फर्स्ट कॉलम (प्रकाश भटनागर)और भी

राज्य और भी

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शिवनगरी उज्जयिनी कल मनेगी रंगपंचमी, पुजारी महाकाल के साथ खेलेंगे फूलों से होली

महाकाल मंदिर में रविवार को पुजारियों ने परिसर में टेसू के फूलों से प्राकृतिक रंग तैयार किया। इस रंग से सुबह भस्मारती में भगवान के साथ होली खेली जाएगी। राजा के आंगन में रंग उत्सव को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भस्मारती दर्शन की अनुमति ली है।   आगे पढ़ें

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सिंधिया का स्वागत करने पहुंचे कांग्रेसी आपस में भिड़े पुलिस ने किया बीच-बचाव

सांसद सिंधिया का स्वागत करने के लिए हमेशा की तरह सैंकड़ों कार्यकर्ताओं की भीड़ स्टेशन पहुंची थी। स्वागत करने के बाद सिंधिया स्टेशन से रवाना हो गए। उनके जाते ही वहां मौजूद भीड़ में किसी ने कांग्रेस कार्यकर्ता की जेब काटने का प्रयास किया। जेब काटने की बात सामने आते ही अफरातफरी मच गई और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में मारपीट करने लगे। इस दौरान धर्मेंद्र शर्मा नामक व्यक्ति के साथ मारपीट की गई। मारपीट का शिकार हुए युवक ने भी अपने-आपको कांग्रेसी बताया।   आगे पढ़ें

राजनीतिऔर भी

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यूपी की सियासत में धर्म का ब्रह्मास्त्र, आस्था के आसरे हैं नेता

यूपी की सियासत में आस्था के ब्रह्मास्त्र का सियासी असर बहुत गहरे से नापा जा चुका है। सियासी रणनीति में इसके सटीक इस्तेमाल से बीजेपी अर्श पर पहुंच चुकी है। वहीं पंथनिरपेक्षता के नाम पर इसके मुखर विरोध के चलते अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का तमगा लेकर विपक्ष फर्श पर। यही वजह है कि इस बार लोकसभा चुनाव में विपक्ष 'नरम हिंदुत्व' की सियासत साधने के लिए आस्था के मुखर प्रदर्शन से कहीं भी परहेज नहीं कर रहा है। राममंदिर आंदोलन से हुए भाग्योदय के बाद बीजेपी ने विकास को चुनावी चेहरा तो बनाया लेकिन उसे आस्था के 'अमृत' से प्रभावी बनाने की रणनीति नहीं छोड़ी।   आगे पढ़ें

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झारखंड में टूट की कगार पर लालू की पार्टी, राजद का बड़ा धड़ा भाजपा के संपर्क में

पार्टी के बीच भीतरघात की यह बड़ी वजह बताई जा रही है। जनार्दन पासवान ने भाजपा में जाने का लगभग संकेत दे दिया है। इससे इतर अन्नपूर्णा देवी का फोन जहां शनिवार को सुबह से ही बंद था, वहीं मनोज भुइयां का मोबाइल कवरेज क्षेत्र से बाहर बताता रहा। पार्टी सूत्रों के अनुसार दल का एक धड़ा राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह को चतरा से लड़ाना चाहता था, जबकि अन्नपूर्णा की निगाहें कोडरमा सीट कटने के बाद पलामू पर थी। उन्होंने इस बाबत पलामू में रथयात्रा निकालने के साथ-साथ अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया था।   आगे पढ़ें

सियासी तर्जुमा

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आखिर, इन दोपायों की फितरत का दोष किसके सिर मढ़ें...!

आखिर इस सबका दोषी कौन है! क्या मूलत: यह गलती सेना के उन चालीस शूरवीर जवानों की है, जो उस साल शहीद हो गये, जब देश आम चुनाव की तैयारी में लगा हुआ था! क्योंकि और कोई तो गलत नजर आता ही नहीं। हरिप्रसाद शान से कांग्रेस की शान बने हुए हैं। पुलवामा आतंकी हमले को हादसा बताने वाले दिग्विजय मजे में लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। प्रोफेसर रामगोपाल के बचाव में भतीजे अखिलेश यादव ट्विटर पर मोर्चा खोल बैठे हैं तो सैम पित्रोदा केवल इस मायने में अकेले नजर आए कि उनकी पार्टी ने उनके बयान से पल्ला झाड़ लिया है।   आगे पढ़ें

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यह दिग्विजय के लिए ‘समय का बूमरैंग’ है...!

। नाथ के कथन की टाइमिंग पर गौर कीजिए। यह लगभग पक्का है कि विकल्प की स्वतंत्रता की सूरत में दिग्विजय राजगढ़ का ही चयन करते। किंतु मुख्यमंत्री ने ऐसा होने से पहले ही उनकी इच्छा के आगे तगड़ा स्पीड ब्रेकर खड़ा कर दिया   आगे पढ़ें

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नज़रिया और भी

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ग्वालियर का एयरबेस, खमरिया के बम और हमारी अवनि चतुर्वेदी

मैं उन बौद्धिकों की बात नहीं करता जो हमारे जवानों पर थूकने, पत्थर बरसाने वालों के भी मानवाधिकार का परचम थामें इंडिया इंटरनेशनल में प्रेसकांफ्रेंस संबोधित करते हैं और सुप्रीमकोर्ट में याचिकाओं का बोझ बढ़ाते हैं। बहरहाल ग्वालियर और जबलपुर के लिए गौरव का ये क्षण तो है ही अपने विंध्यवासियों के लिए भी कम नहीं। सोशलमीडिया पर रीवा की बेटी अवनि चतुर्वेदी की फोटो तैर रही है- कि आतंकियों का काम तमाम करने वाली टुकड़ी की कमान उसके हाथों में थी। इसे आप भावनाओं का महज प्रकटीकरण भी कह सकते हैं। बालाटोक स्ट्राइक में कौन थे..कौन नहीं यह तो उस आपरेशन के सुप्रीम कमांडर ही जानते हैं..। कभी उचित समय पर हो सकता है कि इन वीर जाँबाजों के परिचय को देश के साथ साझा करें। लेकिन अवनि जैसी बेटियों के पराक्रमी क्षमता के स्मरण का अवसर तो बनता ही है। read more   आगे पढ़ें

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समय है देश विरोधियो के चहरे से नकाब उतारने का

पाक परस्ती के चलते जो लोग यह कहते हैं कि युद्ध किसी समस्या का विकल्प नहीं होता उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि युद्ध किसी समस्या का पहला विकल्प नहीं होता लेकिन अंतिम उपाय और एकमात्र समाधान अवश्य होता है। श्री कृष्ण ने भी कुरुक्षेत्र की भूमि पर गीता का ज्ञान देकर महाभारत के युद्ध को धर्म सम्मत बताया था। और जो लोग यह कहते हैं कि 1947 से लेकर आजतक कश्मीर के कारण भारत और पाकिस्तान में कई युद्ध हो चुके हैं तो क्या हुआ? तो उनके लिए यह जानना आवश्यक है कि हर युद्ध में हमारी सैन्य विजय हुई लेकिन राजनैतिक हार। हर युद्ध में हम अपनी सैन्य क्षमता के बल पर किसी न किसी नतीजे पर पहुंचने के करीब होते थे लेकिन हमारे राजनैतिक नेतृत्व हमें किसी नतीजे पर पहुंचा नहीं पाए। यह वाकई में शर्म की बात है कि हर बार हमारी सेनाओं द्वारा पाकिस्तान को कड़ी शिकस्त देने के बावजूद हमारी सरकारें कश्मीर समस्या का हल नहीं निकाल पाईं।read more   आगे पढ़ें

विश्लेषणऔर भी

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क्या ये तर्क कयासों से परे नहीं हैं.....

रही बात असिहष्णुता और साम्प्रदायिकता की खाई की, जो एज़ पर विपक्षी दल, बढ़ी है, तो उनके लिए बस यह कहना है कि इन पांच सालों और उससे पहले के पांच सालों के आंकड़े उठा कर देख लें कि किस वक्फे में दंगे ज़्यादा हुए हैं। हां यह ज़रूर है कि बीते पांच सालों में हमने बायस्ड पत्रकारिता की नई मिसालें कायम होती देखी हैं। नेता, अभिनेता, पत्रकार, आम लोग, सबके चेहरों से नकाब उतर गए हैं। पहले हम जिन पर आंख मूंद कर विश्वास कर लेते थे उनसे अब सोशल मीडिया के ज़रिए सीधे सवाल कर रहे हैं तो हाल यह है कि अब तक जो शान्त और बौद्धिक नज़र आते थे, वो अब बदले बदले से सरकार नज़र आने लगे हैं। बाकी, अन्तिम फैसला तो हम पर ही हैं कि हम किसे अपनाएंगे और किसे ठुकरा देंगे। मई की गर्मी में सब क्लीयर हो जाएगा...पर मेरी दुआएं उनके साथ हैं, जिन्होंने इस देश में जबरदस्त बदलाव की नींव रखी है और नामुमकिन को मुमकिन करने का भरोसा दिया है.. read more   आगे पढ़ें

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कश्मीर: बीमार का इलाज, बीमारी का नहीं

झाबुआ से भाजपा विधायक जीएस डामोर के बयान का बुरा नहीं मानना चाहिए। उस पर चिल्लपों की जरूरत भी नहीं है। क्या हुआ जो उन्होंने कश्मीर के चार जिलों को अलग कर नया राज्य बनाने का फॉर्मूला सुझा दिया ! आप कहेंगे कि बात बे-सिर पैर की है। आप सही कह रहे हैं। आपका यह खयाल भी होगा कि ऐसा करने से भी आतंकवाद खत्म नहीं होगा। इस बात पर भी हमारी सहमति है। लेकिन कश्मीर और खासतौर से आतंकवाद से जुड़ी समस्या सुलझाने के नाम पर चहुंओर जो कुछ चल रहा है, उसे देख और सुनकर डामोर की बात बहुत अधिक नहीं खलती है। read more   आगे पढ़ें