फर्स्ट कॉलम (प्रकाश भटनागर)और भी

राज्य और भी

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उमा बोलीं- दिग्गी नहीं भाजपा के लिए चुनौती, आलोक संजर ही हरा सकते हैं चुनाव

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि भोपाल लोकसभा क्षेत्र के लिए किसी पूर्व मुख्यमंत्री को चुनाव लड़वाने की जरूरत नहीं है, बल्कि सांसद आलोक संजर ही कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह को चुनाव हरा सकता है। भारती ने कहा कि पूर्व सीएम होना कोई चुनाव जीतने की गारंटी नहीं है। मीडिया से बातचीत में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि दिग्विजय सिंह भाजपा के लिए चुनौती नहीं हैं।   आगे पढ़ें

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राज्य सरकार से होईकोर्ट का सवाल, भोपाल को ही क्यों मिलती हैं नई स्वास्थ्य सुविधाएं

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में अधीक्षक के पद पर आसीन सीनियर डॉक्टर से प्रबंधन के अलावा अन्य कार्य भी कराए जाते हैं जबकि ग्वालियर बेंच में सरकार द्वारा पेश जवाब के अनुसार अधीक्षक का पद पूर्णकालिक है। इसके बावजूद यहां अधीक्षक से अध्यापन, चिकित्सा व अन्य कार्य भी कराए जा रहे हैं। इससे मेडिकल कॉलेज अस्पताल का प्रबंधन समुचित तरीके से नहीं हो पा रहा है।   आगे पढ़ें

राजनीतिऔर भी

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राजनीति की पिच पर रनआउट हो सकते हैं गंभीर, नाखुश भाजपा नेतृत्व ने फिर मांगे नाम

बैठक में शामिल हुए दिल्ली बीजेपी के कुछ अन्य नेताओं ने दावा किया, 'लोकसभा चुनावों में टिकट पाने के लिए पार्टी में सेलिब्रिटी के शामिल होने को लेकर आपत्तियां उठी थीं और मांग की गई थी कि समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देते हुए टिकट बांटा जाना चाहिए।' सूत्रों ने दावा किया कि केंद्रीय नेतृत्व इससे 'नाखुश' है कि दिल्ली इकाई सेलिब्रिटी को चुनाव मैदान में उतारने पर आपत्ति कर रही है। दिल्ली इकाई को निर्देश दिया गया है कि उम्मीदवारों के नाम पर फिर से काम करें और फिर केंद्रीय नेतृत्व को सूची सौंपे। पार्टी नेतृत्व ने दिल्ली लोकसभा चुनाव प्रभारी निर्मला सीतारमण, सह प्रभारी जयभान सिंह पवैया और प्रदेश महासचिव (संगठन) सिद्धार्थन को प्रत्याशियों की नई सूची तैयार करने का निर्देश दिया है।   आगे पढ़ें

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राहुल की स्कीम पर वित्तमंत्री का वार, कहा- योजनओं के नाम पर कांग्रेस करती है छल-कपट

जेटली ने मनरेगा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मनरेगा में 40 हजार करोड़ रुपये साल का खर्च करने का वादा था, और करते थे 28 हजार करोड़। और यह पैसा भी केंद्र से राज्य, राज्य से जिला और इस बीच कई कड़ियों से होकर गुजरता था। गरीब को कितना पैसा मिलता था इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में भी किसानों का कर्ज माफ करने की बात कही। कर्नाटक में इस मद में 2600 करोड़ रुपये खर्च किए, मध्यप्रदेश ने 3000 करोड़ रुपये और पंजाब ने 5000 करोड़ रुपये खर्च किए। कांग्रेस का भरोसा सिर्फ चुनावी नारे देने का रहा है, संसाधन देने का नहीं।   आगे पढ़ें

सियासी तर्जुमा

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आखिर, इन दोपायों की फितरत का दोष किसके सिर मढ़ें...!

आखिर इस सबका दोषी कौन है! क्या मूलत: यह गलती सेना के उन चालीस शूरवीर जवानों की है, जो उस साल शहीद हो गये, जब देश आम चुनाव की तैयारी में लगा हुआ था! क्योंकि और कोई तो गलत नजर आता ही नहीं। हरिप्रसाद शान से कांग्रेस की शान बने हुए हैं। पुलवामा आतंकी हमले को हादसा बताने वाले दिग्विजय मजे में लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। प्रोफेसर रामगोपाल के बचाव में भतीजे अखिलेश यादव ट्विटर पर मोर्चा खोल बैठे हैं तो सैम पित्रोदा केवल इस मायने में अकेले नजर आए कि उनकी पार्टी ने उनके बयान से पल्ला झाड़ लिया है।   आगे पढ़ें

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यह दिग्विजय के लिए ‘समय का बूमरैंग’ है...!

। नाथ के कथन की टाइमिंग पर गौर कीजिए। यह लगभग पक्का है कि विकल्प की स्वतंत्रता की सूरत में दिग्विजय राजगढ़ का ही चयन करते। किंतु मुख्यमंत्री ने ऐसा होने से पहले ही उनकी इच्छा के आगे तगड़ा स्पीड ब्रेकर खड़ा कर दिया   आगे पढ़ें

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नज़रिया और भी

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ग्वालियर का एयरबेस, खमरिया के बम और हमारी अवनि चतुर्वेदी

मैं उन बौद्धिकों की बात नहीं करता जो हमारे जवानों पर थूकने, पत्थर बरसाने वालों के भी मानवाधिकार का परचम थामें इंडिया इंटरनेशनल में प्रेसकांफ्रेंस संबोधित करते हैं और सुप्रीमकोर्ट में याचिकाओं का बोझ बढ़ाते हैं। बहरहाल ग्वालियर और जबलपुर के लिए गौरव का ये क्षण तो है ही अपने विंध्यवासियों के लिए भी कम नहीं। सोशलमीडिया पर रीवा की बेटी अवनि चतुर्वेदी की फोटो तैर रही है- कि आतंकियों का काम तमाम करने वाली टुकड़ी की कमान उसके हाथों में थी। इसे आप भावनाओं का महज प्रकटीकरण भी कह सकते हैं। बालाटोक स्ट्राइक में कौन थे..कौन नहीं यह तो उस आपरेशन के सुप्रीम कमांडर ही जानते हैं..। कभी उचित समय पर हो सकता है कि इन वीर जाँबाजों के परिचय को देश के साथ साझा करें। लेकिन अवनि जैसी बेटियों के पराक्रमी क्षमता के स्मरण का अवसर तो बनता ही है। read more   आगे पढ़ें

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समय है देश विरोधियो के चहरे से नकाब उतारने का

पाक परस्ती के चलते जो लोग यह कहते हैं कि युद्ध किसी समस्या का विकल्प नहीं होता उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि युद्ध किसी समस्या का पहला विकल्प नहीं होता लेकिन अंतिम उपाय और एकमात्र समाधान अवश्य होता है। श्री कृष्ण ने भी कुरुक्षेत्र की भूमि पर गीता का ज्ञान देकर महाभारत के युद्ध को धर्म सम्मत बताया था। और जो लोग यह कहते हैं कि 1947 से लेकर आजतक कश्मीर के कारण भारत और पाकिस्तान में कई युद्ध हो चुके हैं तो क्या हुआ? तो उनके लिए यह जानना आवश्यक है कि हर युद्ध में हमारी सैन्य विजय हुई लेकिन राजनैतिक हार। हर युद्ध में हम अपनी सैन्य क्षमता के बल पर किसी न किसी नतीजे पर पहुंचने के करीब होते थे लेकिन हमारे राजनैतिक नेतृत्व हमें किसी नतीजे पर पहुंचा नहीं पाए। यह वाकई में शर्म की बात है कि हर बार हमारी सेनाओं द्वारा पाकिस्तान को कड़ी शिकस्त देने के बावजूद हमारी सरकारें कश्मीर समस्या का हल नहीं निकाल पाईं।read more   आगे पढ़ें

विश्लेषणऔर भी

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क्या ये तर्क कयासों से परे नहीं हैं.....

रही बात असिहष्णुता और साम्प्रदायिकता की खाई की, जो एज़ पर विपक्षी दल, बढ़ी है, तो उनके लिए बस यह कहना है कि इन पांच सालों और उससे पहले के पांच सालों के आंकड़े उठा कर देख लें कि किस वक्फे में दंगे ज़्यादा हुए हैं। हां यह ज़रूर है कि बीते पांच सालों में हमने बायस्ड पत्रकारिता की नई मिसालें कायम होती देखी हैं। नेता, अभिनेता, पत्रकार, आम लोग, सबके चेहरों से नकाब उतर गए हैं। पहले हम जिन पर आंख मूंद कर विश्वास कर लेते थे उनसे अब सोशल मीडिया के ज़रिए सीधे सवाल कर रहे हैं तो हाल यह है कि अब तक जो शान्त और बौद्धिक नज़र आते थे, वो अब बदले बदले से सरकार नज़र आने लगे हैं। बाकी, अन्तिम फैसला तो हम पर ही हैं कि हम किसे अपनाएंगे और किसे ठुकरा देंगे। मई की गर्मी में सब क्लीयर हो जाएगा...पर मेरी दुआएं उनके साथ हैं, जिन्होंने इस देश में जबरदस्त बदलाव की नींव रखी है और नामुमकिन को मुमकिन करने का भरोसा दिया है.. read more   आगे पढ़ें

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कश्मीर: बीमार का इलाज, बीमारी का नहीं

झाबुआ से भाजपा विधायक जीएस डामोर के बयान का बुरा नहीं मानना चाहिए। उस पर चिल्लपों की जरूरत भी नहीं है। क्या हुआ जो उन्होंने कश्मीर के चार जिलों को अलग कर नया राज्य बनाने का फॉर्मूला सुझा दिया ! आप कहेंगे कि बात बे-सिर पैर की है। आप सही कह रहे हैं। आपका यह खयाल भी होगा कि ऐसा करने से भी आतंकवाद खत्म नहीं होगा। इस बात पर भी हमारी सहमति है। लेकिन कश्मीर और खासतौर से आतंकवाद से जुड़ी समस्या सुलझाने के नाम पर चहुंओर जो कुछ चल रहा है, उसे देख और सुनकर डामोर की बात बहुत अधिक नहीं खलती है। read more   आगे पढ़ें