर कलेक्टरी से हटाया गया है। इसके अलावा एक विधायक विक्रम सिंह नातीराजा की पत्नी कविता सिंह को खजुराहो लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। नातीराजा मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज चल रहे थे। उनकी नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया गया है। वहीं होशंगाबाद से शैलेंद्र दीवान को प्रत्याशी बनाया है। दीवान पूर्व मंत्री चंद्रभान सिंह दीवान के पुत्र हैं।  आगे पढ़ें

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सलमान के चुनाव संबंधी ट्वीट पर कांग्रेस ने दी सफाई, कहा- नहीं दिया आफर

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लोकसभा चुनाव की तारीखों के एलान से पहले फिल्म अभिनेता सलमान खान से बात की थी। इस बारे में सीएम ने पत्रकारवार्ता में बताया था कि सलमान को उनके मध्य प्रदेश से रिश्ते को याद कराया था और मध्य प्रदेश के विकास में उनका योगदान चाहा था। उन्हें मध्य प्रदेश में पर्यटन प्रमोशन के लिए काम करने का आफर भी दिया था। नाथ ने बताया था कि वे आठ अप्रैल से 18 अप्रैल तक मध्य प्रदेश में ही रहेंगे।  आगे पढ़ें

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मध्यप्रदेश: कांग्रेस में प्रत्याशी चयन को लेकर बैठक टली, अब शुक्रवार को होगा मंथन

मुख्यमंत्री कमलनाथ के रात को दिल्ली देर से पहुंचने और प्रभारी सचिवों में से भी कुछ ही उपलब्ध हो पाने से बैठक टाल दी गई। गुरुवार को होने वाली स्क्रीनिंग कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में चार प्रमुख शहरों सहित पांच सीटों को छोड़कर अन्य सभी सीटों पर एक बार फिर से चर्चा होने की संभावना है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और विदिशा लोकसभा क्षेत्रों के प्रत्याशी तय करने के लिए अधिकृत किए जाने के संकेत हैं।  आगे पढ़ें

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मैं चौकीदार हूं कैंपेन पर सीएम नाथ ने खड़े किए सवाल, कहा- मोदी किस तरह के चौकीदार हैं

कमलनाथ ने कहा कि पूरा देश जानता है कि नरेंद्र मोदी किस तरह के चौकीदार हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री दावा करते हैं कि उनके हाथों में देश सुरक्षित है, लेकिन यह दावा गलत है। छिंदवाड़ा पहुंचे कमलनाथ ने आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा हमले बीजेपी सरकार में देश में हुए हैं। अपने दो दिवसीय प्रवास पर छिंदवाड़ा आए कमलनाथ दिल्ली के लिए रवाना हो गए।  आगे पढ़ें

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दिग्गी ने कमलनाथ को दिखाया आइना, कहा- राहुल गांधी जहां से कहेंगे वहां से लड़ेंगे चुनाव

दिग्गी राजा ने कहा, 'मैं राघोगढ़ की जनता की कृपा से 1977 की जनता पार्टी लहर में भी लड़कर जीत कर आया था। चुनौतियों को स्वीकार करना मेरी आदत है। जहां से भी मेरे नेता राहुल गांधी कहेंगे मैं लोक सभा चुनाव लड़ने को तैयार हूं। नर्मदे हर।' इससे पहले कमलनाथ ने शनिवार को कहा कि उन्होंने दिग्विजय सिंह से आग्रह किया है कि यदि वह लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं तो कांग्रेस के लिए प्रदेश में कुछ कठिन सीटों में से एक पर वह चुनाव लड़ें।  आगे पढ़ें

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मध्यप्रदेश: प्रत्याशियों के चयन का मामला लटका, अब 20 के बाद होगा अंतिम फैसला

मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ रविवार रात छिंदवाड़ा से दिल्ली पहुंचे। वहां उन्होंने एआईसीसी के कुछ पदाधिकारियों से मुलाकात की। हालांकि मप्र के प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया, प्रभारी सचिव सुधांशु त्रिपाठी, हर्षवर्धन सपकाल जैसे नेता दिल्ली में मौजूद नहीं थे। सूत्र बताते हैं कि कमलनाथ के साथ छिंदवाड़ा से संभावित प्रत्याशी और उनके पुत्र नकुलनाथ भी वहां पहुंचे हैं।  आगे पढ़ें

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नाथ कर्ज उतारेंगे या मर्ज हटाएंगे ?

जो दिखाया जा रहा है वह यह है कि नाथ ने सिंह के लिए किसी कठिन मुकाबले की रूपरेखा खींच रखी है और यह भी कि दिग्विजय वही करेंगे, जो उनसे कहा जाएगा। हालांकि प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस की वापसी के बाद सिंह का यह कथन आसानी से गले नहीं उतरता है। वर्तमान मुख्यमंत्री की सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री, मैं चाहे ये करूं, मैं चाहे वो करूं, मेरी मर्जी, वाली भूमिका में ही दिखते हैं। इसलिए हाजमोला की भारी-भरकम खुराक के बावजूद सिंह की यह बात हजम नहीं हो पा रही कि वह किसी भी सीट से मुकाबले के लिए तैयार हैं। ऐसे में यही नजर आता है कि सिंह को सियासी वानप्रस्थ से पहले निरापद स्थान के तौर पर राजगढ़ से ही चुनावी मैदान में उतार दिया जाए। इस निर्णय की कांग्रेस के भीतर आलोचना होना तय है और तब नाथ के पास यह सुभीता होगा कि वह कह सकें कि दिग्विजय को पहले कठिन सीट की पेशकश की गयी थी, जिसके लिए उन्होंने कभी भी मना नहीं किया था। और राजगढ़ भी कठिन ही सीट है। कांग्रेस की सरकार और दिग्विजय सिंह का माइनस कर देंगे तो यह वो सीट है जिसने प्रदेश के बाहर से आए हुए जनसंघियों को भी गले लगाया था।read more  आगे पढ़ें

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कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में 17 लोकसभा सीटों पर तय किए प्रत्याशियों के नाम

राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की सीटों का अंतिम फैसला होने की वजह से गुना और राजगढ़ भी अन्य सीटों की तरह अधर में लटकी हैं। वहीं, केंद्रीय चुनाव समिति में अभी मध्यप्रदेश की सीटों पर चर्चा की शुरूआत नहीं हो सकी है। उधर, दिल्ली में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं मनमोहन सिंह बट्टी व गुलजार सिंह मरकाम की मुख्यमंत्री कमलनाथ से शुक्रवार को मुलाकात हुई जिसमें उन्होंने शहडोल और मंडला सीटों की मांग रखी। सूत्रों के मुताबिक मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों को लेकर अभी भी कांग्रेस नेताओं के बीच मंथन का दौर चल रहा है। शुक्रवार की दोपहर दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी ने प्रदेश प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया की गैर मौजूदगी में बैठक की। इसमें 17 सीटों पर सिंगल नाम तय कर लिए गए।  आगे पढ़ें

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किसलिए नाराज हैं वयोवृद्ध कांग्रेसी?

यकीनन यहां सवाल यह भी उठता है कि ऐसा होने के बावजूद मध्यप्रदेश में सिंधिया की जगह कमलनाथ और राजस्थान में पायलट की जगह अशोक गहलोत को क्यों मुख्यमंत्री बनाया गया? अजय माकन के स्थान पर दिल्ली इकाई की कमान शीला दीक्षित को क्यों सौंपी गयी? इसकी वजह भी साफ है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस ऐसे समय जीती, जबकि लोकसभा चुनाव सिर पर आ चुके थे। कई राज्यों में तेजी से जनाधार खो चुकी कांग्रेस यह जोखिम नहीं ले सकती थी कि बेहद तजुर्बेकार चेहरों को दरकिनार कर दिया जाए। गांधी को ऐसे मुख्यमंत्री चाहिए थे, जो अपने दीर्घ सियासी अनुभव की दम पर जीत का यह क्रम आम चुनाव तक बराकरार रख सकें। साफ है कि इस लिहाज से सिंधिया की तुलना में नाथ और पायलट के मुकाबले गहलोत समायानुकूल ज्यादा मुफीद पाये गये। जहां तक माकन का सवाल है, तो दिल्ली में बेहद कमजोर दशा में पहुंच चुकी पार्टी को उबारने के लिए उनकी जगह किसी समय की वाकई लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहीं दीक्षित को सामने लाना अवश्यंभावी हो चुका था।  आगे पढ़ें

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