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करिश्मा नहीं, करामात वाली है यह सूची

इससे पहले तक खूब शोर था। पार्टी को दो सौ से पार जाना है। इसके लिए मौजूदा में से करीब आधे विधायकों के टिकट काट दिए जाएंगे। परिवारवाद नहीं चलेगा। दागी या विवादित छवि वालों के चयन से परहेज बरता जाएगा। लेकिन पहली सूची तो कुछ और ही कह रही है। मामला उस तत्व की एक बूंद भी न दिख पाने का है, जिसे लेकर हो-हल्ला मचाया जा रहा था। सूची सबसे पहले यही बता रही है कि ऐसा ही हाल रहा तो दो सौ से ज्यादा सीट तो दूर, बहुमत के लाले भी पड़ सकते हैं। यह तो कांग्रेस को तश्तरी में रखकर सत्ता परोसने जैसा मामला दिखता है। यह लिस्ट करिश्माई नहीं, बल्कि खालिस करामाती है। उदाहरण के तौर पर हर्ष सिंह और गौरीशंकर शेजवार हटे तो उनके बेटों को टिकट मिल गया। यानी वंशवाद का दंश अब यह पार्टी भी झेल रही है, दिग्गज नेताओं की सहमति से। इससे साफ है कि सिंह और शेजवार सहित राज्य में दिग्गज भाजपाइयों ने अपने-अपने इलाके में घर से बाहर का कोई और नेतृत्व पनपने ही नहीं दिया। पन्ना बाई का टिकट काटा तो उनके पति पंचूलाल को टिकट दे दिया। पहले पंचू लाल का काटा था तो पत्नी को दे दिया। कार्यकर्ताओं को गढ़ने वाली पार्टी का यह हाल है। नए कार्यकर्ता ही तैयार नहीं हो पा रहे हैं। read more  आगे पढ़ें

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