फर्स्ट कॉलम (प्रकाश भटनागर)और भी

राज्य और भी

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तो अब कमलनाथ सरकार बिकवाएगी ड्राट बीयर

मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार एक बार फिर विदेशी शराब दुकानों से खुली बीयर बैचने की तैयारी कर रही है। 26 फरवरी को केबीनेट में प्रदेश की नई कांग्रेस सरकार की आबकारी नीति में संभवत: यह फैसला हो जाएगा। सरकार के इस फैसले का इकलौता फायदा राजसेन जिले की एक डिस्टलरी को होगा। और इस फैसले का सबसे ज्यादा नुकसान किशोर वय के युवाओं को होगा जिन्हें सस्ते में और आसानी में बीयर कहीं भी उपलब्ध हो जाएगी। प्रदेश में पहली बार ड्राट बीयर बैचने का फैसला शिवराज सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में किया था करीब चार साल बाद शराब दुकानों से 2013 में इसकी बिक्री पर रोक भी लगा दी थी। हालांकि ड्राट बीयर , बार में उपलब्ध है।read more   आगे पढ़ें

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मध्यप्रदेश: कुशाभाऊ ठाकरे नर्सिंग कॉलेज में कश्मीरी छात्रों ने की भारत विरोधी टिप्पणी, दोषियों को किया संस्पेंड

भोपाल में फेसबुक पोस्ट में देश विरोधी कमेंट करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कश्मीरी छात्रों की ओर से देशद्रोही कमेंट शेयर किए गए। शहीदों पर भी कमेंट किए गए। मामले की शिकायत कोलार थाना पहुंचने पर पुलिस हरकत में आई और कॉलेज प्रबंधन से पूछताछ की। उसके बाद जिसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने 6 छात्रों को सस्पेंड कर दिया। पुलिस ने छात्रों के घर पर भी दबिश दी लेकिन छात्र अपने कमरों पर नहीं मिले। पुलिस का कहना है इस संबंध में जांच की जा रही है।जिस जगह पर ये छात्र रहते थे, उस जगह को सील कर दिया गया है।   आगे पढ़ें

राजनीतिऔर भी

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दिग्गी ने सिद्धू पर बोला तीखा हमला, कहा- अपने दोस्त इमरान को समझाइए

बीजेपी छोड़ कांग्रेस में आए सिद्धू पर भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आपको दोस्त इमरान खान की वजह से गाली पड़ रही है, अपने दोस्त को समझाएं। सिलिसिलेवार ट्वीट में दिग्विजय ने बेबाक तरीके से अपनी राय रखी। अपने बयानों के कारण अक्सर ही आलोचकों के निशाने पर रहने वाले कांग्रेस नेता ने इमरान खान को भी चुनौती दे डाली। उन्होंने ट्वीट किया, 'पाकिस्तान के श्रीमान प्रधानमंत्री कमआन! कुछ साहस दिखाइए और हाफिज सईद और मसूद अजहजर आतंक के स्वघोषित सरगनाओं को भारत को सौंपिए। आप ऐसा कर न सिर्फ पाकिस्तान को आर्थिक संकट से निकालने में सक्षम होंगे, बल्कि नोबेल शांति पुरस्कार के भी प्रबल दावेदार बन जाएंगे।'   आगे पढ़ें

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पुलवामा हमले के बाद वर्ल्ड कप में महामुकाबले पर संकट के बादल, भारत नहीं खेलेगा पाक के साथ मैच!

आईसीसी वर्ल्ड कप की उलटी गिनती शुरू है और अब क्रिकेट के महाकुंभ को शुरू होने में महज 99 दिन बाकी हैं। भारत अपने अभियान की शुरूआत 5 जून को साउथ अफ्रीका के खिलाफ करेगा। पाकिस्तान के खिलाफ मैच 16 जून को है। अभी महामुकाबले में समय है और भारतीय क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई 28 तारीख को होने वाली आईसीसी की बैठक में पाकिस्तान से वर्ल्ड कप में मैच नहीं खेलने की बात रख सकता है। आईसीसी का शेड्यूल बदला जाना अब मुमकिन नहीं। ऐसे में भारत अगर पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेलने से इनकार करता है तो उसे 2 अंक तो गंवाने पड़ेंगे ही, साथ ही उस पर जुमार्ना भी लग सकता है।   आगे पढ़ें

सियासी तर्जुमा

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आखिर, किससे खतरा था अलगाववादियों को?

सच कहें तो वोटवादी राजनीति में पगे भारत में अलगाववादियों के लिए किसी किस्म का खतरा रहा ही नहीं। लेकिन सरकारें हर साल उनकी हिफाजत के नाम पर दस करोड़ रुपया फूंकती चली गयीं। क्योंकि गणित वोट का था, सरकारी पैसे की बर्बादी का नहीं। लेकिन पुलवामा कांड के बाद सुरक्षा वापस लेने का क्या कोई असर होगा? नहीं। दुर्भाग्य से वैसा असर तो शायद ही हो पाए, जैसा यह देश देखना चाहता है। उसे कश्मीर में रहकर पाकिस्तान की हिमायत करने वालों के डर से पीले पड़े चेहरे देखने की चाहत है। मुल्क-विरोधी अघोषित सहोदरों के जिस्म और रूह पर कानून एवं व्यवस्था के डंडे से लगी चोट उभरती नजर आने की उसकी इच्छा है। यकीनन इसे आप प्रतिशोध का अतिरेक कह सकते हैं, लेकिन अतिरेक और कैसा-कैसा होता है, यह भी तो जान लीजिए। अतिरेक वह भी है, जिसमें घाटी में तैनात सेना के किसी जवान का सिर फोड़कर उसे मरने की हालत में पहुंचा दिया जाए। यह प्रक्रिया वह भी होती है, जिसके तहत निर्दोष लोगों का सरेराह नरसंहार करने वालों को आजादी के लड़ाके कहकर महिमामंडित किया जाता है।read more   आगे पढ़ें

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कमलनाथ और शिवराज का अंतर

मैं यह कह सकता हूं कि शिवराज सिंह चौहान से मेरी अच्छी पहचान और दोस्ती रही है। उन्हीं के कहे के मुताबिक मैं उन लोगों में से एक हूं जो शिवराज के दिल में रहता हैं। पर पिछले तेरह साल में मैं उनसे तेरह बार भी शायद ही मिला हूं। और जब मिला भी तो उन्हें चंद मिनटों बाद घड़ी की तरफ देखते पाया। मुख्यमंत्री के साथ ऐसा हो सकता है। यारी दोस्ती क्या करें, आखिर पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी का मामला जो ठहरा। पर अब तक मैं कमलनाथ से जब भी मिला हूं, वे पर्याप्त बतियाएं, खुल कर बोले और घड़ी उन्हें देखनी नहीं पड़ी, क्योंकि मैं जब भी मिला वे व्यस्त होने के बावजूद फुर्सत में थे। पता नहीं कैसे राजनीतिज्ञ है कमलनाथ, बहुत बेलाग बोलते हैँ और खुल कर सामने आते हैं। बोल दिया आफ दि रिकार्ड तो मान लेते हैं कि ऐसा ही होगा। शिवराज के पास आफ दि रिकार्ड और आन दि रिकार्ड कुछ है ही नहीं। मीडिया के अपने मित्रों में शिवराज अकेले में बहुत असहज दिखते हैं। सार्वजनिक तौर पर वे सहज हैं।   आगे पढ़ें

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नज़रिया और भी

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पुलवामा के बाद ऐसी देशभक्ति को ओढ़ें या बिछाएं...

पुलवामा के बाद देशभक्ति का जो सैलाब उमड़ रहा है उसमें हर रोज राष्ट्रद्रोह करने वाले भी मोमबत्ती जला रहे हैं। पेट्रोल-डीजल से लेकर आटे-दाल तक में मिलावट करने वाले देशभक्ति का जयघोष कर रहे हैं। नकली दवाएं बनाना , नकली दूध से लेकर मुर्दाघर में लाश देने के लिए रिश्वत मांगने वाले भ्रष्टाचारियों के खिलाफ जिस दिन पुलवामा हादसे की तरह विरोध शुरू हो जाएगा उस दिन न पठानकोट होगा न संसद पर हमला होगा और न कारगिल से लेकर पुलवामा होगा। विधानसभा और लोकसभा में कार्यवाही का हंगामे की भेंट चढ़ जाना क्या देशभक्ति का आचरण है। रक्षा सौदों में दलाली, किसान और जवानों के मामले में गलत नीतियां देशभक्ति के दायरे में तो नहीं आती।   आगे पढ़ें

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अब छलनी कर दो मौत के सौदागरों को

अब अपने आप में बड़ा सवाल यह है कि खुफिया एजेंसियों के इनपुट की अनदेखी क्यों होती है? हरेक बड़ी घटना के बाद खबरें आने लगती हैं कि खुफिया एजेंसियों ने हमले की आशंका तो पहले से जता दी थी। अगर खुफिया एजेंसियों की तरफ से एकत्र सूचनाओं की ही बार-बार अनदेखी की जानी चाहिए, तो फिर खुफिया एजेंसियों पर सरकारें हरेक साल हजारों करोड़ों रुपये फूंकती ही क्यों हैं? फिर तो इनके दफ्तरों पर ताले लगा देने चाहिए। पर बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि पुलवामा में देश के 44 शूरवीरों के दर्दनाक बलिदान के बाद भी हमारे कुछ कथित नेता बयानबाजी से बाज नहीं आ रहे हैं।   आगे पढ़ें

विश्लेषणऔर भी

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प्रियंका गांधी: अब वक्त बतायेगा बंद मुट्ठी लाख की ख़ाक की..!

यूपी में आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का महागठबंधन बना है। इस महागठबंधन ने राज्य में कांग्रेस पार्टी के लिये सिर्फ दो सीटें छोड़ी थी, ऐसे में कांग्रेस पार्टी में यूपी को लेकर कोई बड़ा निर्णय होना तो स्वाभाविक ही था। यह निर्णय प्रियंका गांधी के राजनीतिक पदार्पण में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। प्रियंका गांधी की मदद से कांग्रेस पार्टी के यूपी में परंपरागत वोट बैंक को सहेजने में भी मदद मिलेगी, जो निकट भविष्य में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिये तो पार्टी के लिये काफी मूल्यवान साबित होगा ही साथ ही 2022 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी यूपी की राजनीति में बड़ी ताकत के रूप में स्थापित हो जाएगी। प्रियंका गांधी अभी तक अमेठी और रायबरेली में ही लोकसभा चुनाव के मौके पर अपनी भूमिका निभाती रही हैं लेकिन अब उनकी भूमिका पूरे उत्तरप्रदेश में होगी।   आगे पढ़ें

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अच्छा होगा पहले राहुल कांग्रेस को बदल लें....

शायद कांग्रेस को एक बात समझ में आ रही है कि जहां उसकी भाजपा से सीधी लड़ाई है, वहां के मुस्लिम मतदाताओं के पास उसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है, लिहाजा मुस्लिमों की उपेक्षा करके भी यदि कांग्र्रेस अध्यक्ष मंदिरों की खाक छानते रहेंगे तो भी मुस्लिमों को जाना कहां है? इसमें हकीकत हो सकती है। लेकिन इसमें खतरा एक यह भी है कि किस्सा, न खुदा ही मिला न बिसाले सनम-न इधर के रहे, न उधर के रहे, जैसा हो सकता है। आखिर अब हिन्दू भला कांग्रेस पर क्यों भरोसा करने लगेगा। किसी मंदिर में मत्था टेकने से, किसी मठ के स्वामी के दर्शन करने से क्या हिन्दू उन तथ्यों की अनदेखी कर सकता है, जब कांग्रेस ने प्रो मुस्लिम राजनीति को चुन लिया था।read more   आगे पढ़ें