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आरबीआई गवर्नर कल करेंगे मौद्रिक नीति की समीक्षा, ब्याज दरों को घटाने रेपो रेट में हो सकती है कटौती

भाजपा ने वर्ष 2014 के अपने चुनावी घोषणा में यह वादा किया था कि वह होम लोन व अन्य कर्जे की दरों को कम करेगी। एसबीआई की आर्थिक शोध इकाई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आरबीआई ब्याज दरों को घटाने के लिए रेपो रेट में 0.25 की कटौती कर सकता है। रेपो रेट (वह दर जिस पर बैंक अपनी अतिरिक्त पूंजी आरबीआई के पास जमा करते हैं) ही अल्पावधि मे ब्याज दरों को तय करने में अहम भूमिका निभाती है। बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच ने भी एसबीआई की तरह 0.25 फीसदी की कटौती की संभावना जताई है।  आगे पढ़ें

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वित्तमंत्री की घोषणा से बिल्डरों की बांछें खिलीं, रियल इस्टेट की मंदी होगी दूर!

बजट में रियल इस्टेट को प्रोत्साहन देने के लिए बिना बिके घर पर दो साल तक कर नहीं लगाने का प्रावधान है। वित्त मंत्री ने बिके हुए घरों के अनुमानित किराए पर कर-शुल्क से छूट की अवधि को परियोजना के पूर्ण होने वाले वर्ष के अंत से एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष करने का प्रस्ताव किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय देश के सात बड़े शहरों में 6.73 लाख से अधिक ऐसे घर हैं, जिन्हें खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इस घोषणा से बिल्डरों को राहत मिलेगी  आगे पढ़ें

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अंतरिम बजट: किसानों पर बीजेपी को घेरने चली कांग्रेस, खुद हो गई ट्रोल

कांग्रेस ने बजट के बारे में लगातार कई सारे ट्वीट्स किए हैं। इन्हीं में से एक ट्वीट में लिखा गया, 'किसानों से किए गए एक भी वादे पूरे न कर पाने के बाद मोदी सरकार ने एक अपने एक और जुमले से उनका अपमान किया है।' इसी ट्वीट के साथ एक ग्राफिक लगाया गया है। इसके दो हिस्से किए गए हैं- पहले हिस्से में लिखा है- लाभ, 6000 रुपये प्रति वर्ष। दूसरे में लिखा है- वास्तविकता, एक किसान को 500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।  आगे पढ़ें

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बजट में लुभावनी घोषणाओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका, निरस्त करने की मांग

याचिका में कहा गया है कि लेखानुदान चुनावी वर्ष में सीमित अवधि के लिए सरकारी खर्च को मंजूरी देना होता है। बाद में नई चुनी हुई सरकार पूर्ण बजट पेश करती है। लोकसभा में वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को अंतरिम बजट पेश किया जिसमें मध्यम वर्ग और किसानों के लिए कई लुभावनी घोषणाएं की गईं। इसी साल कुछ महीनों में लोकसभा चुनाव होने हैं।  आगे पढ़ें

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बजट-2019: बजट भाषण में बोले वित्त मंत्री, कहा- हमारी सरकार ने महंगाई की तोड़ी कमर

हमारी सरकार में राज्यों को केंद्र से 10 फीसद ज्यादा पैसा मिल रहा है। क्लीन बैंकिंग के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। जो पैसे नहीं दे रहे थे, वो अब लौटाने लगे हैं या अपना बिजनेस बंद कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनपीए की दर पहले बहुत ज्यादा थी, इस कारण बहुत सारी योजनाएं प्रभावित हुई थी। इस वर्ष वित्तीय घाटा 3.4 फीसदी रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि तीन लाख करोड़ रूपए के एनपीए की रिकवरी हुई है।  आगे पढ़ें

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बजट-2019: बजट में गांव, गरीब, किसान और मिडल क्लास के लिए लगेगी तोहफों की झड़ी!

पिछले कई दिनों से खबरें आ रही हैं कि सरकार इस बजट में किसानों का विशेष ध्यान रखेगी क्योंकि पिछले विधानसभा चुनावों में किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ा है। कहा जा रहा है कि आज के बजट में सरकार किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने की योजना का ऐलान कर सकती है। योजना के तहत योग्य किसानों को सीधे खाते में निश्चित रकम दी जाएगी। ओडिशा और तेलंगाना की सरकारें अभी ऐसी योजना चला रही हैं। इसके अलावा, अंतरिम बजट में सरकार ग्राम विकास मंत्रालय का बजट बढ़ाकर 1.3 लाख करोड़ रुपये कर सकती है, जो वर्तमान वित्तीय वर्ष में 1.12 लाख करोड़ रुपये था। बजट परिचर्चा से जुड़े सूत्रों की ओर से यह जानकारी दी गई है।  आगे पढ़ें

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वित्तमंत्री गोयल आज 11 बजे पेश करेंगे अंतरिम बजट, मध्यम वर्ग व छोटे उद्योगों को मिल सकती है राहत

लोकसभा चुनाव के पहले पेश हो रहे इस बजट का मूल्य आम बजट से कहीं ज्यादा होगा। अंतरिम बजट में मध्यम वर्ग के साथ ही कार्पोरेट्स के लिए टैक्स में छूट की घोषणा की जा सकती है। साथ ही कृषि और छोटे उद्योगों के लिए भी राहत पैकेज की घोषणाएं की जा सकती हैं। हालांकि यह बजट महज चार महीने के लिए लेखानुदान है लेकिन गोयल इसमें अधिक घोषणाएं कर परंपराएं तोड़ सकते हैं। गोयल पहले भी कह चुके हैं कि वह परंपराओं से आगे जाएंगे क्योंकि कृषि क्षेत्र और इंतजार नहीं कर सकता। सूत्रों के मुताबिक बजट में आयकर छूट की सीमा मौजूदा 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए की जा सकती है। कापोर्रेट जगत कर की उच्च सीमा को 30 से 25 फीसदी करने की मांग करता रहा है उसे भी इस बजट में सरकार से काफी उम्मीदें हैं।  आगे पढ़ें

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बजट-2019: मोदी सरकार मध्यवर्ग का दिल जीतकर चुनावी चुनौती को बनाएग आसान, टैक्स में दे सकती है राहत

अभी वित्त मंत्रालय का कामकाज देख रहे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल अपने पहले बजट भाषण के बड़े हिस्से में सरकार की विभिन्न पहलों एवं भविष्य के अजेंडे का बखान कर सकते हैं। अटकलें लग रही हैं कि गोयल टैक्स पर राहत देने के लिए स्लैब में बदलाव करेंगे या फिर स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा 40 हजार रुपये से बढ़ाने का ऐलान होगा। चर्चा इस बात की भी है कि वह मेडिकल इंश्योरेंस लेने पर छूट के ऐलान तक ही सीमित रह सकते हैं।  आगे पढ़ें

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अंतरिम बजट में दिखेगा चुनावी नतीजों का असर, मोदी सरकार खेती-किसानी पर करेगी फोकस

मोदी सरकार के अंतिम बजट में सोशल सेक्टर पर खर्च और गांवों के लोगों की आमदनी बढ़ाने पर फोकस हो सकता है। सरकार 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के प्लान पर पहले से ही काम करना शुरू कर चुकी है, लेकिन आगामी बजट में उनके लिए और भी बहुत कुछ हो सकता है। हालिया विधानसभा चुनावों में बीजेपी की हार का जिम्मेदार काफी हद तक ग्रामीण इलाकों में बने संकट और किसानों के गुस्से को बताया जा रहा है। फिस्कल ईयर 2018 के बजट में ग्रामीण इलाकों में रोजगार के मौकों और ढांचागत विकास के लिए अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के तहत कई योजनाओं के जरिए 2.36 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।  आगे पढ़ें

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अंतरिम बजट बनाने की तैयारी में जुटा वित्त विभाग, मंत्रालयों को बजट का पैसा खर्च करने के निर्देश

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने दूसरे मंत्रालयों और विभागों से कहा है कि उन्हें बजट के मुताबिक जो पैसा दिया गया है, वे उसे खर्च करते रहें। वित्त मंत्रालय इस बीच वित्त वर्ष 2020 के लिए अंतरिम बजट बनाने की तैयारी में जुट गया है। इससे पता चलता है कि सरकार की आमदनी और खर्च को लेकर वह सहज महसूस कर रहा है, जबकि अक्टूबर में ही फिस्कल डेफिसिट बजट अनुमान से अधिक हो गया था। सरकार ने वित्त वर्ष 2019 के लिए फिस्कल डेफिसिट टारगेट जीडीपी का 3.3 पर्सेंट रखा है। इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगी, लेकिन केंद्र ने हाल ही में दावा किया था कि वह इस टारगेट को हासिल करेगा।  इस मामले में चल रही बातचीत से वाकिफ एक अधिकारी ने बताया, 'मंत्रालयों से कहा गया है कि उन्हें जो पैसा मिला है, वे उसे खर्च करें। खर्च को रोकने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।' वित्त वर्ष 2019 के बजट में 6.24 लाख करोड़ फिस्कल डेफिसिट रहने का अनुमान लगाया गया है, जो जीडीपी का 3.3 पर्सेंट है। हालांकि, वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में फिस्कल डेफिसिट 6.49 लाख करोड़ रुपये रहा था, जो इसके अनुमान का 103.9 पर्सेंट है। पिछले साल इसी वक्त फिस्कल डेफिसिट अनुमान का 96.1 पर्सेंट था। वित्त वर्ष 2018 में सरकार ने जीडीपी के 3.2 पर्सेंट फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य रखा था, जबकि आखिर में यह 3.5 पर्सेंट रहा था।  रेटिंग एजेंसी इक्रा की प्रिंसिपल इकनॉमिस्ट अदिति नायर ने बताया, 'इस तरह की चिंता जताई गई है कि इस साल भी फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य हासिल नहीं हो पाएगा।' उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस वित्त वर्ष की सब्सिडी के एक हिस्से को अगले वित्त वर्ष में शिफ्ट या कुछ सेक्टर्स में कैपिटल एक्सपेंडिचर में कटौती नहीं करती तो फिस्कल डेफिसिट टारगेट हासिल करने में मुश्किल होगी। इंडिया रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2019 में फिस्कल डेफिसिट के जीडीपी के 3.5 पर्सेंट रहने का अनुमान लगाया है।  हालांकि, अभी तक सरकार जिस तरह से पैसा खर्च कर रही है, उसे देखकर लगता है कि वह फिस्कल डेफिसिट को लेकर कंफर्टेबल है। जब भी फिस्कल डेफिसिट टारगेट को लेकर सरकारें मुश्किल में होती हैं, तो वे सबसे पहले कैपिटल स्पेंडिंग में कटौती करती हैं। हालांकि, इस वित्त वर्ष में अक्टूबर तक बजट अनुमान का 59 पर्सेंट कैपिटल एक्सपेंडिचर हुआ था, जो साल भर पहले की इसी अवधि में 51 पर्सेंट था। हालांकि, सरकार कुछ मंत्रालयों के बजट एलोकेशन में संशोधित अनुमान में कटौती कर सकती है क्योंकि वे धीमी रफ्तार से पैसा खर्च कर रहे हैं।  वॉटर रिसोर्सेज मिनिस्ट्री के लिए 9,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था, लेकिन अभी तक इसका 41 पर्सेंट ही खर्च किया गया है। फिस्कल मैनेजमेंट में सरकार को डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन से काफी उम्मीदें हैं, जबकि जीएसटी की वजह से उसके इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में कुछ कमी आ सकती है।    आगे पढ़ें

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