होम कमलनाथ
political-warming-on-calling-godse-a-patriot-congr

गोडसे को देशभक्त बताने पर सियासत गरमाई, कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर हमले किए तेज

पूर्व मुख्यमंत्री एवं भोपाल से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने इस मामले में साध्वी पर राष्ट्रद्रोह का प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर द्वारा गोडसे को देशभक्त बताने के बाद संघ और भाजपा की वास्तविक विचारधारा व असली चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पल्ला नहीं झाड़ सकते, वो देश को बताएं कि भाजपा गांधी के साथ है या गोडसे के साथ।  आगे पढ़ें

the-meaning-of-this-huge-turnout

इस भारी भरकम मतदान के मायने

तो क्या यह मान लें कि मध्यप्रदेश में हो रही यह बम्पर वोटिंग राज्य सरकार के खिलाफ विशेषत: किसानों के गुस्से का नतीजा है? या फिर यह कमलनाथ सरकार ने जैसा वो दावा कर रही है कि संकल्प पत्र के जिन वचनों को उसने पूरा कर दिया है यह उसके प्रति लोगों का समर्थन है। लोगों में आक्रोश तो दनादन हो रही बिजली कटौती को लेकर भी है। भोपाल में जहां पांच दशक बाद मतदान प्रतिशत ने साठ का आंकडा पार किया है, वहां तो माना जा सकता है कि दिग्विजय सिंह और हिंदू आतंकवाद की प्रतीक साध्वी प्रज्ञा ठाकुर एक विषय हो सकती हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह भी है कि भोपाल लोकसभा के भी ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान ज्यादा बढ़ा है। खेती किसानी से ज्यादा वास्ता ग्रामीण आबादी का ही होता है।एकतरफा सोचना ठीक नहीं है। इसलिए यह तथ्य भी नहीं बिसराया जा सकता कि यह प्रतिशत मोदी सरकार के खिलाफ जनादेश वाला मामला भी हो सकता है। अनेकानेक मोर्चों पर यह सरकार भी असफल रही है। लेकिन मोदी की प्रति नाराजगी या समर्थन तो देश भर में एक जैसा ही होता, इसमें मध्यप्रदेश क्यों अलग जाता दिख रहा है? दिमाग पर बहुत अधिक जोर डालने के बावजूूद मामला नाथ या गांधी के बराबरी वाली नाराजगी का प्रतीत नहीं हो पाता। मध्यप्रदेश के संदर्भ में इसकी एक वजह नजर आती है। यहां पंद्रह साल बाद बनी कांग्रेस की सरकार से भाजपा-विरोधियों की अपेक्षाएं अनंत तक पहुंच गयी थीं। खासतौर पर दस दिन में कर्ज माफी की बात ने जनमत को सर्वाधिक प्रभावित किया था। read more  आगे पढ़ें

kamal-nath-in-shamgad-janabha-rally-on-shivraj-and

शामगढ़ सभा में कमलनाथ ने शिवराज और मोदी पर साधा निशाना

मोदी व शिवराज कलाकारी की राजनीति करते हैं। जनता अब उनकी कलाकारी समझ गई है। साढ़े 4 माह पहले उन्होंने शिवराज सरकार को उखाड़ फेंका। अब माेदी सरकार की बारी है। दोनों ही लोगों ने किसानों और युवाओं के साथ धोखा किया है। शिवराज कहते थे, मैं किसान का बेटा हूं, लेकिन उन्होंने कभी किसानों का कर्ज माफ नहीं किया। उन्होंने किसान के पेट पर लात और सीने में गोली मारी है।  आगे पढ़ें

rahul-gandhi-said-in-gwalior-shivrajs-brother-and-

ग्वालियर में बोले राहुल गांधी, कहा- शिवराज के भाई और चाचा का भी हुआ कर्ज माफ

बता दें कि राज्य में कांग्रेस की सरकार दावा कर रही है कि 21 लाख किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ हो चुका है, जबकि बीजेपी राज्य सरकार के दावे को झूठा बता रही है। इसी को लेकर गांधी ने जवाब दिया। गांधी ने कर्जमाफी का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ से कहा, ह्यवह सूची बताइए जो आप मुझे अपने सेल फोन पर दिखा रहे थे, उसमें किसके नाम हैं। इस पर कमलनाथ ने कहा कि चौहान के भाई रोहित सिंह चौहान और चाचा के लड़के का भी कर्ज माफ हुआ है। राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी के सत्ता में न लौटने का दावा किया, नरेंद्र मोदी लौट कर नहीं आ रहे, फ्लॉप शो खत्म, वह घड़ी गई, उनके चेहरे को देख लो, उनकी ऊर्जा को देख लो। उदास से हैं, वह हार रहे हैं चुनाव। इसलिए कांग्रेस को मध्य प्रदेश में पूरी ताकत लगानी है।  आगे पढ़ें

nath-angry-with-shivraj-or-rahul

नाथ का गुस्सा शिवराज से या राहुल से?

इस लोकसभा चुनाव के बीच पेशागत और कुछ निजी कारणों से भी कई बार देहाती इलाकों में जाना हुआ। हर जगह एक शिकायत मिली। कर्ज माफ न होने की। किसान इससे परेशान दिखे। मेरे कांग्रेसी मित्र भी आॅफ द रिकॉर्ड बातचीत में इस स्थित से शर्मिंदा और उलझन में भरे नजर आये। इसकी वजह केवल और केवल दो रहीं। पहली, राहुल गांधी की नादानी-मिश्रित व्यग्रता और दूसरी, कांग्रेस में उनके खिलाफ बोलने के साहस का अभाव। राहुल जानते थे कि दस दिन में कर्ज माफी किसी भी सूरत में संभव नहीं है। खासतौर से तब तो कतई नहीं, जब इस ऐलान को चट मंगनी, पट ब्याह की तर्ज पर किया जाए। कांग्रेसी हरकारों के सुर ऐसे ही थे, जैसे कि दस दिन में कर्ज माफी का प्रमाण पत्र हर किसान के हाथ में होगा। हरकारे मुतमईन थे कि राहुल गांधी ने कहा है तो यकीनन ऐसा करने के लिए उनके पास योजना भी होगी। लेकिन योजना तो केवल यह थी कि किसी तरह नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाया जाए।  आगे पढ़ें

karj-mafi

सरकार के कर्ज माफी के दावों की पोल खोलती खबर

बैंक का कर्जा नही चुकाने पर 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला को कुर्की का नोटिसबेटे को कैंसर होने पर महिला ने इलाज के लिए बैंक से 60 हजार का लोन लिया था। बेटे प्रेमचंद के इलाज में मोटी पूंजी खर्च करने के बाद भी अक्टूबर 2015 में उसकी मौत हो गई। इसके चलते कर्ज की राशि समय पर नहीं चुका पायी। नई सरकार ने वादा किया था कि 2 लाख तक का कर्ज माफ करेंगे। फिर भी सोमवार को बैंक ने कर्ज की राशि चुकाने के लिए नोटिस दे दिया। 15 दिन में 1 लाख 11 हजार रुपए नही चुकाने पर एफआईआर दर्ज कर संपत्ति की नीलामी की जाएगी।  आगे पढ़ें

kamalnaath-in-mandsaur

10 मई को मुख्यमंत्री कमलनाथ मंदसौर संसदीय क्षेत्र के दौरे पर

आगामी 10 को प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ मंदसौर संसदीय क्षेत्र में सिंगोली, कुकडेश्वर एवं शामगढ में नटराजन के समर्थन में करेगे जनसभाओ को संबोधित।  आगे पढ़ें

bjp-led-by-former-chief-minister-shivraj-singh-lan

बिजली कटौती के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा ने निकाली लालटेन यात्रा

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में बिजली संकट की स्थिति यह थी कि ग्रामीण इलाकों में कई घंटों तक बिजली नहीं आती थी। भाजपा द्वारा दिग्विजय सिंह पर "मिस्टर बंटाधार" का आरोप लगाने में भी बिजली कटौती को एक बड़ा कारण माना जाता रहा है। राजधानी में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं द्वारा आज निकाली गई लालटेन यात्रा नए इस विवाद को नए मुकाम पर पहुंचा दिया है।  आगे पढ़ें

after-the-lok-sabha-elections-the-state-government

लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश सरकार करेगी बड़े पैमाने पर प्रशासनिक सर्जरी, नतीजा बनेगा आधार

दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी को स्कूल शिक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों बड़े और महत्वपूर्ण विभाग हैं। आमतौर पर सामान्य प्रशासन की कार्मिक शाखा जिस प्रमुख सचिव के पास रहती है, उसके दूसरा काम नहीं सौंपा जाता है। इसी तरह मुख्यमंत्री सचिवालय में भी कुछ बदलाव हो सकता है। यहां पदस्थ अधिकारी भी यही अनुमान लगाकर बैठे हैं। यह भी संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के भरोसेमंद अफसर संजय बंदोपाध्याय को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाया जा सकता है।  आगे पढ़ें

political-phase-after-first-phase

पहले चरण के बाद का सियासी चरण

इस पत्र को लिखने में वैसी ही ऐहतियात बरती गयी है, जैसी सावधानी आजम खान ने जयाप्रदा के लिए अशोभनीय टिप्पणी करते समय बरती थी। खान ने पूरे भाषण में जयाप्रदा का एक भी बार नाम नहीं लिया था। इसलिए मामला उनके बोलने पर लगे अस्थायी प्रतिबंध तक ही सिमट कर रह गया था। नाथ के इस पत्र में किसी दल का नाम नहीं है। लिहाजा यह प्रकरण भी बहुत से बहुत किसी निंदा या चेतावनी से आगे नहीं जाएगा। तो पत्र लिखने का मंतव्य क्या है? वह यह है कि इसके जरिए प्रदेश की सारी सरकारी मशीनरी को संदेश दे दिया गया है। ताकि यह आशंका खत्म की जा सके कि कोई भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी सरकार के खिलाफ काम करने की सूरत में बच नहीं पायेगा। यदि सीधे मुख्यमंत्री के स्तर से प्रत्याशियों और पार्टी जिलाध्यक्षों तक इस बारे में खतो-किताबत का माहौल बन जाए तो सरकारी अमले में खलबली मचना तय है। इसी गरज से यह पत्र भेजा गया है और इसे वायरल किया गया  आगे पढ़ें

Previous 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10  ... Next 

प्रमुख खबरें

राज्य

राजनीति