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साध्वी का घोर अनुचित आचरण

यह समझ से परे है कि जिस पार्टी का संगठनात्मक ढांचा तथा अनुशासन सर्वाधिक सख्त माना जाता हो, उसी पार्टी में भगवा धारण करने वाले कई लोग क्यों जुबानी अंगारों का प्रतीक बन जा रहे हैं। किसी समय साध्वी उमा भारती ने तो समूची पार्टी की इज्जत भरी बैठक में मीडिया के सामने उतारकर रख दी थी। यकीनन यह भाजपा की जरूरत है कि भगवा आतंकवाद जैसे प्रोपेगेंडा के मुकाबले का मजबूती से जवाब देने के लिए भगवाधारियों की ही मदद ले, किंतु ऐसे लोगों पर अंकुश लगाना भी तो पार्टी के कर्ताधर्ताओं का ही जिम्मा है। किंतु ऐसा होता नहीं दिख रहा। इससे हो यह रहा है कि गैर-राजनीतिक भगवाधारी भी अपनी छवि पर दाग लगता महसूस कर रहे हैं।साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का ताजा बयान बे-सिर पैर का है। चलिए मान लिया कि हेमंत करकरे ने उन्हें अमानवीय यातनाएं दीं। इन बातों का जिक्र करते हुए उनका आपा खो देना भी समझ में आता है। किंतु ये अचानक गोडसे कहां से बीच में आ गये? क्या साध्वी को यह इल्म भी नहीं कि मीडिया तो अधिकांश सवाल पूछता ही सनसनी के लिए है। फिर ऐसा कैसे हो गया कि एक सवाल का बचकाना और पूरी तरह असामयिक जवाब देकर उन्होंने देश-भर में अपनी ही पार्टी को नीचा देखने पर मजबूर कर दिया?   आगे पढ़ें

फर्स्ट कॉलम (प्रकाश भटनागर)और भी

राज्य और भी

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तालाब के किनारे मृत मगरमच्छ मिलने से ग्रामीणों में हड़कंप, शिकार की आशंका

ग्राम सिंहनिवास के तालाब किनारे शनिवार सुबह दो मगरमच्छ मिलने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सरपंच राजू जाटव की सूचना पर पोहरी रेंजर आरकेएस धाकड़ टीम के साथ पहुंचे और दोनों मगरमच्छ के शव नेशनल पार्क ले गए। बाद में रेस्क्यू स्क्वॉड प्रभारी डॉ. जितेन्द्र जाटव ने दोनों मगरमच्छ का पीएम किया। उन्होंने बताया कि मगरमच्छों की मौत 48 से 72 घंटे पहले हो चुकी है। सैंपल ग्वालियर की फोरेंसिक लैब और जबलपुर की वाइल्ड लाइफ फोरेंसिक एंड हेल्थ लैब भेजे जाएंगे।   आगे पढ़ें

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इंदौर में भीषण गर्मी से निपटने मतदान केन्द्र को बनाया वातानुकूलि, मतदाताओं लिए बिछाया रेड कारपेट

मतदान कक्ष के साथ ही पूरा केंद्र वातानुकूलित बनाया गया है। मतदान के समय लोगों को आधे घंटे से एक घंटे लाइन में खड़े रहना पड़ता है। इससे निजात दिलाने के लिए यहां 100 से अधिक कुर्सी लगाई गई है। पूरे बूथ को स्लोगन व रंगीन गुब्बारों से सजाया गया है। दृष्टिहीन मतदाताओं को असुविधा न हो इसके लिए सारे निर्देश ब्रेन लिपि में लिख कर हर एक टेबल पर लगाए गए हैं।   आगे पढ़ें

राजनीतिऔर भी

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गोडसे को देशभक्त कहे जाने को लेकर मचा सियासी बवाल, राहुल गांधी ने बोला हमला

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह हमला साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बाद गोडसे के समर्थन में कई भाजपा नेताओं के बयान सामने आने के पर किया है। हालांकि इस मामले में भाजपा के कड़े रुख और विवाद बढ़ने के बाद साध्वी प्रज्ञा सहित दूसरे नेताओं ने भी माफी मांग ली है। इसके बावजूद कांग्रेस इस मामले को सियासी रंग देने में जुटी है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इसे लेकर भाजपा और पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने भारत के स्वतंत्रता सेनानियों और इतिहास पुरुषों के खिलाफ छद्म युद्ध छेड़ रखा है। वह बार-बार महापुरुषों को अपमानित करने में जुटी हुई है।   आगे पढ़ें

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पत्नी के बचाव में सिद्धू, कहा-वह कभी झूठ नहीं बोलतीं, टिकट कटने पर कैप्टन पर लगाए थे आरोप

मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी हाईकमान ने चंडीगढ़ में पवन बंसल को उम्मीदवार बनाया। पंजाब कांग्रेस ने डॉ. सिद्धू को अमृतसर और बठिंडा से चुनाव लड़ने का न्योता दिया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। बठिंडा से चुनाव लड़ने पर सिद्धू ने कहा था कि उनकी पत्नी स्टैपनी नहीं है जिसे कहीं भी फिट कर दिया जाए। कैप्टन और सिद्धू के बीच विवाद 2017 में पंजाब में सरकार बनने के साथ ही शुरू हो गया था। रेत-बजरी और केबल माफिया से शुरू हुआ यह विवाद इस हद तक पहुंच गया जहां पर सिद्धू ने कैप्टन को पंजाब का कैप्टन मानने से भी इंकार कर दिया था। यही नहीं पुलवामा में जब आतंकी हमला हुआ तो विधानसभा में कैप्टन ने पाकिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया, जबकि सदन के बाहर सिद्धू ने पाकिस्तान सरकार को दोषी मानने से साफ इन्कार कर दिया था। लोकसभा चुनाव में पंजाब कांग्रेस ने सिद्धू को राज्य में प्रचार से दूर रखा।   आगे पढ़ें

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सियासी तर्जुमा

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विंध्य में कांग्रेस की जमीन इसलिए खिसकी..!

राहुल गांधी का विधानसभा चुनाव के दौरान रीवा-सतना जिले में रोडशो हुआ था। इस शो का परिणाम फ्लाप रहा क्योंकि रीवा की सभी आठों सीटें भाजपा की झोली में जा गिरीं। राहुल गाँधी के दिमाग में यह सवाल जरूर कुलबुलाएगा कि ऐसा क्यों हुआ? तब उन्हें यह बात याद दिलाने की जरूरत पड़ेगी कि विधानसभा चुनाव की सिरमौर चौराहे कि उस नुक्कड़ सभा में आपने अपने पिता राजीव गांधी की प्रतिमा के आगे यह ऐलान किया था कि विधानसभा में पैराशूट कैंडिडेट लैंड नहीं करेंगे। लेकिन आपके दिल्ली लौटते ही मध्यप्रदेश कांग्रेस के दफ्तर में ऐसी खिचड़ी पकी कि पैराशूट लैंडर प्रत्याशियों का तांता सा लग गया। इसी रीवा जिले में रीवा, मनगँवा और देवतालाब विधानसभा क्षेत्र से वो प्रत्याशी उतारे गए जो तीन महीने पहले तक कांग्रेस का नाश मनाते रहे। सीधी के सिंगरौली से भी ऐसा ही प्रत्याशी उतारा गया। सिर्फ सतना विधानसभा क्षेत्र के पैराशूट लैंडर ने चुनाव जीतकर लाज रखी जो इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की खुलेआम कब्र खोद रहा है। मुश्किल यह है कि कांग्रेस आलाकमान इस गाढ़े वक्त में भी ठकुरसुहाती से मुक्त नहीं है। read more   आगे पढ़ें

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तेरा निजाम है, सिल दे जुबाने-कायर को....

इस माहौल में नैतिकता का तत्व तलाशना चील के घोंसले में मांस की खोज जैसा निरर्थक प्रयत्न बन चुका है। लेकिन सार्वजनिक जीवन में मोहम्मद आजम खान जैसी घोर अनैतिकता तो भोजन करते समय किसी का मल दिख जाने जैसी असहनीय है।   आगे पढ़ें

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बदजुबान नेताओं की नकेल चुनाव आयोग नहीं वोटर के हाथ है...

राज्य की विधानसभाओं और लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक दलों से जिस आचार संहिता की इमानदारी से पालन करने की अपेक्षा की जाती है उसकी उपेक्षा और अनादर करने वाले नेता हर राजनीतिक दल की कमजोरी होते है। खेद की बात यह है कि राजनीतिक दल खुद होकर अपने नेताओं को ऐसी हिदायत कम ही देते है कि वे चुनावी रैलियों अथवा सोशल मीडिया के जरिए ऐसे बयान देने से परहेज करे ,जिनसे धर्म अथवा जाति के नाम पर चुनावों की निष्पक्षता के प्रभावित होने की आशंका हो। read more   आगे पढ़ें

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तो सवाल यह है कि सवालों से डरता कौन है?

मनन कीजिए कि दुनिया में यदि कुछ भयंकर है तो वो सवाल है और कुछ मुश्किल है वह है जवाब देना । कयामत के दिन ईश्वर को जवाब देना है,घर जाकर पिताजी को या पत्नी को। बॉस या मालिक नामक प्राणी का तो अस्तित्व ही जवाब मांगने पर टिका हुआ है । read more   आगे पढ़ें

विश्लेषणऔर भी

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गिरोहबंदी को खत्म किए बिना खतरे में ही रहेगी आंतरिक सुरक्षा

दरअसल, मोदी हजम नहीं हो पा रहा है इसलिए एक ऐसा प्रचार तंत्र और स्लीपर सेलनुमा नेटवर्क को बड़ी ताकत बनाने की कोशिश की जा रही हैं। इसमें हर महत्वपूर्ण हिस्से के कई लोग शामिल हैं। इलेक्ट्रानिक मीडिया, प्रिंट मीडिया और सबसे भयावह भूमिका सोशल मीडिया निभा रहा है। कठुआ में मुस्लिम बच्ची के साथ सामूहिक ज्यादती की हर खबर में यह अनिवार्य रूप से लिखा और बताया गया कि यह घटनाक्रम एक मंदिर के भीतर हुआ। सारा देश हिल उठा। भोपाल के बोर्ड आॅफिस चौराहे पर भी आरोपियों को फांसी देने की मांग को लेकर जुलूस निकाल दिया गया। इस घटना के शोर के बीच ही साहिबाबाद के मदरसे में एक हिंदू बच्ची गीता से सामूहिक ज्यादती हुई। भोपाल के बोर्ड आॅफिस चौराहे पर इसके खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुनाई दिया। एक शख्स ने फेसबुक पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए लिखा, गलती सरासर गीता की ही है। उसने धर्म गलत चुना और अपने साथ हुए दुष्कर्म के लिए भी गलत स्थान का चयन किया। वरना तो आज उसके लिए देश से विदेश तक इतने आंसू बह रहे होते कि प्रलय ही आ जाती। पोस्ट के समर्थन में कमेंट््स आना तो दूर, लाइक्स भी गिने-चुने ही मिल सके। अलबत्ता उस यूजर को गिरोह के एक सदस्य ने बदतमीज लेखक साबित कर दिया। read more   आगे पढ़ें

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‘श’ और ‘स‘ के फर्क में पिसता मुल्क

वैसे देखा जाए तो राजनीतिक दलों के अधिकांश गठबंधन शराब भी होते हैं और उनमें सराब वाली फितरत भी होती है। जनता पार्टी से शुरू कीजिए। मोरारजी भाई की सरकार लोकतंत्र की सेहत के लिए किसी शराब की तरह घातक साबित हुई और देश की जनता के लिए कांग्रेस के विकल्प के नाम पर सराब की तरह छलावा मात्र बन गयी। कांशीराम और मुलायम सिंह यादव के वर्चस्व वाले दौर में उत्तरप्रदेश में हाथी तथा सायकिल का साथ शराब के हैंगओवर की तरह वहां की जनता का सिर दर्द बन गया और आज एक बार फिर सराब की भांति मायावती और अखिलेश यादव की जुगलबंदी मतदाता को फिर भरमाने का जतन शुरू कर चुकी है। बिहार में नीतिश कुमार ने लालू प्रसाद यादव से गठबंधन तोड़कर इस शराब से पिंड छुड़ाया और फिर सारे दिखावों को दरकिनार कर एक बार पुन: एनडीए की गोद में जा बैठे।   आगे पढ़ें

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