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पीएम पद के लिए मोदी के बाद मायावती दूसरी सबसे दमदार नेता, राहुल गांधी का चांस पड़ा कमजोर

एसपी-बीएसपी का सपोर्ट न होने पर कांग्रेस हो सकता है कि यूपी की 80 में से केवल दो लोकसभा सीटें जीत पाए। ऐसा होने पर 543 सदस्यों की लोकसभा में कांग्रेस का आंकड़ा 100 तक पहुंचना भी मुश्किल होगा। कई क्षेत्रीय दलों को बीजेपी से डर तो है ही, वे कांग्रेस से भी सतर्क रहते हैं। उन्हें भले ही मोदी पसंद न हों, लेकिन गांधी को गले लगाने से वे हिचकते हैं। वे खुद अगुवा बनना चाहते हैं।  आगे पढ़ें

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आम चुनाव में बेरोजगारी को मुद्दा बनाएगी कांग्रेस, पूर्व आरबीआई गवर्नर निभाएंगे अहम भूमिका

मोदी सरकार के पांच वर्षों के कामकाज की सबसे बड़ी विफलता के रूप में रोजगार के मुद्दे को पेश करते हुए पार्टी अपने घोषणा पत्र में विस्तार से रोडमैप पेश करेगी कि रोजगार कैसे और किस तरह पैदा करेंगे? इसके लिए पार्टी विजन डॉक्युमेंट बना रही है, जिसमें रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन अहम भूमिका बना रहे हैं। दरअसल, उन्होंने एक डीटेल रिपोर्ट इस संबंध में बनाई है, जिसका उपयोग पार्टी करेगी।  आगे पढ़ें

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‘माई का लाल’ के बाद के मोदी

शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद के दम्भ में जिस समय पदोन्नति में आरक्षण को लेकर मदमस्त आचरण दिखाया था, तब उनके साथ-साथ मोदी ने भी कल्पना नहीं की होगी कि इसका क्या परिणाम होगा। सपाक्स भले ही राजनीतिक गलियारों में दमदार उपस्थिति दर्ज न करवा सका हो, किंतु सामाजिक स्तर पर उसने वह हलचल मचा दी, जिसके चलते कहीं नोटा का असर दिखा तो कहीं सवर्ण बाहुल्य वाली सीटों पर भाजपा के मत प्रतिशत कमी दर्ज की गयी। जाहिर कि एट्रोसिटी एक्ट को लेकर फैली विपरीत गरम हवा के थपेड़ों ने भी मोदी की नींद उड़ा दी है। उनकी स्वाभाविक चिंता आने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर है। मोदी की काबीना मंत्री स्मृति ईरानी भी दो दिन पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में 2019 सभी के लिए मुश्किल होने वाला है कह चुकी हैं। सीधी सी बात है कि उनका भी इशारा आम चुनाव की ओर था और मोदी की सवर्णों के प्रति यह चिंता भी खालिस सियासी स्वरूप की है। read more  आगे पढ़ें

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सरकार किसानों की मदद वाली योजना की तैयारी में, डायरेक्ट इनकम ट्रांसफर पर कर रही विचार

सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था में और बदलाव करने पर विचार कर रही है ताकि इसे ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके, साथ ही वह खेती से कम आमदनी की भरपाई करने के लिए डायरेक्ट इनकम ट्रांसफर के बारे में भी सोच रही है।  आगे पढ़ें

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हम बदलेंगे, युग बदलेगा

देश में बदलाव का दौर है। तीन हिंदी भाषी राज्यों ने बदलाव कर दिया है। अब आम चुनाव की वेला नजदीक आ रही है। इस बीच कई मुद्दे सोच और कर्म पर हावी हैं। कर्ज माफी की घोषणा के बाद भी किसान आत्महत्या कर रहे हैं। सहिष्णुता बनाम कथित असहिष्णुता का नसीरुद्दीन शाह की सूरत में नया अध्याय आरम्भ हो चुका है। उन्मादी भीड़ पहले निरीह लोगों की जान ले रही थी, अब वह कानून के रखवालों को भी नहीं बख्श रही। भ्रष्टाचार का राफेल बनाम अगस्ता वाला अध्याय हम भी हैं, तुम भी हो, दोनो हैं आमने-सामने की तर्ज पर खूब पढ़ा और गढ़ा जा रहा है। तीन तलाक के सामाजिक बोझ को सियासत की तराजू पर अपने-अपने नफे-नुकसान के हिसाब से तौला जा रहा है। भगवान श्रीराम को टेंट से निकालने के दिखावे फिर जोरों पर हैं और इसके चलते सामाजिक समरसता एक बार फिर तलवार की धार पर चलती दिख रही है। read more  आगे पढ़ें

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चुनाव से पहले किसानों को राहत देने की तैयारी में सरकार, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम पर कर रही विचार

एक अधिकारी ने बताया कि यह एक राजनीतिक फैसला होगा। उनके मुताबिक इसके खर्च और तय समय में इसे लागू करना एक चुनौती हो सकती है लेकिन कई राज्यों में बीजेपी की सरकार होने से मोदी सरकार को मिल सकती है। उन्होंने बताया कि इस मोर्चे पर कांग्रेस की सरकारों का भी समर्थन मिलेगा क्योंकि आखिरकार ये किसान समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।  आगे पढ़ें

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संकट में फंसे किसानों की मदद करेगी सरकार, लोन की सीमा कर सकती है 2 लाख रुपए!

एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बिना कोई जमानत रखवाए दिए जाने वाले लोन की सीमा दोगुनी कर 2 लाख रुपये की जा सकती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव कर कवरेज बढ़ाया जा सकता है और क्लेम्स के तेजी से निपटारे के कदम उठाए जा सकते हैं। नीति आयोग इस संबंध में कृषि और वित्त मंत्रालयों के साथ सभी संभव विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसमें कर्जमाफी की संभावना भी शामिल है।  आगे पढ़ें

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बिहार में एनडीए की सीटों के समीकरण बैठे, अब शुरू होगा असली खेल

अबतक की तस्वीर बताती है कि बीजेपी ने 2019 में बड़ी जीत के लिए बड़ा दिल दिखाते हुए जेडीयू से 'बराबरी' वाला समझौता किया है। आरजेडी-कांग्रेस के नेतृत्व वाला महागठबंधन भी जातीय समीकरणों को हल करने में जुटा हुआ है। दोनों गठबंधन के सामने अभी एक और बड़ी चुनौती है, सीट बंटवारा और टिकट वितरण। बीजेपी को अपने नेताओं का टिकट काटना होगा तो जेडीयू ऐसी सीटों पर दावा करेगी, जहां जीतने की उम्मीद अधिक हो। यही चुनौती महागठबंधन के सामने भी है। दोनों तरफ से कई दावेदार पहले ही खड़े हो चुके हैं। ऐसे में नेताओं के बागी होने का भी डर है।  आगे पढ़ें

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आम चुनाव से पहले शिवराज, रमन व राजे की हार से बढ़ेगा मोदी और योगी का कद

तीन अहम राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सत्ता कांग्रेस के हाथों गंवा दी है। आम चुनावों से कुछ महीने पहले लगे इस झटके ने बीजेपी की 2019 की दावेदारी पर भी ग्रहण लगाने का काम किया है। हालांकि बीजेपी की इस हार में भी पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ के लिए गुड न्यूज छिपी हुई है।  आगे पढ़ें

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