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अनैतिक आचरण की बदबू वाली व्यग्रता

माना कि सावन के अंधे को हरा ही दिखता है, लेकिन आंख वाले तो अंधे को यह बता सकते हैं ना कि भाई हरापन कब का जा चुका। यह पतझड़ का मौसम है। भाजपा में आंख वालों की कमी नहीं है, इसके बावजूद कोई भी शिवराज और भार्गव को यह नहीं बता रहा कि अब आप दोनो क्रमश: मुख्यमंत्री और मंत्री नहीं हैं। संयत आचरण करें। समस्या यह है कि मामला सारे कुएं में भांग घुली होने जैसा हो गया है। कर्नाटक में 23 मई, 2018 (मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा शपथ ग्रहण करने की तिथि) के बाद से कमल तले लेटकर कीचड़ स्नान करते भाजपाई भी एग्जिट पोल के नतीजों के बाद वहां सरकार की रुखसती का ऐलान करने लगे हैं। अलवर सामूहिक बलात्कार कांड में घिरी अशोक गेहलोत सरकार को मायावती आंख दिखा चुकी हैं। इसलिए रेतीले टीलों वाले राजस्थान में भाजपाइयों को यह मृग मरीचिका भी लुभाने लगी है कि जल्दी ही गेहलोत सरकार सत्ता से बाहर हो जाएगी। देश का लोकतंत्र कोई मजाक है क्या! या निर्वाचित सरकार को गिराना गुड्डे-गुड़ियों का खेल बन गया है! दम्भ में चूर भाजपा को नहीं भूलना चाहिए कि उसकी ऐसी बचकाना कोशिशों के चलते उत्तराखंड में उसे कैसे मुंह की खाना पड़ी थी।   आगे पढ़ें

फर्स्ट कॉलम (प्रकाश भटनागर)और भी

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गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा दांव पर, पांच हजार वोटों से चल रहे हैं पीछे

गुना में डाक मतपत्रों की गणना में ज्योतिरादित्य सिंधिया 313 मतों से पीछे चल रहे हैं। गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट पर लोकसभा चुनाव के छठवें चरण में 12 मई को मतदान हुआ था, यहां 70.02 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां मुकाबला कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा के डॉ. केपी यादव के बीच है। गुना-शिवपुरी संसदीय सीट तीन जिलों की आठ विधानसभा सीटों को मिलाकर बनी है। गुना जिले की बमोरी व गुना, अशोकनगर जिले की चंदेरी, मुंगावली व अशोकनगर और शिवपुरी जिले की पोहरी, कोलारस व शिवपुरी विधानसभा शामिल हैं।   आगे पढ़ें

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डाक मत पत्रों की गणना में साध्वी प्रज्ञा दिग्विजय सिंह से आगे

मध्यप्रदेश की राजनीति का केंद्र रहे भोपाल लोकसभा सीट पर बीते तीन दशकों से भाजपा का कब्जा रहा है। इसका अंदाजा भी इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते लोकसभा चुनाव (2014) में भाजपा वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के इस सीट से चुनाव लड़ने के इंकार के बाद वर्तमान सांसद आलोक संजर को अप्रत्याशित टिकट मिला था। साथ ही उन्हें विजय हासिल हुई थी। भाजपा के किले में सेंध लगाने के लिए कांग्रेस ने इस बार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उतारा। दिग्विजय के खिलाफ चर्चित साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को चुनाव मैदान में उतार कर भाजपा ने चुनाव को संघर्षपूर्ण बना दिया। भोपाल लोकसभा सीट से 2014 के चुनाव में भाजपा के आलोक संजर ने जीत दर्ज की थी।   आगे पढ़ें

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एनडीए की डिनर बैठक में 36 घटक दलों के नेता हुआ शामिल, मोदी के नेतृत्व पर जताया भरोसा

मीटिंग के बाद रामविलास पासवान ने विपक्ष की ओर से परिणाम से पहले ही चुनाव पर उठाए जा रहे सवालों पर कहा कि 'टिट फॉर टैट' होगा। मीटिंग में रामविलास पासवान ने ही मोदी के पक्ष में प्रस्ताव रखा जिसका सभी दलों ने अनुमोदन किया। पासवान ने बताया, 'पीएम ने कहा कि हमारा लक्ष्य कभी सत्ता पाना नहीं रहा है, हमारा लक्ष्य नए भारत का निर्माण है। हमने पांच वर्षों में वोट के हिसाब से कोई फैसला नहीं लिया। उन्होंने कहा कि एनडीए के सभी नेताओं ने अपने-अपने तरीके से पीएम का स्वागत किया। पीएम ने कहा कि एनडीए अब एक परिवार बन चुका है।   आगे पढ़ें

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कर्नाटक में गरमाई सियासत के बीच कुमारस्वामी की सरकार को राहत, भाजपा ने रोका आपरेशन लोटस

एग्जिट पोल के अनुमानों से उत्साहित येदियुरप्पा कर्नाटक की गठबंधन सरकार को गिराने की नई कवायद के तहत तैयारी में जुट गए थे। बताया जा रहा है कि अभी उन्हें कथित आॅपरेशन लोटस को रोकने के लिए पार्टी आलाकमान की तरफ से निर्देश दिए गए हैं पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद 10 विधायक (7 कांग्रेस और 3 जेडीएस) बीजेपी के खेमे में जाने को तैयार हैं। अब चूंकि पार्टी नेतृत्व ने कथित आॅपरेशन लोटस ठंडे बस्ते में डाल दिया है लिहाजा कांग्रेस और जेडीएस के असंतुष्ट विधायक एक राय नहीं बना पा रहे हैं। उनको लगता है कि देरी होने से उपचुनाव में उनके जीतने की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। बता दें कि पार्टी से बगावत की सूरत में इन विधायकों की सदस्यता जाना तय है और ऐसे में उपचुनाव की नौबत आ सकती है।   आगे पढ़ें

सियासी तर्जुमा

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चौकीदार! नामदार! या कोई और दमदार!!

क्या सफलता ‘चौकीदार’ के संबोधन से मशहूर तथा बदनाम, दोनो हुए नरेंद्र मोदी के खाते में जाएगी? या इसका रुख इस मर्तबा नामदार कह-कहकर पुकारे गये राहुल गांधी की ओर रहेगा?   आगे पढ़ें

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विंध्य में कांग्रेस की जमीन इसलिए खिसकी..!

राहुल गांधी का विधानसभा चुनाव के दौरान रीवा-सतना जिले में रोडशो हुआ था। इस शो का परिणाम फ्लाप रहा क्योंकि रीवा की सभी आठों सीटें भाजपा की झोली में जा गिरीं। राहुल गाँधी के दिमाग में यह सवाल जरूर कुलबुलाएगा कि ऐसा क्यों हुआ? तब उन्हें यह बात याद दिलाने की जरूरत पड़ेगी कि विधानसभा चुनाव की सिरमौर चौराहे कि उस नुक्कड़ सभा में आपने अपने पिता राजीव गांधी की प्रतिमा के आगे यह ऐलान किया था कि विधानसभा में पैराशूट कैंडिडेट लैंड नहीं करेंगे। लेकिन आपके दिल्ली लौटते ही मध्यप्रदेश कांग्रेस के दफ्तर में ऐसी खिचड़ी पकी कि पैराशूट लैंडर प्रत्याशियों का तांता सा लग गया। इसी रीवा जिले में रीवा, मनगँवा और देवतालाब विधानसभा क्षेत्र से वो प्रत्याशी उतारे गए जो तीन महीने पहले तक कांग्रेस का नाश मनाते रहे। सीधी के सिंगरौली से भी ऐसा ही प्रत्याशी उतारा गया। सिर्फ सतना विधानसभा क्षेत्र के पैराशूट लैंडर ने चुनाव जीतकर लाज रखी जो इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की खुलेआम कब्र खोद रहा है। मुश्किल यह है कि कांग्रेस आलाकमान इस गाढ़े वक्त में भी ठकुरसुहाती से मुक्त नहीं है। read more   आगे पढ़ें

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बदजुबान नेताओं की नकेल चुनाव आयोग नहीं वोटर के हाथ है...

राज्य की विधानसभाओं और लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक दलों से जिस आचार संहिता की इमानदारी से पालन करने की अपेक्षा की जाती है उसकी उपेक्षा और अनादर करने वाले नेता हर राजनीतिक दल की कमजोरी होते है। खेद की बात यह है कि राजनीतिक दल खुद होकर अपने नेताओं को ऐसी हिदायत कम ही देते है कि वे चुनावी रैलियों अथवा सोशल मीडिया के जरिए ऐसे बयान देने से परहेज करे ,जिनसे धर्म अथवा जाति के नाम पर चुनावों की निष्पक्षता के प्रभावित होने की आशंका हो। read more   आगे पढ़ें

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तो सवाल यह है कि सवालों से डरता कौन है?

मनन कीजिए कि दुनिया में यदि कुछ भयंकर है तो वो सवाल है और कुछ मुश्किल है वह है जवाब देना । कयामत के दिन ईश्वर को जवाब देना है,घर जाकर पिताजी को या पत्नी को। बॉस या मालिक नामक प्राणी का तो अस्तित्व ही जवाब मांगने पर टिका हुआ है । read more   आगे पढ़ें

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