फर्स्ट कॉलम (प्रकाश भटनागर)और भी

राज्य और भी

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शहीद सैनिकों के गम में डूबा बाजार, व्यापारिक संगठनों ने दी श्रद्धांजलि, बंद रखा कामकाज

कपड़ा मार्केट के व्यापारियों से खचाखच भरे सभागृह में कारोबारियों ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा। क्लॉथ मार्केट के वरिष्ठ सदस्य गिरधरगोपाल नागर, गिरीश काबरा, व्यापारी एसोसिएशन के अरुण बाकलीवाल के साथ गुमाश्ता एजेंट और दलाल भी सभा में शामिल हुए। इंदौर लोहा व्यापारी एसोसिएशन ने भी बाजार में मौन सभा कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान एसोसिएशन अध्यक्ष इसहाक चौधरी, सचिव शैलेंद्र कुमार सोनी के साथ लोहा दलाल एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश अग्रवाल, दीपक बैस आदि मौजूद थे। टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन (टीपीए) की स्टडी सर्कल मीटिंग के दौरान संस्था के सदस्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कर सलाहकारों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।   आगे पढ़ें

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मध्यप्रदेश: पूर्व मंत्रियों ने खाली नहीं किया बंगला, नोटिस अवधि समाप्त, सरकार वसूलेगी दस गुना किराया

गृह विभाग के अफसर कई बार पूर्व मंत्रियों को बंगले खाली करने के लिए कह चुके हैं। एक फरवरी को विभाग ने संबंधित पूर्व मंत्रियों को बंगले खाली करने का 15 दिन का नोटिस भी दिया था। नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि तय समय सीमा में बंगले खाली नहीं करने पर जुमार्ने के रूप में 10 गुना किराया वसूला जाएगा। नोटिस की अवधि शुक्रवार को पूरी हो गई है। संपदा संचालनालय के सूत्र बताते हैं कि किसी भी पूर्व मंत्री ने बंगला खाली नहीं किया है। उल्लेखनीय है कि इन बंगलों का नए मंत्रियों को आवंटन हो चुका है, लेकिन खाली नहीं होने के कारण वे शिफ्ट नहीं हो पा रहे हैं।   आगे पढ़ें

राजनीतिऔर भी

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पुलवामा हमला: मुफ्ती मोहम्मद सरकार नहीं करती नियमों में बदलाव तो बच जाती 40 जवानों की जान

पहले सुरक्षाबलों के काफिले को जिस वक्त हाइवे से निकलना होता था, सिविलियन ट्रैफिक को रोक दिया जाता था। इस दौरान एक पायलट वीइकल सिविलियन गाड़ियों को हाइवे से दूर रखने का काम करता था। इससे लोगों को असुविधा होती थी और सुरक्षा बलों की खराब छवि बनती थी। सईद सरकार ने फैसला किया कि इस नियम को खत्म किया जाए। केंद्र सरकार ने भी सईद के तर्क को सही माना और सुरक्षा ढीली कर दी गई।   आगे पढ़ें

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चुनावी मूड में आई भाजपा, अमित शाह कल करेंगे ‘भारत के मन की बात, मोदी के साथ’ अभियान की शुरूआत

अभियान के जरिए भाजपा भारत के भविष्य को आकार देने में प्रत्येक भारतीय को शामिल करने का लक्ष्य बना रही है। भाजपा को उम्मीद है कि इस अभियान से पार्टी को 100 करोड़ लोगों से सीधे जुड़ने में मदद मिलेगी और उनके सुझावों के माध्यम से लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी अपना घोषणापत्र तैयार करेगी।   आगे पढ़ें

सियासी तर्जुमा

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कमलनाथ और शिवराज का अंतर

मैं यह कह सकता हूं कि शिवराज सिंह चौहान से मेरी अच्छी पहचान और दोस्ती रही है। उन्हीं के कहे के मुताबिक मैं उन लोगों में से एक हूं जो शिवराज के दिल में रहता हैं। पर पिछले तेरह साल में मैं उनसे तेरह बार भी शायद ही मिला हूं। और जब मिला भी तो उन्हें चंद मिनटों बाद घड़ी की तरफ देखते पाया। मुख्यमंत्री के साथ ऐसा हो सकता है। यारी दोस्ती क्या करें, आखिर पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी का मामला जो ठहरा। पर अब तक मैं कमलनाथ से जब भी मिला हूं, वे पर्याप्त बतियाएं, खुल कर बोले और घड़ी उन्हें देखनी नहीं पड़ी, क्योंकि मैं जब भी मिला वे व्यस्त होने के बावजूद फुर्सत में थे। पता नहीं कैसे राजनीतिज्ञ है कमलनाथ, बहुत बेलाग बोलते हैँ और खुल कर सामने आते हैं। बोल दिया आफ दि रिकार्ड तो मान लेते हैं कि ऐसा ही होगा। शिवराज के पास आफ दि रिकार्ड और आन दि रिकार्ड कुछ है ही नहीं। मीडिया के अपने मित्रों में शिवराज अकेले में बहुत असहज दिखते हैं। सार्वजनिक तौर पर वे सहज हैं।   आगे पढ़ें

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नाथ को बधाई और सिंधिया को साधुवाद

ज्योतिरादित्य ने इस चुनाव में शिवराज से अपने साथ-साथ अपने पूर्वजों के अपमान का भी बदला ले लिया। सिंधिया राजघराने को लेकर शिवराज ने बीते कम से कम दो साल में जमकर आग उगली थी। जाहिर है कि वह जूनियर सिंधिया की प्रदेश में पहले बढ़ी सक्रियता और फिर पांव पसारती ताकत से डरे हुए थे। इसलिए यह चुनाव भाजपा ने ‘शिवराज बनाम महाराज’ कर दिया था। ग्वालियर-चंबल सहित अपने प्रभाव वाले अन्य क्षेत्रों में सिंधिया ने भाजपा को जमकर नुकसान पहुंचाया। बदला पूरा हुआ तो मुख्यमंत्री पद के लिए बलिदान भी दे दिया। सिंधिया के समर्थक भले ही उनके मुख्यमंत्री न बन पाने का मलाल पाले बैठे होंगे, किंतु जयविलास पैलेस की दीवारों का स्पर्श कर सिंधिया अवश्य ही इस बात की खुशी मनाएंगे कि राजघराने के खिलाफ उठी आवाज को कम से कम पांच साल के लिए खामोश कर दिया गया है। read more   आगे पढ़ें

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नज़रिया और भी

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बाजारवाद के इस दौर में प्रेम भी तोहफों का मोहताज हो गया

आज प्रेम आपके दिल और उसकी भावनाओं तक सीमित रहने वाला केवल आपका एक निजी मामला नहीं रह गया है। उपभोगतावाद और बाजारवाद के इस दौर में प्रेम और उसकी अभिव्यक्ति दोनों ही बाजारवाद का शिकार हो गए हैं। आज प्रेम छुप कर करने वाली चीज नहीं है, फेसबुक इंस्टाग्राम पर शेयर करने वाली चीज है। आज प्यार वो नहीं है जो निस्वार्थ होता है और बदले में कुछ नहीं चाहता बल्कि आज प्यार वो है जो त्याग नहीं अधिकार मांगता है।क्योंकि आज मल्टीनेशनल कंपनियाँ बढ़ी चालाकी से हमें यह समझाने में सफल हो गई हैं कि प्रेम को तो महँगे उपहार देकर जताया जाता है। read more   आगे पढ़ें

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लोकसभा चुनाव: जोश बनाए रखने की चुनौती

विधानसभा चुनाव के लगे लगाए लोकसभा के चुनाव आने से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस उम्मीद से थे कि कार्यकर्ता सक्रिय बने रहेंगे। लेकिन जमीनी हकीकत दोनों दलों के लिए चौकाने वाली है। भाजपा को लग रहा था कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद कार्यकर्ता इसे दिल पर लेगा और भावुक होकर लोकसभा चुनाव में जिताने के लिए कमर कसेगा। ऐसे ही कांग्रेस को लग रहा है कि सरकार बनने के बाद अब उसके चाहने वाले राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए जोश से भरे रहेंगे। मगर सत्ता में मौज करने वाले मंत्री, विधायक और उनके चंपुओं के जलवे देख कार्यकर्ता भी सरकार की रस मलाई में हिस्सा चाहता है। दीपक बावरिया ने इस बात को समझ कर कार्यकर्ताओं की चिन्ता करने की जो समझाईश दी वह नेताओं को नागवार गुजर रही है।   आगे पढ़ें

विश्लेषणऔर भी

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अच्छा होगा पहले राहुल कांग्रेस को बदल लें....

शायद कांग्रेस को एक बात समझ में आ रही है कि जहां उसकी भाजपा से सीधी लड़ाई है, वहां के मुस्लिम मतदाताओं के पास उसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है, लिहाजा मुस्लिमों की उपेक्षा करके भी यदि कांग्र्रेस अध्यक्ष मंदिरों की खाक छानते रहेंगे तो भी मुस्लिमों को जाना कहां है? इसमें हकीकत हो सकती है। लेकिन इसमें खतरा एक यह भी है कि किस्सा, न खुदा ही मिला न बिसाले सनम-न इधर के रहे, न उधर के रहे, जैसा हो सकता है। आखिर अब हिन्दू भला कांग्रेस पर क्यों भरोसा करने लगेगा। किसी मंदिर में मत्था टेकने से, किसी मठ के स्वामी के दर्शन करने से क्या हिन्दू उन तथ्यों की अनदेखी कर सकता है, जब कांग्रेस ने प्रो मुस्लिम राजनीति को चुन लिया था।read more   आगे पढ़ें

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FIFA WORLD CUP: जब पिछली बार मिस्र की टीम यहां थी तब सालाह पैदा भी नहीं हुए थे

फीफा विश्‍वकप 2018: आज फुटबॉलर मोहम्‍मद सालाह का 26वां जन्मदिन है. जब उसके देश की टीम पिछली बार वर्ल्डकप में खेली थी, तब वह पैदा भी नहीं हुए थे. मिस्र, यानी इजिप्ट 28 साल बाद वर्ल्डकप में खेल रहा है. रात साढ़े आठ बजे (भारतीय समयानुसार) जब मोहम्‍मद सालाह मैदान में उतरेंगे, तो एकाटेरिनबर्ग एरीना में मौजूद 45,000 दर्शकों के अलावा, दुनिया की आधी आबादी की निगाहें उसी पर टिकी होंगी.जब बॉल उसके बूट से टकराकर गोलपोस्ट के भीतर जाती है, तो लिवरपूल फुटबॉल क्लब स्टेडियम का नज़ारा कुछ ऐसा हो उठता है - पहले जश्न और शोर, फिर कुछ क्षण की खामोशी, फिर हाथ आसमान की तरफ उठता है खुदा को शुक्रिया कहने के लिए, और फिर जब वह धरती को चूमता है, तो उन लम्हों की पवित्रता के लिए ज़रूरी शांति का उसके प्रशंसक सम्मान करते हैं. यह फुटबॉल के नए सुपरस्टार मोहम्मद सालाह हैं, और वह अपने कारनामों से लिवरपूल क्लब के ही नहीं, दुनियाभर के लाड़ले बन गए. यह इस बात की तसदीक भी है कि आस्था आज भी पहचान और शोहरत के रास्ते में नहीं आती. आज के हालात में सालाह उस विश्वास, समाज और संस्कृति की नई पहचान बन रहे हैं, जिसे दुनिया संदेह और सवालों की नज़र से देख रही है. पश्चिमी समाज पर मंडरा रहे इस्लामोफोबिया के मिथक को किक मारते सालाह उस लीग में शामिल हो गए हैं, जहां मिस्र के इस खिलाड़ी की तुलना लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो से की जा रही है. सालाह लिवरपूल के लिए 43 मैचों में 49 गोल कर चुके हैं और साथी खिलाड़ियों और फुटबॉल लेखक संघ ने उन्हें अप्रैल में साल का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना है. मोहम्मद सालाह इंग्लैंड में भी उतने ही लोकप्रिय हैं, जितने मिस्र में. सालाह पिछले अक्टूबर में मिस्र के नायक बने थे, जब आखिरी क्षणों में उनके पेनल्टी किक से मिस्र की टीम 1990 के बाद पहली बार वर्ल्डकप में जगह बनाने में कामयाब रही थी. राजधानी काहिरा की दीवारें उनके पोस्टरों से रंग गईं, और समूचे बाज़ार पर उनकी तस्वीर छा गई. चादर से लालटेन तक सालाह ही सालाह. समूचा मिस्र आज लिवरपूल का फैन बन गया है. मोहम्मद सालाह की लोकप्रियता की बड़ी वजह है उनका अपनी पहचान पर फख्र होना.मोहम्मद सालाह पिछले महीने यूएफा चैम्पियन्स लीग के फाइनल में लिवरपूल की ओर से खेलते हुए कंधे में चोट खा बैठे थे, लेकिन मिस्र के कोच हेक्टर कूपर ने साफ कर दिया है कि सालाह चोट से उबर गए हैं, और उरुग्वे के खिलाफ खेलने को तैयार हैं. सो, अब देखना यह है कि क्या मिस्र दो बार के चैम्पियन उरुग्वे को मात दे पाएगा...?   आगे पढ़ें